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गेहूं में 50 से 70 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान
पीलीभीत।
Updated Tue, 03 Mar 2015 11:22 PM IST
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किसानों की महीनों की मेहनत खेतों में लहलहाती फसल बारिश की मार से चौपट हो गई है। 25/26 की रात आंधी पानी और ओलावृष्टि से किसानों के चेहरे मुरझा गए। वहीं, रविवार से शुरू हुई बारिश ने कमर ही तोड़ दी। लगातार हुई बरसात से गेहूं की फसल लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी है, वहीं लाही और सरसों भी जो फसल कटने से बच गई थी, वह समाप्त हो गई। कुछ जगहों पर मटर और आलू को भी नुकसान हुआ है। डीएम के निर्देश पर सभी तहसीलों के राजस्व निरीक्षक और लेखपाल अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण कर फसलों के नुकसान का आकलन कर रहे हैं, वहीं कृषि विभाग के अधिकारी अपने स्तर से जुटे हैं। बुधवार शाम तक सर्वे रिपोर्ट मिलने की संभावना है, जिसे सही स्थिति का पता चल सकेगा। वहीं, सर्वे में जुटे राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सरसों और लाही की फसल पकड़ने पर कई किसानों ने उसे काट लिया था, लेकिन लगभग पांच हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसल ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से पूरी तरह नष्ट हो गई है। वहीं, सर्वाधिक नुकसान गेहूं को हुआ है। अब तक हुए सर्वे में 50 से 70 प्रतिशत तक गेहूं खत्म हो गया है।
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गाटा और किसान वार होगा सर्वे
बारिश से हुए नुकसान के आकलन के लिए कमिश्नर ने तहसीलवार हो रहे सर्वे को किसान वार और गाटा वार कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम को भेजे आदेश में कहा गया है कि पहले अनुमानित क्षति की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा दी जाए। इसके बाद एक एक किसान का डाटा तैयार किया जाए, ताकि सभी को मुआवजा दिलाया जा सके।
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गेहूं की गिरी फसल जो दोबारा बारिश से डूब गई है। दोनों के साथ पौधे की जड़ों में सड़न शुरू होने के बाद बचने के आसार खत्म हो गए हैं। केवल ऊंचे क्षेत्र में जो फसल गिरी और उसमें पानी नहीं भरा है, वहीं पर कुछ उम्मीद की जा सकती है।
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डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक, केवीके
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जिले में फसलों की स्थिति
गेहूं - 145 हजार हेक्टेअर
लाही/सरसों - 15 हजार हेक्टेअर
मटर - 02 हजार हेक्टेअर
आलू - 08 हजार हेक्टेअर
मसूर - 05 हजार हेक्टेअर
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पॉलेज भी हुई बर्बाद
माधोटांडा। शारदा नदी की रेत में बढ़ी संख्या में किसानों ने पॉलेज की खेती उगाई है। इसमें लौकी, खीरा, करेला, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी आदि लगाई थी। किसानों ने इसके लिए ब्याज पर धनराशि लेकर लगाई थी, लेकिन बारिश के बाद शारदा का जलस्तर बढ़ने से तराई क्षेत्र के रमनगरा, भूड़ा गोरखडिब्बी, गभिया, नगरिया खुर्द आदि में हजारों एकड़ में खड़ी पॉलेज बहकर नष्ट हो गई। इससे किसान मायूस हैं।
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केंद्रीय मंत्री ने जताया अफसोस
बारिश से फसलों की इस तबाही पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया वह इस बाबत शीघ्र मुख्यमंत्री से मिलेंगी साथ ही डीएम को पत्र भेजकर जल्द सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने को कहा है।
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जिले में फसलों की तबाही के आंकलन के लिए दोहरा सर्वे कराया जा रहा है। ओलावृष्टि से हुई नुकसान के लिए एक करोड़ की डिमांड पहले ही भेजी जा चुकी है। अब अतिवृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट मिलने पर और डिमांड भेजी जाएगी। किसानों को जल्द राहत दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- ओएन सिंह, डीएम
