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हिंदी है सूर, कबीर और रसखान... आओ सब मिलकर करें उत्थान
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सेमिनार में संबोधित करतीं प्रधानार्चा अनीता सिंह। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सोमवार को ‘आओ सब मिलकर करें हिंदी का उत्थान’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें हिंदी के महत्व की जानकारी दी गई। साथ ही अधिक से अधिक कार्य हिंदी में करने की अपील की। वक्ताओं ने कहा - हिंदी सूर, कबीर और रसखान है। परिवार में हिंदी बोलने पर रिश्तों में मिठास बढ़ती है। देश के कई स्थानों पर बड़े संस्कार के साथ हिंदी बोली जाती है।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य अनीता सिंह ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। सभी को हिंदी में ही बातचीत करनी चाहिए। अन्य भाषाएं जरूरी हैं, मगर हिंदी भी जरूरी है। हिंदी खुद में सम्मानित है, फिर भी बढ़ावा देने के जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि जीजीआईसी न्यूरिया की पूर्व प्रधानाचार्य सुखविंदर कौर ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की मुहिम सराहनीय है। मातृभाषा हिंदी देश के कई कोनों में बोली जाती है। सभी कार्य हिंदी में होने लगे हैं। पहले अंग्रेजी में होने के कारण लोगों को दिक्कत होती थी। प्रधानमंत्री ने भी हिंदी को बढ़ावा देते हुए गुड मॉर्निंग, हाय, हेलो की जगह नमस्ते को महत्व दिया है। अन्य भाषाओं से अपनी संस्कार खोते जा रहे हैं। बच्चों के अंदर हर कला होती है। इसलिए मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा दें। उन्होंने कविता के माध्यम से कहा कि हिंदी सूर कबीर है, हिंदी है रसखान, आओ सब मिलकर करें हिंदी की उत्थान। हिंदी को हम शृंगार दें, मिलकर इसे स्वर दें, उसे सम्मान देकर हम फिर से इसे निखार दें।
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शिक्षिका पूजा गंगवार ने कहा कि हिंदी भाषा को 14 सितंबर 1949 को राजभाषा का दर्जा मिला था। आज हम लोग हिंदी की 73वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहां हर राज्य की अपनी संस्कृति, पहनावा, खान-पान और बोली जाने वाली भाषा है। इस समय देश में 22 भाषाएं बोली जा रहीं हैं। इनमें हिंदी भाषा भी शामिल है।
शिक्षिका बबिता रानी ने कहा कि हिंदी के उत्थान को लेकर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हिंदी बोलने में गर्व महसूस होता है। हिंदी भाषा से रिश्तों में मिठास बढ़ती है।
आर्या बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने हिंदी के उत्थान को लेकर कविता के माध्यम से विचार रखे। कहा कि हिंदी हूं मैं, मां का स्नेहिल स्पर्श हूं, जिन राष्ट्र का उत्कर्ष हूं, जीवन सुधा रसपान करो, ह्दयों में बसा, जो हर्ष हूं, भारत मां की भाल की बिंदी हूं मैं, हिंदी हूं मैं।
सेमिनार का संचालन कर रहे सेवानिवृत्त शिक्षक लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि हिंदी मातृभाषा है। बच्चों को शुरू से ही इसकी जानकारी देनी चाहिए। कार्यालयों से लेकर घर तक अधिकांश काम हिंदी में करने से बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर कामिनी, शहवीन, दिशा, सेानी, शालिनी आदि छात्राओं ने भी हिंदी के उत्थान को लेकर अपने विचार रखे।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य अनीता सिंह ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। सभी को हिंदी में ही बातचीत करनी चाहिए। अन्य भाषाएं जरूरी हैं, मगर हिंदी भी जरूरी है। हिंदी खुद में सम्मानित है, फिर भी बढ़ावा देने के जरूरत है।
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विशिष्ट अतिथि जीजीआईसी न्यूरिया की पूर्व प्रधानाचार्य सुखविंदर कौर ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला की मुहिम सराहनीय है। मातृभाषा हिंदी देश के कई कोनों में बोली जाती है। सभी कार्य हिंदी में होने लगे हैं। पहले अंग्रेजी में होने के कारण लोगों को दिक्कत होती थी। प्रधानमंत्री ने भी हिंदी को बढ़ावा देते हुए गुड मॉर्निंग, हाय, हेलो की जगह नमस्ते को महत्व दिया है। अन्य भाषाओं से अपनी संस्कार खोते जा रहे हैं। बच्चों के अंदर हर कला होती है। इसलिए मातृभाषा हिंदी को बढ़ावा दें। उन्होंने कविता के माध्यम से कहा कि हिंदी सूर कबीर है, हिंदी है रसखान, आओ सब मिलकर करें हिंदी की उत्थान। हिंदी को हम शृंगार दें, मिलकर इसे स्वर दें, उसे सम्मान देकर हम फिर से इसे निखार दें।
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शिक्षिका पूजा गंगवार ने कहा कि हिंदी भाषा को 14 सितंबर 1949 को राजभाषा का दर्जा मिला था। आज हम लोग हिंदी की 73वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। भारत एक ऐसा देश है, जहां हर राज्य की अपनी संस्कृति, पहनावा, खान-पान और बोली जाने वाली भाषा है। इस समय देश में 22 भाषाएं बोली जा रहीं हैं। इनमें हिंदी भाषा भी शामिल है।
शिक्षिका बबिता रानी ने कहा कि हिंदी के उत्थान को लेकर बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हिंदी बोलने में गर्व महसूस होता है। हिंदी भाषा से रिश्तों में मिठास बढ़ती है।
आर्या बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने हिंदी के उत्थान को लेकर कविता के माध्यम से विचार रखे। कहा कि हिंदी हूं मैं, मां का स्नेहिल स्पर्श हूं, जिन राष्ट्र का उत्कर्ष हूं, जीवन सुधा रसपान करो, ह्दयों में बसा, जो हर्ष हूं, भारत मां की भाल की बिंदी हूं मैं, हिंदी हूं मैं।
सेमिनार का संचालन कर रहे सेवानिवृत्त शिक्षक लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि हिंदी मातृभाषा है। बच्चों को शुरू से ही इसकी जानकारी देनी चाहिए। कार्यालयों से लेकर घर तक अधिकांश काम हिंदी में करने से बढ़ावा मिलेगा। इस मौके पर कामिनी, शहवीन, दिशा, सेानी, शालिनी आदि छात्राओं ने भी हिंदी के उत्थान को लेकर अपने विचार रखे।