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लखीमपुर खीरी जाने के लिए भेष बदल कर रात के अंधेरे में पैदल चले गुरनाम सिंह चढूनी

Fri, 08 Oct 2021 01:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:30 AM IST
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Gurnam Singh Chaduni walked in the dark of night in disguise to go to Lakhimpur Kheri
पीलीभीत। भाकियू चढूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को पुलिस लखीमपुर खीरी जाने से नहीं रोक सकी। वह वेश बदलकर पैदल कई किलोमीटर चलकर लखीमपुर खीरी पहुंच गए। आमतौर पर कुर्ता पायजामा पहनने वाले चढूनी पैंट शर्ट में पुलिस को छका कर निकल गए।
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सामान्य दिनों में कुर्ता पायजामा पहनकर हरी और केसरिया रंग की पगड़ी धारण करने वाले भाकियू चढूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी सोमवार को दिल्ली से लखीमपुर के लिए चले तो मेरठ में रोक लिए गए। इस पर चढूनी को वापस होना पड़ा लेकिन मंगलवार को दिल्ली के कुंडली बॉर्डर से वह भेष बदल कर निकले। सर्विंलांस के डर से मोबाइल फोन छोड़ दिया। हरियाणा के कार्यकर्ताओं को संग लेकर दिल्ली से चले चढूनी बचते बचाते पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र तक पहुंच गए। उस वक्त रात के डेढ़ बजे थे। असम हाईवे पर गजरौला थाने के बाहर बैरियर लगाकर पुलिस चेकिंग कर रही थी। चार-पांच ट्रक पहले से खड़े थे। इन ट्रकों के पीछे ही उनकी दो गाड़ियां खड़ी हो गईं। चढूनी ने देखा कि पुलिस उनकी अगली गाड़ी में टार्च लगाकर लोगों के चेहरे देख रही है। अगर पुलिस पीछे आई और उन्हें पहचान लिया तो रोक सकती है। रोके जाने के अंदेशे में ही चढूनी उतरकर कर सड़क के किनारे खड़े होकर नजारा देखने लगे।
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जब तक पुलिस सतर्क होती तब तक वह खेतों की ओर बढ़ गए। पुलिस ने हरियाणा का नंबर होने की वजह से उनकी दोनों गाड़ियों के साथ सात समर्थकों को रोक लिया। जब चढूनी के बारे में पूछा तो कार्यकर्ता कुछ भी बताने से परहेज कर गए। इस बीच चढूनी खेत खलिहान और गांव के रास्ते आगे बढ़ गए। रास्ते में टेंपो और बाइक सवार की मदद ली। कई किलोमीटर पैदल भी चले। रात के अंधेरे में अकेले का यह सफर उन्हें पूरे जीवन याद रहेगा लेकिन मजबूरी थी इसलिए चलते चले गए क्योंकि पुलिस उन्हें रोकना चाहती थी। चढूनी ने बताया कि अगर भेष बदल कर पैदल न चला होता तो पुलिस उन्हें लखीमपुर खीरी तक न जाने देती। उन्होंने बताया कि वह आमतौर पर कुर्ता पायजामा ही पहनते हैं लेकिन वेश बदल कर पैंट शर्ट में निकले। पगड़ी भी सफेद पहनी ताकि कोई पहचान न पाए। उन्होंने यह भी बताया कि उनके समर्थकों और गाड़ियों को पुलिस ने 11 घंटे बाद बुधवार को दोपहर 12 बजे छोड़ दिया। तब तक चढ़ूनी नानपारा बहराइच पहुंच गए थे। नानपारा से वह लखीमपुर पहुंचे। वहां से बृहस्पतिवार को अपनी गाड़ी में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हुए।
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