मुआवजे को लेकर कि सानों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बीसलपुर। गांव पैनिया हिम्मत के किसानों ने मुआवजा न मिलने से क्षुब्ध होकर मंगलवार को तहसील परिसर में राजस्व विभाग के विरोध में प्रदर्शन किया और तहसील दिवस में आए डीएम को ज्ञापन सौंपा।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत गांव पैनिया हिम्मत के तमाम किसान मंगलवार को तहसील परिसर में जमा हुए और मुआवजा न मिलने को लेकर राजस्व विभाग के विरोध में प्रदर्शनकर नारेबाजी करने लगे। किसानों का आरोप था कि ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई, लेकिन राजस्व विभाग ने अब तक मुआवजा नहीं दिया है। प्रदर्शनकारियों में राजस्व विभाग के प्रति काफी रोष था। आधा घंटे प्रदर्शन करने के बाद किसानों ने तहसील दिवस में मौजूद डीएम ओएन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में रमाकांत, श्रीकृष्ण, धर्मवीर, कुंदनलाल, बुद्धसेन, ख्योराज, ननकूलाल, डालचंद, भोलेराम, सीताराम, राजीव, नन्हेलाल, संजीव, बालकराम, बाबूराम आदि शामिल रहे।
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गाटा और किसान वार होगा सर्वे
बारिश से हुए नुकसान के आकलन के लिए कमिश्नर ने तहसीलवार हो रहे सर्वे को किसान वार और गाटा वार कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम को भेजे आदेश में कहा गया है कि पहले अनुमानित क्षति की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा दी जाए। इसके बाद एक एक किसान का डाटा तैयार किया जाए, ताकि सभी को मुआवजा दिलाया जा सके।
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गेहूं की गिरी फसल जो दोबारा बारिश से डूब गई है। दोनों के साथ पौधे की जड़ों में सड़न शुरू होने के बाद बचने के आसार खत्म हो गए हैं। केवल ऊंचे क्षेत्र में जो फसल गिरी और उसमें पानी नहीं भरा है, वहीं पर कुछ उम्मीद की जा सकती है।
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डॉ. एसएस ढाका, कृषि वैज्ञानिक, केवीके
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जिले में फसलों की स्थिति
गेहूं - 145 हजार हेक्टेअर
लाही/सरसों - 15 हजार हेक्टेअर
मटर - 02 हजार हेक्टेअर
आलू - 08 हजार हेक्टेअर
मसूर - 05 हजार हेक्टेअर
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पॉलेज भी हुई बर्बाद
माधोटांडा। शारदा नदी की रेत में बढ़ी संख्या में किसानों ने पॉलेज की खेती उगाई है। इसमें लौकी, खीरा, करेला, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी आदि लगाई थी। किसानों ने इसके लिए ब्याज पर धनराशि लेकर लगाई थी, लेकिन बारिश के बाद शारदा का जलस्तर बढ़ने से तराई क्षेत्र के रमनगरा, भूड़ा गोरखडिब्बी, गभिया, नगरिया खुर्द आदि में हजारों एकड़ में खड़ी पॉलेज बहकर नष्ट हो गई। इससे किसान मायूस हैं।
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केंद्रीय मंत्री ने जताया अफसोस
बारिश से फसलों की इस तबाही पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया वह इस बाबत शीघ्र मुख्यमंत्री से मिलेंगी साथ ही डीएम को पत्र भेजकर जल्द सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने को कहा है।
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जिले में फसलों की तबाही के आंकलन के लिए दोहरा सर्वे कराया जा रहा है। ओलावृष्टि से हुई नुकसान के लिए एक करोड़ की डिमांड पहले ही भेजी जा चुकी है। अब अतिवृष्टि से हुए नुकसान की रिपोर्ट मिलने पर और डिमांड भेजी जाएगी। किसानों को जल्द राहत दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
- ओएन सिंह, डीएम
मुआवजे को लेकर कि सानों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बीसलपुर। गांव पैनिया हिम्मत के किसानों ने मुआवजा न मिलने से क्षुब्ध होकर मंगलवार को तहसील परिसर में राजस्व विभाग के विरोध में प्रदर्शन किया और तहसील दिवस में आए डीएम को ज्ञापन सौंपा।
पूर्व निर्धारित योजना के तहत गांव पैनिया हिम्मत के तमाम किसान मंगलवार को तहसील परिसर में जमा हुए और मुआवजा न मिलने को लेकर राजस्व विभाग के विरोध में प्रदर्शनकर नारेबाजी करने लगे। किसानों का आरोप था कि ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो गई, लेकिन राजस्व विभाग ने अब तक मुआवजा नहीं दिया है। प्रदर्शनकारियों में राजस्व विभाग के प्रति काफी रोष था। आधा घंटे प्रदर्शन करने के बाद किसानों ने तहसील दिवस में मौजूद डीएम ओएन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन करने वालों में रमाकांत, श्रीकृष्ण, धर्मवीर, कुंदनलाल, बुद्धसेन, ख्योराज, ननकूलाल, डालचंद, भोलेराम, सीताराम, राजीव, नन्हेलाल, संजीव, बालकराम, बाबूराम आदि शामिल रहे।