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राज्यपाल तब अगर पीलीभीत रोड से गुजर गईं होतीं तो हाईवे की ऐसी बदहाली न होती

Sun, 23 Aug 2020 09:13 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2020 09:13 PM IST
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highway in bad condition
पीलीभीत। योगी सरकार भले ही गड्ढा मुक्त सड़क होने का दावा करे, मगर बरेली से शुरू होकर जहानाबाद और सितारगंज को जाने वाला हरिद्वार हाईवे की दुर्दशा असलियत खोलती है। बरेली से पीलीभीत तक गड्ढे ही गड्ढे हैं। इन्हीं गड्ढों से सात फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन को गुजरना था, तब उनका कार्यक्रम बदलने के कारण ऐसे ही छोड़ दिया गया हाईवे अब भी वैसे ही है। राज्यपाल दुधवा से पीलीभीत आना था और वहां से लखनऊ जाने के लिए त्रिशूल एयरबेस तक आना था। बरेली और पीलीभीत के बीच हाईवे की हालत जैसे नहीं सुधरी है, वैसे ही उससे आगे सितारगंज तक बुरा हाल है।
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सड़क का यह हाल यूं ही नहीं हुआ। एनएचएआई वाले अपने हिसाब से काम करते रहे और बाकी लोगों ने ध्यान ही नहीं दिया। बरेली-पीलीभीत- सितारगंज नेशनल हाईवे निर्माण कराने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी एक साह पहले 60 फीसदी काम कराने के एवज में 75 फीसदी पेमेंट लेकर भाग गई। बाईपास और अप्सरा नदी पर ओवरब्रिज निर्माण अधूरा रह गया। घपले और लापरवाही को छिपाने के लिए अब एनएचएआई ने सरकार से 180 करोड़ रुपये का दोबारा बजट स्वीकृत कराया है। इस बजट से निर्माण के टेंडर 27 अगस्त को खुलेंगे।
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बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे उत्तरप्रदेश को उत्तराखंड से जोड़ता है। यह हाईवे बरेली से वाया पीलीभीत- सितारगंज होते हुए हरिद्वार को जोड़ता है। बरेली से पीलीभीत तक हाईवे पर टू लेन का काम पूरा है। मगर, यह सड़क जर्जर हालत में है। तमाम जगह सड़क पर गड्ढे हो चुके हैं। पीलीभीत से सितारगंज तक 74.46 लंबे हिस्से को टू लेन बनाने का एस्टीमेट केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय से 2014 में स्वीकृत कराया गया थ। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लखनऊ की विजय इन्फ्रा लिमिटेड को दी गई थी। कंस्ट्रक्शन कंपनी को बरेली-पीलीभीत हाईवे से पीलीभीत-अमरिया मार्ग को जोडने वाला एक बाईपास, रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज और अप्सरा नदी पर पुल निर्माण कराना था। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं किया। एनएचएआई से 279 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में से 75 फीसदी पेमेंट भी करा लिया। इसके बाद कंपनी काम अधूरा छोड़कर भाग गई। नेशनल हाईवे के इस हिस्से का काम वर्ष 2016 तक पूरा होना था, मगर चार साल बीतने के बाद भी यह काम अधूरा पड़ा है।
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