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स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी, अफसरों बने बेपरवाह
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Tue, 20 Sep 2016 11:59 PM IST
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हड़ताल का असर
- फोटो : अमर उजाला
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दर-दर भटकते रहे मरीज, घंटों इतजार के बाद बैरंग लौटे
जिला अस्पताल लाइव
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों, आशाओं के साथ फार्मासिस्टों के भी हड़ताल में उतरने से जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह बेपटरी हो गई। फार्मासिस्टों ने दवा वितरण कार्य ठप कर दिया। सरकारी अस्पताल में मरीजों ने लाइन में लगकर पर्चा लेने के बाद डॉक्टरों से अपना परीक्षण तो करा लिया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकी। मजबूरन थक हारकर मरीज और उनके तीमारदार बिना दवा के ही बैरंग लौट गए। इधर, कुछ मरीजों ने अफसरों से शिकायत करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अफसर भी भी नहीं मिल पाए। फार्मासिस्टों की हड़ताल के बाद मंगलवार को जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर कुछ यूं असर पड़ा।
सीन एक
ओपीड़ी में पर्चा काउंटर रही भरी भीड़
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजते ही पर्चा काउंटर पर मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। सुबह दस बजते-बजते करीब 398 मरीज अपना पर्चा बनवा चुके थे। हड़ताल की जानकारी के बाद निर्धारित डेढ़ बजे तक 954 मरीजों ने अपने पर्चे बनवाए।
सीन दो
दवा काउंटर पर पूरे दिन रहा सन्नाटा
सरकारी अस्पताल में मरीजों को लाइन में लगकर पर्चा लेने के बाद डॉक्टरों से अपना परीक्षण तो करा लिया, लेकिन दवा काउंटर बंद होने की जानकारी पर वहीं थक हारकर काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे। पूरे दिन दवा काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहा।
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सीन तीन
दवा लेने को भटकते रहे मरीज
अस्पताल में जब मरीजों को दवा न मिलने की जानकारी हुई तो उनमें से अधिकतर जहां- तहां अस्पताल कर्मियों को पर्चा दिखाकर दवा दिलाने की गुहार करते देखे गए। इसको लेकर मरीजों का खासी नाराजगी भी देखी गई।
सीन चार
...लो सीएमएस कार्यालय में भी लटका रहा ताला
जिला अस्पताल में मौजूद मरीजों को जब दवा नहीं मिली उनका गुस्सा उफान पर पहुंच गया। अधिकांश मरीज इसकी शिकायत सीएमएस से करने पहुंचे, लेकिन सीएमएस कार्यालय में लटका ताला देख उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
सीन पांच
फार्मासिस्टों ने स्टॉक रूम में कर दी तालाबंदी
हड़ताली फार्मासिस्टों ने मंगलवार को अस्पताल खुलते ही स्टाक रूम में तालाबंदी कर दी। अस्पताल प्रशासन कहीं दवा वितरण का कार्य न शुरू करा दें, इसको लेकर फार्मासिस्टों ने सभी चाबियां भी अपने कब्जे में ली।
सीन 6
इमरजेंसी वार्ड में खाली रहे बेड
जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के बेड खाली पड़े रहे। हालांकि यहां तमाम मरीज पहुंचे, लेकिन दवा आदि न होने के चलते उन्हें प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात डॉ. केके शर्मा ने बताया कि हड़ताल के चलते इमरजेंसी सेवा प्रभावित रही है। घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकी। मजबूरन थक हारकर मरीजों व उनके तीमारदारों को बिना दवा के ही बैरंग लौटना पड़ा है।
सीन 7
पैथोलॉजी भी रही सूनी
फार्मासिस्टों के अलावा लैब टैक्नीशियनों ने हड़ताल शुरू की। जिला अस्पताल स्थित पैथोलॉजी पूरे दिन सूनी पड़ी रही। इसके चलते खून आदि की जांच कराने पहुंचे मरीजों को निराशा ही हाथ ली। हालांकि पैथोलॉजी की आकस्मिक सेवाओं पर रोक नहीं रही।
सीन 8
दर- दर भटकते रहे मरीज
जिला अस्पताल में मंगलवार को आए मरीजों को लेकर सुबह से लेकर दोपहर तक दवा के लिए दर दर भटकना पड़ा। अपने बेटे अरमान सिंह की दवा लेने आए सतनाम सिंह ने कहा कि अफसर अपनी जिम्मेदारी निभाना ही नहीं चाहते। ध्यान देते तो मरीजों को दवा मिल जाती।
मरीजों ने बयां किया अपना दर्द :
मिन्नतों के बाद नहीं लगाया इंजेक्शन
जिला अस्पताल में जंगरौली आशा से आए नंद कुमार ने बताया कि बेटे को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आया था, लेकिन काफी मिन्नतों के बाद किसी ने इंजेक्शन नहीं लगाया। किसी को हमारी समस्याओं से कोई लेना देना नहीं।
