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हिंदी हमारा अभिमान, इस पर गर्व
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पीलीभीत। हिंदी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि अधिसंख्य भारतीयों की जीवनशैली है। संवाद में मधुरता और अपनापन स्थापित करने के लिए प्रभावी माध्यम है। यही वजह है कि अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, विधि और अंग्रेजी जैसे विषयों को पढ़ाने वाले कई शिक्षक न सिर्फ विद्यार्थियों से हिंदी को मान देने का आह्वान करते है, बल्कि खुद भी विशेष लेखन से हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के लिए प्रयासरत है। उनका कहना है कि हम किसी भी विषय के शिक्षक हो, लेकिन हिंदी हमारी मातृभाषा है और अभिमान है। इसलिए हमें हिंदी पर गर्व करना चाहिए।
हिंदी हमारी मातृभाषा है। जो कानों में पड़ते ही रसमय संगीत की अनुभूति देती है। इसका उच्चारण, लिपि, लयबद्धता इसे संसार की सर्वोत्तम भाषा का स्थान प्रदान करती है। जिसका उदय संस्कृत से हुआ है। सोशल मीडिया ने आज इस भाषा के प्रचार-प्रसार और अभिव्यक्ति के लिए मंच दिया है। ये हमारी राजभाषा है। आने वाले समय में हिंदी अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगी। सनातन धर्म के मूल्यों एवं आदर्शों, जो पूरे विश्व को मानवता की शिक्षा देते हैं, उनका माध्यम भी हिंदी ही है। जिससे वसुधैव कुटुम्बकम के द्वारा पूरा विश्व ही एक परिवार बन जाएगा। - वर्षा सक्सेना अध्यापिका, कंपोजिट विद्यालय ललौरीखेड़ा
हिंदी भारत के विस्तृत क्षेत्र में बोली जानेवाली भाषा है। यह सरल तथा सुबोध है। इसकी लिपि भी इतनी बोधगम्य है कि थोड़े अभ्यास से ही समझ में आ जाती है। हिंदी के विकास में जो बाधाएं आई हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। हिंदी व्याकरण के नियम अहिंदी भाषियों को बहुत कठिन लगते हैं। इनको भी सरल बनाया जाना चाहिए, जिससे वे भी हिंदी सीखने में रुचि ले सकें। - डॉ. अमित कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) उपाधि महाविद्यालय
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विश्व के लगभग सौ देशों में जीवन के विविध स्थानों मे हिंदी भाषा का प्रयोग होता है। इसलिए सभी को हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को आगे आना होगा। भले ही हम किसी भी भाषा से डिग्री हासिल करें, लेकिन हमारी मातृभाषा से हमारी पहचान है। अन्य भाषाओं की तुलना में आज भी हिंदी भाषा का अपना अद्वितीय स्थान है। सभी को मिलकर हिंदी को आगे बढ़ाना होगा। - डॉ. शैफाली, असिस्टेंट प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, उपाधि महाविद्यालय
मातृभाषा के रूप में हिंदी का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है जब यह ज्ञानार्जन का माध्यम होती है। सभ्यता व संस्कृति की समझ व इसको अक्षुण बनाए रखने के लिए मातृभाषा के रूप में हिंदी की व्यापकता अनिवार्य है। - डॉ. अनुपम कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, उपाधि महाविद्यालय
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हिंदी हमारी मातृभाषा है। जो कानों में पड़ते ही रसमय संगीत की अनुभूति देती है। इसका उच्चारण, लिपि, लयबद्धता इसे संसार की सर्वोत्तम भाषा का स्थान प्रदान करती है। जिसका उदय संस्कृत से हुआ है। सोशल मीडिया ने आज इस भाषा के प्रचार-प्रसार और अभिव्यक्ति के लिए मंच दिया है। ये हमारी राजभाषा है। आने वाले समय में हिंदी अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरेगी। सनातन धर्म के मूल्यों एवं आदर्शों, जो पूरे विश्व को मानवता की शिक्षा देते हैं, उनका माध्यम भी हिंदी ही है। जिससे वसुधैव कुटुम्बकम के द्वारा पूरा विश्व ही एक परिवार बन जाएगा। - वर्षा सक्सेना अध्यापिका, कंपोजिट विद्यालय ललौरीखेड़ा
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हिंदी भारत के विस्तृत क्षेत्र में बोली जानेवाली भाषा है। यह सरल तथा सुबोध है। इसकी लिपि भी इतनी बोधगम्य है कि थोड़े अभ्यास से ही समझ में आ जाती है। हिंदी के विकास में जो बाधाएं आई हैं, उन्हें दूर किया जाना चाहिए। हिंदी व्याकरण के नियम अहिंदी भाषियों को बहुत कठिन लगते हैं। इनको भी सरल बनाया जाना चाहिए, जिससे वे भी हिंदी सीखने में रुचि ले सकें। - डॉ. अमित कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) उपाधि महाविद्यालय
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विश्व के लगभग सौ देशों में जीवन के विविध स्थानों मे हिंदी भाषा का प्रयोग होता है। इसलिए सभी को हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को आगे आना होगा। भले ही हम किसी भी भाषा से डिग्री हासिल करें, लेकिन हमारी मातृभाषा से हमारी पहचान है। अन्य भाषाओं की तुलना में आज भी हिंदी भाषा का अपना अद्वितीय स्थान है। सभी को मिलकर हिंदी को आगे बढ़ाना होगा। - डॉ. शैफाली, असिस्टेंट प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, उपाधि महाविद्यालय
मातृभाषा के रूप में हिंदी का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है जब यह ज्ञानार्जन का माध्यम होती है। सभ्यता व संस्कृति की समझ व इसको अक्षुण बनाए रखने के लिए मातृभाषा के रूप में हिंदी की व्यापकता अनिवार्य है। - डॉ. अनुपम कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग, उपाधि महाविद्यालय