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बाढ़ से बचाव के काम नहीं हुए तो गांव वाले गांधीगीरी पर उतरे
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पूरनपुर। शारदा नदी में हर साल बरसात में आने वाली बाढ़ से बचाव के लिए काम शुरू न होने पर गांव वाले सरकारी सिस्टम से खफा होकर गांधीगीरी पर उतर आए। ग्रामीणों ने स्वयं कारसेवा करते हुए ठोकर बनाने का काम शुरू कर दिया। कारसेवा में दो सौ लोग शामिल हुए।
शारदा नदी ने पिछले साल गांव राहुलनगर के समीप तबाही मचाई थी। 12 घर और सैकड़ों एकड़ खेतों में लहलहाती फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गई थीं। चंदिया हजारा के समीप भी जलभराव हुआ था। 15 दिन के बचाव कार्य चलने के बाद नदी कटान को रोका जा सका था। राहुलनगर और आसपास गांव को बचाने के लिए तीन माह पहले शारदा की सिल्ट सफाई के लिए मशीनें पहुंची थीं। इनका मकसद यह था कि नदी की धार के रुख को बदला जा सके। मगर, वन विभाग ने इस पर आपत्ति की। इसके चलते मशीनें बिना सिल्ट सफाई कराए ही वापस हो गईं। साल भर नदी किनारे गांव के लोग ठोकरें बनवाने की मांग करते रहे। मगर, सरकारी सिस्टम नहीं जागा। अब मानसून आने वाला है। मध्य जून से मानसून की बारिश होने की संभावना है। बाढ़ में इस बार बड़ी तबाही न हो, इसे लेकर गांव वालों ने कारसेवा कर स्वयं ठोकरें बनाने का निर्णय लिया। रविवार को चंदिया हजारा के प्रधानपति परमजीत सिंह के नेतृत्व में तमाम ग्रामीण नदी किनारे जुटे और ठोकरें बनाने का काम शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने प्लास्टिक के खाली बोरों में मिट्टी भरकर उन्हें नदी किनारे लगाना शुरू कर दिया। प्रधानपति ने बताया कि बाढ़ खंड से निराश होकर उनके समेत ठोकर बनाने के लिए दो सौ से अधिक लोग कारसेवा कर रहे हैं। सामाजिक दूरी का भी पालन कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांधीगीरी से ही खराब व्यवस्था का विरोध किया जा सकता है।
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शारदा नदी ने पिछले साल गांव राहुलनगर के समीप तबाही मचाई थी। 12 घर और सैकड़ों एकड़ खेतों में लहलहाती फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गई थीं। चंदिया हजारा के समीप भी जलभराव हुआ था। 15 दिन के बचाव कार्य चलने के बाद नदी कटान को रोका जा सका था। राहुलनगर और आसपास गांव को बचाने के लिए तीन माह पहले शारदा की सिल्ट सफाई के लिए मशीनें पहुंची थीं। इनका मकसद यह था कि नदी की धार के रुख को बदला जा सके। मगर, वन विभाग ने इस पर आपत्ति की। इसके चलते मशीनें बिना सिल्ट सफाई कराए ही वापस हो गईं। साल भर नदी किनारे गांव के लोग ठोकरें बनवाने की मांग करते रहे। मगर, सरकारी सिस्टम नहीं जागा। अब मानसून आने वाला है। मध्य जून से मानसून की बारिश होने की संभावना है। बाढ़ में इस बार बड़ी तबाही न हो, इसे लेकर गांव वालों ने कारसेवा कर स्वयं ठोकरें बनाने का निर्णय लिया। रविवार को चंदिया हजारा के प्रधानपति परमजीत सिंह के नेतृत्व में तमाम ग्रामीण नदी किनारे जुटे और ठोकरें बनाने का काम शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने प्लास्टिक के खाली बोरों में मिट्टी भरकर उन्हें नदी किनारे लगाना शुरू कर दिया। प्रधानपति ने बताया कि बाढ़ खंड से निराश होकर उनके समेत ठोकर बनाने के लिए दो सौ से अधिक लोग कारसेवा कर रहे हैं। सामाजिक दूरी का भी पालन कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांधीगीरी से ही खराब व्यवस्था का विरोध किया जा सकता है।
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