गांव मुसराई से आई वृद्धा डल्लो देवी ने बताया कि यहां दवा काउंटर पर घंटों से इंतजार कर हूं, वापस घर भी जाना है। अभी तक किसी ने दवा ही नहीं दी। अब मजबूरन महंगी दवाएं खरीदनी पड़ेगी।
जिला अस्पताल लाइव
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों, आशाओं के साथ फार्मासिस्टों के भी हड़ताल में उतरने से जिले भर की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह बेपटरी हो गई। फार्मासिस्टों ने दवा वितरण कार्य ठप कर दिया। सरकारी अस्पताल में मरीजों ने लाइन में लगकर पर्चा लेने के बाद डॉक्टरों से अपना परीक्षण तो करा लिया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकी। मजबूरन थक हारकर मरीज और उनके तीमारदार बिना दवा के ही बैरंग लौट गए। इधर, कुछ मरीजों ने अफसरों से शिकायत करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अफसर भी भी नहीं मिल पाए। फार्मासिस्टों की हड़ताल के बाद मंगलवार को जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर कुछ यूं असर पड़ा।
सीन एक
ओपीड़ी में पर्चा काउंटर रही भरी भीड़
जिला अस्पताल में सुबह आठ बजते ही पर्चा काउंटर पर मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। सुबह दस बजते-बजते करीब 398 मरीज अपना पर्चा बनवा चुके थे। हड़ताल की जानकारी के बाद निर्धारित डेढ़ बजे तक 954 मरीजों ने अपने पर्चे बनवाए।
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सीन दो
दवा काउंटर पर पूरे दिन रहा सन्नाटा
सरकारी अस्पताल में मरीजों को लाइन में लगकर पर्चा लेने के बाद डॉक्टरों से अपना परीक्षण तो करा लिया, लेकिन दवा काउंटर बंद होने की जानकारी पर वहीं थक हारकर काउंटर खुलने का इंतजार करते रहे। पूरे दिन दवा काउंटर पर सन्नाटा पसरा रहा।
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सीन तीन
दवा लेने को भटकते रहे मरीज
अस्पताल में जब मरीजों को दवा न मिलने की जानकारी हुई तो उनमें से अधिकतर जहां- तहां अस्पताल कर्मियों को पर्चा दिखाकर दवा दिलाने की गुहार करते देखे गए। इसको लेकर मरीजों का खासी नाराजगी भी देखी गई।
सीन चार
...लो सीएमएस कार्यालय में भी लटका रहा ताला
जिला अस्पताल में मौजूद मरीजों को जब दवा नहीं मिली उनका गुस्सा उफान पर पहुंच गया। अधिकांश मरीज इसकी शिकायत सीएमएस से करने पहुंचे, लेकिन सीएमएस कार्यालय में लटका ताला देख उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
सीन पांच
फार्मासिस्टों ने स्टॉक रूम में कर दी तालाबंदी
हड़ताली फार्मासिस्टों ने मंगलवार को अस्पताल खुलते ही स्टाक रूम में तालाबंदी कर दी। अस्पताल प्रशासन कहीं दवा वितरण का कार्य न शुरू करा दें, इसको लेकर फार्मासिस्टों ने सभी चाबियां भी अपने कब्जे में ली।
सीन 6
इमरजेंसी वार्ड में खाली रहे बेड
जिला अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के बेड खाली पड़े रहे। हालांकि यहां तमाम मरीज पहुंचे, लेकिन दवा आदि न होने के चलते उन्हें प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात डॉ. केके शर्मा ने बताया कि हड़ताल के चलते इमरजेंसी सेवा प्रभावित रही है। घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को दवाएं नहीं मिल सकी। मजबूरन थक हारकर मरीजों व उनके तीमारदारों को बिना दवा के ही बैरंग लौटना पड़ा है।
सीन 7
पैथोलॉजी भी रही सूनी
फार्मासिस्टों के अलावा लैब टैक्नीशियनों ने हड़ताल शुरू की। जिला अस्पताल स्थित पैथोलॉजी पूरे दिन सूनी पड़ी रही। इसके चलते खून आदि की जांच कराने पहुंचे मरीजों को निराशा ही हाथ ली। हालांकि पैथोलॉजी की आकस्मिक सेवाओं पर रोक नहीं रही।
सीन 8
दर- दर भटकते रहे मरीज
जिला अस्पताल में मंगलवार को आए मरीजों को लेकर सुबह से लेकर दोपहर तक दवा के लिए दर दर भटकना पड़ा। अपने बेटे अरमान सिंह की दवा लेने आए सतनाम सिंह ने कहा कि अफसर अपनी जिम्मेदारी निभाना ही नहीं चाहते। ध्यान देते तो मरीजों को दवा मिल जाती।
मरीजों ने बयां किया अपना दर्द :
मिन्नतों के बाद नहीं लगाया इंजेक्शन
जिला अस्पताल में जंगरौली आशा से आए नंद कुमार ने बताया कि बेटे को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आया था, लेकिन काफी मिन्नतों के बाद किसी ने इंजेक्शन नहीं लगाया। किसी को हमारी समस्याओं से कोई लेना देना नहीं।
गांव मुसराई से आई वृद्धा डल्लो देवी ने बताया कि यहां दवा काउंटर पर घंटों से इंतजार कर हूं, वापस घर भी जाना है। अभी तक किसी ने दवा ही नहीं दी। अब मजबूरन महंगी दवाएं खरीदनी पड़ेगी।