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Pilibhit News: प्रधानाध्यापिका सैयदा को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
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प्रधान अध्यापिका सैयदा
पीलीभीत। बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू की प्रधानाध्यापिका सैयदा का चयन राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए हुआ है। शासन की ओर से उनके चयन की जानकारी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी।
सैयदा की नियुक्ति 15 नवंबर 2008 को अमरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अमरिया नंबर एक में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। मई 2013 में उनका स्थानांतरण मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू में हुआ। बाद में उन्हें इसी विद्यालय में प्रधान अध्यापक की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई बेहतर करने के साथ स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए भी काम किया।
वर्तमान में विद्यालय में 152 बच्चे पढ़ रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई में अतिरिक्त अभ्यास कराने के लिए सैयदा ने स्कूल के शिक्षकों के सहयोग से वर्कशीट तैयार कराईं। अपनी तनख्वाह से स्कूल के लिए प्रोजेक्टर और लैपटॉप खरीदा। ग्रामीणों के सहयोग से बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर और पुस्तकालय के लिए करीब 200 पुस्तकों की व्यवस्था कराई। उनकी मेहनत से निपुण आकलन अभियान में विद्यालय के सभी बच्चे पहली बार में ही निपुण पाए गए। इसके बाद शासन की ओर से विद्यालय को निपुण विद्यालय घोषित किया गया। विद्यालय का भवन वर्ष 1978 में बना था। सैयदा ने कायाकल्प योजना, कंपोजिट ग्रांट और अन्य प्रयासों से भवन की रंगाई-पुताई और परिसर की व्यवस्थाएं बेहतर कराईं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच भी तैयार कराया गया।
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राज्यपाल के स्वागत में बनाई थी 50 फुट लंबी रंगोली
सैयदा रंगोली बनाने में भी माहिर हैं। उनकी 12 सदस्यीय टीम ने मुस्तफाबाद में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के दौरे के दौरान करीब 50 फुट लंबी रंगोली बनाई थी। इसमें बाघ और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया था। राज्यपाल ने टीम की सराहना की थी। बीएसए रोशनी सिंह ने सैयदा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक है। सैयदा ने अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के पूरे स्टाफ को दिया।
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सैयदा की नियुक्ति 15 नवंबर 2008 को अमरिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अमरिया नंबर एक में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। मई 2013 में उनका स्थानांतरण मरौरी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू में हुआ। बाद में उन्हें इसी विद्यालय में प्रधान अध्यापक की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई बेहतर करने के साथ स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए भी काम किया।
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वर्तमान में विद्यालय में 152 बच्चे पढ़ रहे हैं। बच्चों को पढ़ाई में अतिरिक्त अभ्यास कराने के लिए सैयदा ने स्कूल के शिक्षकों के सहयोग से वर्कशीट तैयार कराईं। अपनी तनख्वाह से स्कूल के लिए प्रोजेक्टर और लैपटॉप खरीदा। ग्रामीणों के सहयोग से बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर और पुस्तकालय के लिए करीब 200 पुस्तकों की व्यवस्था कराई। उनकी मेहनत से निपुण आकलन अभियान में विद्यालय के सभी बच्चे पहली बार में ही निपुण पाए गए। इसके बाद शासन की ओर से विद्यालय को निपुण विद्यालय घोषित किया गया। विद्यालय का भवन वर्ष 1978 में बना था। सैयदा ने कायाकल्प योजना, कंपोजिट ग्रांट और अन्य प्रयासों से भवन की रंगाई-पुताई और परिसर की व्यवस्थाएं बेहतर कराईं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच भी तैयार कराया गया।
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राज्यपाल के स्वागत में बनाई थी 50 फुट लंबी रंगोली
सैयदा रंगोली बनाने में भी माहिर हैं। उनकी 12 सदस्यीय टीम ने मुस्तफाबाद में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के दौरे के दौरान करीब 50 फुट लंबी रंगोली बनाई थी। इसमें बाघ और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया था। राज्यपाल ने टीम की सराहना की थी। बीएसए रोशनी सिंह ने सैयदा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और लगन दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायक है। सैयदा ने अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय के पूरे स्टाफ को दिया।