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भैंसहा गांव में दिखा गुलदार, गांव वाले समझे बाघ समझकर डरे
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अमरिया। भैंसहा गांव में नहर किनारे गुलदार दिखाई देने से दहशत है। रात में पटाखे दागकर ग्रामीणों को अलर्ट किया गया। ग्रामीण बाघ के आने की खबर पर मौके पर पहुंचे, मगर बाद में स्पष्ट हो गया कि बाघ नहीं था, ऐसे में गुलदार माना गया।
अमरिया क्षेत्र के गांव भैंसहा निवासी कुलवंत सिंह ने बताया कि वह रविवार देर रात भैंसहा गांव से बोलेरो गाड़ी से अपने फॉर्महाउस की ओर जा रहे थे। तभी नहर की पटरी पर एक जानवर गीदड़ को दौड़ाता हुआ निकला। इसे देख वह डर गए और गांव वालों को आकर पूरी बात बताई। कुछ ही देर में तमाम ग्रामीण अपने चार पहिया वाहनों से मौके पर पहुंच गए। तब तक वह जानवर खेतों में दूर निकल गया। बाघ होने के शक में सुबह ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर पगचिह्न देखे तो वह किसी छोटे जानवर के पाए गए। यह साफ हो गया कि ये पगचिह्न बाघ नहीं थे। माना गया कि गुलदार के हो सकते हैं। फिलहाल आबादी क्षेत्र में वन्यजीव की दस्तक से ग्रामीणों में भारी दहशत है। सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर देव ऋषि ने बताया कि मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। मौके पर जाकर दिखवाया जाएगा। फिलहाल भैंसहा गांव के आसपास पिछले कई दिनों से बाघ और तेंदुए की कोई लोकेशन नहीं मिली है।
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अमरिया क्षेत्र के गांव भैंसहा निवासी कुलवंत सिंह ने बताया कि वह रविवार देर रात भैंसहा गांव से बोलेरो गाड़ी से अपने फॉर्महाउस की ओर जा रहे थे। तभी नहर की पटरी पर एक जानवर गीदड़ को दौड़ाता हुआ निकला। इसे देख वह डर गए और गांव वालों को आकर पूरी बात बताई। कुछ ही देर में तमाम ग्रामीण अपने चार पहिया वाहनों से मौके पर पहुंच गए। तब तक वह जानवर खेतों में दूर निकल गया। बाघ होने के शक में सुबह ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर पगचिह्न देखे तो वह किसी छोटे जानवर के पाए गए। यह साफ हो गया कि ये पगचिह्न बाघ नहीं थे। माना गया कि गुलदार के हो सकते हैं। फिलहाल आबादी क्षेत्र में वन्यजीव की दस्तक से ग्रामीणों में भारी दहशत है। सामाजिक वानिकी के डिप्टी रेंजर देव ऋषि ने बताया कि मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। मौके पर जाकर दिखवाया जाएगा। फिलहाल भैंसहा गांव के आसपास पिछले कई दिनों से बाघ और तेंदुए की कोई लोकेशन नहीं मिली है।
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