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हाजी रियाज और हेमराज का किला ढहा
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sat, 11 Mar 2017 10:43 PM IST
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जिले की सभी चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। जिले में चली मोदी लहर के चलते सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हाजी रियाज अहमद और राज्यमंत्री रहे हेमराज वर्मा का न सिर्फ किला ढह गया है, बल्कि 2012 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीन सीटों पर कब्जा जमाकर सबसे बड़ी पार्टी बनी सपा का सूपड़ा साफ हो गया है।
हैट्रिक बना चुके रियाज भी हुए चित
जिले की राजनीति में हाजी रियाज अहमद एक बड़ा नाम है। 2002 से 2012 तक वह लगातार सपा टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक चुने जाते रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने हैट्रिक बनाई थी। इससे पहले भी वह दो बार विधायक रह चुके हैं। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। पीलीभीत शहर सीट के मतदाताओं पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी, लेकिन भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार की युवा मतदाताओं में मजबूत पैठ और पिछले पांच सालों से लगातार क्षेत्रीय जनता से जुड़ाव के चलते उन्होंने जिले के कद्दावर नेता हाजी रियाज अहमद को हराकर चुनाव जीत लिया।
लहर के चलते डूबी हेमराज की लुटिया
बरखेड़ा विधानसभा सीट से भाजपा के किशनलाल राजपूत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। जिले के दूसरे नंबर के धुरंधर नेता एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबियों में गिने जाने वाले हेमराज वर्मा को उन्होंने चुनाव हराया है। किशनलाल राजपूत का यह पहला चुनाव था। ग्राम विकास अधिकारी पद से बीआरएस लेने के बाद उन्होंने राजनीति में नए खिलाड़ी के तौर पर कदम रखा और पहले ही इम्तिहान में वह बेहतर अंकों के साथ पास हुए। हालांकि हेमराज ने क्षेत्र में खासा विकास कराया, लेकिन भाजपा की लहर के चलते विकास का मुद्दा गौड़ हो गया।
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रामसरन ने लगातार दूसरी बार जमाया कब्जा
बीसलपुर विधानसभा सीट पर रामसरन वर्मा लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू इस बार कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी थे। इसके बाद भी उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।
बाबूराम ने लिया हार का बदला
पूरनपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा के बाबूराम पासवान करीब 35 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए हैं। 2012 के चुनाव में सपा के पीतमराम ने उनसे करीब 30838 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। 2017 के चुनाव में बाबूराम ने सपा के पीतमराम को हराकर पिछले चुनाव में हुई हार का बदला ले लिया है।
... तो सबसे अधिक लोकप्रिय विधायक बने संजय
पीलीभीत। जिले की चारों विधानसभा सीटों पर यूं तो भाजपा प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं, लेकिन पीलीभीत शहर सीट पर चुनाव जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार ने एक साथ दो रिकार्ड बनाए हैं। इस सीट पर उन्होंने जहां सपा के कद्दावर नेता एवं कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद को 43048 मतों के अंतर से चुनाव हराया है, वहीं जिले की चारों विधानसभा सीटों में रिकार्ड 1,35,865 मत प्राप्त करने का भी गौरव प्राप्त किया है।
मुस्लिम मतदाताओं का भी मिला साथ
मतगणना परिणाम बताते हैं कि कई ऐसे मुस्लिम बाहुल्य बूथ रहे हैं जहां भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार को ठीक-ठाक वोट मिले हैं। स्वयं संजय गंगवार ने भी इसे स्वीकार किया। संजय गंगवार की मानें तो उन्हें करीब 15 हजार मुस्लिम मत प्राप्त हुआ है।
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हैट्रिक बना चुके रियाज भी हुए चित
जिले की राजनीति में हाजी रियाज अहमद एक बड़ा नाम है। 2002 से 2012 तक वह लगातार सपा टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक चुने जाते रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने हैट्रिक बनाई थी। इससे पहले भी वह दो बार विधायक रह चुके हैं। सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। पीलीभीत शहर सीट के मतदाताओं पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी, लेकिन भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार की युवा मतदाताओं में मजबूत पैठ और पिछले पांच सालों से लगातार क्षेत्रीय जनता से जुड़ाव के चलते उन्होंने जिले के कद्दावर नेता हाजी रियाज अहमद को हराकर चुनाव जीत लिया।
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लहर के चलते डूबी हेमराज की लुटिया
बरखेड़ा विधानसभा सीट से भाजपा के किशनलाल राजपूत ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। जिले के दूसरे नंबर के धुरंधर नेता एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के करीबियों में गिने जाने वाले हेमराज वर्मा को उन्होंने चुनाव हराया है। किशनलाल राजपूत का यह पहला चुनाव था। ग्राम विकास अधिकारी पद से बीआरएस लेने के बाद उन्होंने राजनीति में नए खिलाड़ी के तौर पर कदम रखा और पहले ही इम्तिहान में वह बेहतर अंकों के साथ पास हुए। हालांकि हेमराज ने क्षेत्र में खासा विकास कराया, लेकिन भाजपा की लहर के चलते विकास का मुद्दा गौड़ हो गया।
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रामसरन ने लगातार दूसरी बार जमाया कब्जा
बीसलपुर विधानसभा सीट पर रामसरन वर्मा लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूलबाबू इस बार कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी थे। इसके बाद भी उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।
बाबूराम ने लिया हार का बदला
पूरनपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट से भाजपा के बाबूराम पासवान करीब 35 हजार वोटों के अंतर से चुनाव जीत गए हैं। 2012 के चुनाव में सपा के पीतमराम ने उनसे करीब 30838 मतों के अंतर से चुनाव जीता था। 2017 के चुनाव में बाबूराम ने सपा के पीतमराम को हराकर पिछले चुनाव में हुई हार का बदला ले लिया है।
... तो सबसे अधिक लोकप्रिय विधायक बने संजय
पीलीभीत। जिले की चारों विधानसभा सीटों पर यूं तो भाजपा प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं, लेकिन पीलीभीत शहर सीट पर चुनाव जीतने वाले भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार ने एक साथ दो रिकार्ड बनाए हैं। इस सीट पर उन्होंने जहां सपा के कद्दावर नेता एवं कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद को 43048 मतों के अंतर से चुनाव हराया है, वहीं जिले की चारों विधानसभा सीटों में रिकार्ड 1,35,865 मत प्राप्त करने का भी गौरव प्राप्त किया है।
मुस्लिम मतदाताओं का भी मिला साथ
मतगणना परिणाम बताते हैं कि कई ऐसे मुस्लिम बाहुल्य बूथ रहे हैं जहां भाजपा प्रत्याशी संजय गंगवार को ठीक-ठाक वोट मिले हैं। स्वयं संजय गंगवार ने भी इसे स्वीकार किया। संजय गंगवार की मानें तो उन्हें करीब 15 हजार मुस्लिम मत प्राप्त हुआ है।