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कैसे निपटेंगे तीसरी लहर से जिले में सिर्फ छह बाल रोग विशेषज्ञ
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पीलीभीत। कोरोना की तीसरी लहर की चपेट में आने वाले बच्चों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास डॉक्टर ही नहीं है। जिले में महज छह डॉक्टर मौजूद हैं। हालांकि स्वीकृत पदों के लिहाज से पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में कम से कम 29 से ज्यादा बाल रोग विशेषज्ञ होने चाहिए, लेकिन ज्यादातर अस्पताल खाली पड़े हैं।
कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारियां इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों के इसकी चपेट में आने की सबसे ज्यादा आशंका है। सरकार की ओर अस्पतालों को बच्चों के इलाज के लिए तैयार करने के लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता न होने पर तैयारियों पर एक बड़ा विराम दिख रहा है। वहीं इस कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कोई योजना भी नहीं दिख रही है। सात ब्लॉक पर आठ सीएचसी और 21 पीएचसी हैं। जहां 109 डॉक्टरों के पद स्वीकृत है, लेकिन दो साल पहले 30 डॉक्टर ने काम छोड़ दिया। ऐसे में सिर्फ 49 डॉक्टर ही कार्यरत रहे गए हैं। इनमें बाल रोग विशेषज्ञ मात्र दो ही डॉक्टर हैं। जिनमें एक बीसलपुर सीएचसी पर कार्यरत एमओआईसी डॉ. ठाकुरदास और पूरनपुर सीएचसी पर कार्यरत डॉ. महेंद्र कुमार हैं। इसके अलावा दो डॉक्टर जिला अस्पताल पुरुष और दो महिला अस्पताल में कार्यरत हैं, लेकिन महिला अस्पताल वाले सिर्फ एसएनसीयू वार्ड में कार्यरत हैं, वह ओपीडी नहीं करते हैं। शासन की गाइडलाइन के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी-पीएचसी पर एक बाल रोग विशेषज्ञ के साथ गायनोकोलॉजिस्ट की तैनाती होनी चाहिए। मगर ज्यादातर अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ और सामान्य मर्ज वाले डॉक्टर ही तैनात हैं। यहां पर न गायनोलॉजिस्ट हैं, न ही बाल रोग विशेषज्ञ। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि जिले के जिन सीएचसी और पीएचसी पर तीसरी लहर का सामना करने के लिए कोविड वार्ड और आईएनसीयू बनाने का दावा किया जा रहा है, वहां संक्रमित बच्चों और महिलाओं का इलाज कौन करेगा। जबकि चुनौती सिर पर आने वाली है। ऐेसे में तीसरी लहर अगर आई, तो स्थिति खतरनाक हो सकती है।
डॉक्टर की कमी तो है, फिलहाल तीसरी लहर से निपटने के लिए प्राइवेट अस्पतालों का भी सहार लिया जाएगा। इसके लिए आईएमए के साथ बैठक कर बच्चों के वार्ड और आईसीयू बनाने के लिए कहा जाएगा। साथ सरकारी छह डॉक्टरों को भी ड्यूटी में लगाया जाएगा। शासन को डॉक्टर की कमी के बारे में जानकारी दी गई है। डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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कोरोना की तीसरी लहर से जंग की तैयारियां इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चों के इसकी चपेट में आने की सबसे ज्यादा आशंका है। सरकार की ओर अस्पतालों को बच्चों के इलाज के लिए तैयार करने के लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन बाल रोग विशेषज्ञों की उपलब्धता न होने पर तैयारियों पर एक बड़ा विराम दिख रहा है। वहीं इस कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की कोई योजना भी नहीं दिख रही है। सात ब्लॉक पर आठ सीएचसी और 21 पीएचसी हैं। जहां 109 डॉक्टरों के पद स्वीकृत है, लेकिन दो साल पहले 30 डॉक्टर ने काम छोड़ दिया। ऐसे में सिर्फ 49 डॉक्टर ही कार्यरत रहे गए हैं। इनमें बाल रोग विशेषज्ञ मात्र दो ही डॉक्टर हैं। जिनमें एक बीसलपुर सीएचसी पर कार्यरत एमओआईसी डॉ. ठाकुरदास और पूरनपुर सीएचसी पर कार्यरत डॉ. महेंद्र कुमार हैं। इसके अलावा दो डॉक्टर जिला अस्पताल पुरुष और दो महिला अस्पताल में कार्यरत हैं, लेकिन महिला अस्पताल वाले सिर्फ एसएनसीयू वार्ड में कार्यरत हैं, वह ओपीडी नहीं करते हैं। शासन की गाइडलाइन के मुताबिक प्रत्येक सीएचसी-पीएचसी पर एक बाल रोग विशेषज्ञ के साथ गायनोकोलॉजिस्ट की तैनाती होनी चाहिए। मगर ज्यादातर अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ और सामान्य मर्ज वाले डॉक्टर ही तैनात हैं। यहां पर न गायनोलॉजिस्ट हैं, न ही बाल रोग विशेषज्ञ। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि जिले के जिन सीएचसी और पीएचसी पर तीसरी लहर का सामना करने के लिए कोविड वार्ड और आईएनसीयू बनाने का दावा किया जा रहा है, वहां संक्रमित बच्चों और महिलाओं का इलाज कौन करेगा। जबकि चुनौती सिर पर आने वाली है। ऐेसे में तीसरी लहर अगर आई, तो स्थिति खतरनाक हो सकती है।
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डॉक्टर की कमी तो है, फिलहाल तीसरी लहर से निपटने के लिए प्राइवेट अस्पतालों का भी सहार लिया जाएगा। इसके लिए आईएमए के साथ बैठक कर बच्चों के वार्ड और आईसीयू बनाने के लिए कहा जाएगा। साथ सरकारी छह डॉक्टरों को भी ड्यूटी में लगाया जाएगा। शासन को डॉक्टर की कमी के बारे में जानकारी दी गई है। डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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