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गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा करती रही पुलिस, अब नोटिस देकर छोड़ा जालसाज
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पीलीभीत। आसान किस्तों पर लोन दिलाने के नाम पर 300 लोगों से ठगी करने वाले जालसाजों पर सख्त कार्रवाई के दावों पर पुलिस खरी नहीं उतरी। पब्लिक द्वारा पकड़कर सुपुर्द करने के बाद भी सुनगढ़ी पुलिस जालसाज से एक भी सुराग नहीं लगा पाई। पुलिस ने पहले कंपनी के दफ्तर के भवन मालिक को क्लीन चिट देकर छोड़ने के बाद जालसाज को भी 41-ए के तहत नोटिस तामील कराकर छोड़ दिया। ठगी का शिकार हुए पीड़ित पुलिस के इस रवैये से निराश हुए हैं।
गांधी स्टेडियम रोड पर साइकिल की एक दुकान के ऊपरी हिस्से में 20 दिन पहले नई दिल्ली के द्वारिका इलाके की ‘सेव माइक्रो क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी का कार्यालय खोला गया था। उन्नाव के जालसाजों ने गांव-गांव घूमने के बाद आसान किस्तों पर 30 हजार रुपयेे का मिनी लोन देने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से एक-एक हजार रुपये ठग लिए थे। बृहस्पतिवार शाम तीन जालसाज रमन गुप्ता, सुनील कुमार और तारा सिंह दफ्तर में पब्लिक को बैठाकर एक-एक कर भाग निकले थे। चौथे जालसाज तालिब सराय उन्नाव निवासी देवेंद्र राठौर को पब्लिक ने पकड़कर सुनगढ़ी पुलिस को सौंप दिया था। मकान मालिक रविंद्र सिंह को भी पुलिस के हवाले किया गया था। पुलिस ने पहले धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मकान मालिक को बचाया। सांठगांठ के बाद उसकी जालसाजी में कोई संलिप्तता न होने की बात कहकर छोड़ दिया गया। इसके बाद भी पुलिस पीड़ितों को पकड़े गए जालसाज से पूछताछ के बाद सख्त कार्रवाई की उम्मीद बंधाती गई। पीड़ितों को भी विश्वास था कि पुलिस उनका पैसा वापस दिलाने के लिए जालसाजों के गिरोह पर शिकंजा कसेगी, लेकिन दो दिन चली औपचारिक कार्रवाई के बाद पुलिस ने एफआईआर में सात साल से कम सजा वाली धाराएं होने का हवाला देकर जालसाज देवेंद्र राठौर को 41 ए के तहत नोटिस देने के बाद छोड़ दिया। पुलिस द्वारा जालसाजों के गिरोह के सदस्यों तक पहुंचने के ठोस प्रयास नहीं किए गए। अब अधिकारियों को छानबीन के दौरान शिकंजा कसने का भरोसा दिलाया जा रहा है। फिलहाल जालसाजी के बड़े मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई किसी के गले नहीं उतर रही है।
यह सच है कि पकड़े गए आरोपी से पूछताछ में कुछ खास नहीं निकल सका। सीओ सिटी और इंस्पेक्टर सुनगढ़ी से इसको लेकर बात की गई। उनको जालसाजों पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको गंभीरता से दिखवाया जाएगा। -अभिषेक दीक्षित, एसपी
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गांधी स्टेडियम रोड पर साइकिल की एक दुकान के ऊपरी हिस्से में 20 दिन पहले नई दिल्ली के द्वारिका इलाके की ‘सेव माइक्रो क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी का कार्यालय खोला गया था। उन्नाव के जालसाजों ने गांव-गांव घूमने के बाद आसान किस्तों पर 30 हजार रुपयेे का मिनी लोन देने का झांसा देकर करीब 300 लोगों से एक-एक हजार रुपये ठग लिए थे। बृहस्पतिवार शाम तीन जालसाज रमन गुप्ता, सुनील कुमार और तारा सिंह दफ्तर में पब्लिक को बैठाकर एक-एक कर भाग निकले थे। चौथे जालसाज तालिब सराय उन्नाव निवासी देवेंद्र राठौर को पब्लिक ने पकड़कर सुनगढ़ी पुलिस को सौंप दिया था। मकान मालिक रविंद्र सिंह को भी पुलिस के हवाले किया गया था। पुलिस ने पहले धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मकान मालिक को बचाया। सांठगांठ के बाद उसकी जालसाजी में कोई संलिप्तता न होने की बात कहकर छोड़ दिया गया। इसके बाद भी पुलिस पीड़ितों को पकड़े गए जालसाज से पूछताछ के बाद सख्त कार्रवाई की उम्मीद बंधाती गई। पीड़ितों को भी विश्वास था कि पुलिस उनका पैसा वापस दिलाने के लिए जालसाजों के गिरोह पर शिकंजा कसेगी, लेकिन दो दिन चली औपचारिक कार्रवाई के बाद पुलिस ने एफआईआर में सात साल से कम सजा वाली धाराएं होने का हवाला देकर जालसाज देवेंद्र राठौर को 41 ए के तहत नोटिस देने के बाद छोड़ दिया। पुलिस द्वारा जालसाजों के गिरोह के सदस्यों तक पहुंचने के ठोस प्रयास नहीं किए गए। अब अधिकारियों को छानबीन के दौरान शिकंजा कसने का भरोसा दिलाया जा रहा है। फिलहाल जालसाजी के बड़े मामले में पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई किसी के गले नहीं उतर रही है।
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यह सच है कि पकड़े गए आरोपी से पूछताछ में कुछ खास नहीं निकल सका। सीओ सिटी और इंस्पेक्टर सुनगढ़ी से इसको लेकर बात की गई। उनको जालसाजों पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको गंभीरता से दिखवाया जाएगा। -अभिषेक दीक्षित, एसपी
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