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...गर पढ़ सको तो देख लो चेहरे किताब हैं
Pilibhit
Updated Thu, 12 Nov 2015 11:31 PM IST
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उर्दू फाउंडेशन के तत्वावधान में डॉ. अल्लामा मोहम्मद इकबाल के यौमे विलाद पर मुशायरा हुआ। इसमें तमाम शायरों ने शिरकत की।
शहर के कमल्ले चौराहा स्थित मोहम्मद अली नवेद के आवास पर बुधवार शाम हुए गैर तरही मुशायरे का आगाज अशरफ जमा काविश ने नाते पाक से किया। इस दौरान मकबूल हुसैन फैज ने अपना कलाम पेश किया।
हिर्स ने खोया विकार ए जिंद, एक चिंगारी इमारत को खा गई।
डॉ. शराफत उल्ला शिफा ने पढ़ा -
जिस्म और रूह को करना है जियावार अगर, सर्द रातों में वुजू करके निखरना होगा।
इरफान सागर ने कलाम पेश किया-
हमारे चेहरों पर लिखी है दास्ताने सितम, हम इसके बाद भी चेहरे गुलाब करते हैं।
नवाबउद्दीन शैदा ने कहा
परवाज कर रहे हैं परिंदे कतार में, कैसा यह इंतेशार हमारी सफों में है।
अशरफ जमा काविश ने कलाम पढ़ा -
पसीना उसका बहा तो लहू बहा दूंगा, मुझे वह अपना तो कहकर कभी पुकारा करे।
जितेश राज नक्श ने कहा -
खाकर शिकस्त जीना गवारा नहीं मुझे, दुश्मन तुझे कसम है मेरा सर उतार दे।
फुरकान हाश्मी ने कलाम पेश किया -
तहरीर वहां होते हैं किरदार के किस्से, गर पढ़ सको तो देख लो चेहरे किताब हैं।
मुशायरे की सदारत शायर मकबूल हुसैन फैज ने व निजामत नवाउद्दीन शैदा ने की। इस दौरान भविष्य में उर्दू फाउंडेशन के उद्देश्यों को पूरा करने का अहद लिया गया। इस मौके पर डॉ. सय्यद मोहम्मद उवैद, मोहम्मद इदरीस, मोहम्मद आरिफ, शमशाद हुसैन, दानिश खां, शहाब खां, आसिफ खां, अरशद खां आदि ने शिरकत की।
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शहर के कमल्ले चौराहा स्थित मोहम्मद अली नवेद के आवास पर बुधवार शाम हुए गैर तरही मुशायरे का आगाज अशरफ जमा काविश ने नाते पाक से किया। इस दौरान मकबूल हुसैन फैज ने अपना कलाम पेश किया।
हिर्स ने खोया विकार ए जिंद, एक चिंगारी इमारत को खा गई।
डॉ. शराफत उल्ला शिफा ने पढ़ा -
जिस्म और रूह को करना है जियावार अगर, सर्द रातों में वुजू करके निखरना होगा।
इरफान सागर ने कलाम पेश किया-
हमारे चेहरों पर लिखी है दास्ताने सितम, हम इसके बाद भी चेहरे गुलाब करते हैं।
नवाबउद्दीन शैदा ने कहा
परवाज कर रहे हैं परिंदे कतार में, कैसा यह इंतेशार हमारी सफों में है।
अशरफ जमा काविश ने कलाम पढ़ा -
पसीना उसका बहा तो लहू बहा दूंगा, मुझे वह अपना तो कहकर कभी पुकारा करे।
जितेश राज नक्श ने कहा -
खाकर शिकस्त जीना गवारा नहीं मुझे, दुश्मन तुझे कसम है मेरा सर उतार दे।
फुरकान हाश्मी ने कलाम पेश किया -
तहरीर वहां होते हैं किरदार के किस्से, गर पढ़ सको तो देख लो चेहरे किताब हैं।
मुशायरे की सदारत शायर मकबूल हुसैन फैज ने व निजामत नवाउद्दीन शैदा ने की। इस दौरान भविष्य में उर्दू फाउंडेशन के उद्देश्यों को पूरा करने का अहद लिया गया। इस मौके पर डॉ. सय्यद मोहम्मद उवैद, मोहम्मद इदरीस, मोहम्मद आरिफ, शमशाद हुसैन, दानिश खां, शहाब खां, आसिफ खां, अरशद खां आदि ने शिरकत की।
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