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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Flop in the district family planning program

जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम फ्लाप

Sun, 10 Jul 2016 10:48 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
पीलीभीत, ब्यूरो Updated Sun, 10 Jul 2016 10:48 PM IST
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आज जनसंख्या दिवस है। बढ़ती जनसंख्या घर से लेकर देश तक की अर्थ व्यवस्था की चूलें हिला रही है, लेकिन इससे निपटने के लिए अफसर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम पर गौर करें तो चार साल में पांच पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। खास बात यह है कि जिलास्तर पर इस कार्यक्रम की कभी कोई समीक्षा ही नहीं की जाती है।
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जिले में यह है पुुरुष नसबंदी का हाल
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कराने वाले पुरुष को 1100 रुपये और महिलाओं को 600 रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। जिले में पुरुष नसबंदी कार्यक्रम पर गौर करें तो वर्ष 2012 से पुरुष नसबंदी का ग्राफ निरंतर गिरता जा रहा है। वर्ष 2012 में तीन, 2013 में एक, 2014 में एक भी पुरुष नसबंदी नहीं हुई, जबकि गत वर्ष मात्र एक पुरुष की नसबंदी कर योजना की इतिश्री कर ली गई।
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हर माह लाखों का खर्च, नतीजा शून्य
परिवार नियोजन कार्यक्रम को लेकर जिले में हर माह लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अब टीएसयू (टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) को ही लें तो यह लक्ष्य दंपति रजिस्टर का सर्वे कर फ्रंट लाइन वर्कर्स की मदद करता है। इसमें फैमिली प्लानिंग विशेषज्ञ, मॉनीटरिंग, सामुदायिक जागरूकता और पोषण विशेषज्ञ शामिल हैं, लेकिन इन सबका क्या योगदान रहा है, यह दूर-दूर तक नजर नहीं आता।  
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महकमा भी फैमिली प्लानिंग को लेकर गंभीर नहीं
जिले में फैमिली प्लानिंग को लेकर जिला स्तर पर समीक्षा तक नहीं होती है। ऐसे में सेहत महकमा भी गंभीर नहीं दिखता। उदाहरण के तौर पर यदि नसबंदी के फेल केस को ही देखें तो यदि कोई महिला नसबंदी होने के बाद भी गर्भवती होती है और वह इसकी सूचना विभाग को देती है, तो उसे तीन चार महीने धक्केे खाने के बाद खामोश होकर बैठना पड़ता है।

एनएसवी सर्जन न होना भी एक वजह
जिले में महिला नसबंदी के लिए तो चार डॉक्टर तैनात हैं। इनमें डॉ. विनीता चतुर्वेदी, डॉ. पीके अग्रवाल, डॉ. अनीता चौरसिया व डॉ. पुष्पा पंत शामिल हैं, लेकिन पुरुष नसबंदी के लिए यहां कोई एनएसवी सर्जन नहीं है। पुरुष नसबंदी के लिए वीआरएस ले चुके डॉ. बी. दास की मदद ली जाती है। महकमे के मुताबिक पुरुष नसबंदी को दो अन्य डॉक्टर ट्रेनिंग ले चुके हैं, लेकिन यह दोनों कब से अपना काम शुरू करेंगे, इसका कोई अता पता नहीं।

कैंपों के नाम पर हो रही खानापूरी
वर्ष 2009 में ब्लाक लेबिल पर पुरुष नसबंदी कैंपों का आयोजन किया गया था, लेकिन उसके बाद मामला ठंडा होता गया। वैसे परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत प्रत्येक माह ब्लाक स्तर पर चार कैंपों को मिलाकर पूरे जिले में 28 नसबंदी कैंप लगने चाहिए। महकमे की बात पर यकीन किया जाए तो कैंप लगते हैं, लेकिन इन कैंपों की सच्चाई आंकड़े ही झुठला रहे हैं।

फैक्ट फाइल:
वर्ष            इतनी र्हुइं नसबंदी
2012-13            03
2013-14            01
2014-15            00
2015-16            01
00
इस बार देखने को मिलेंगे बेहतर परिणाम
10 पीबीटीपी 12
जनपद में अशिक्षा व जागरूकता के कमी के चलते नसबंदी जैसे कार्यक्रम ठीक ढंग से संचालित नहीं पाते हैं। टीएसयू व अन्य जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उम्मीद है कि गत वर्षों की अपेक्षा इस बार कुछ बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

संदीप उपाध्याय, जिला परिवार नियोजन विशेषज्ञ, यूपीटीएसयू


जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को गति देने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। 11 जुलाई से कैंपों व अन्य कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। सर्जनों की कमी के चलते प्रोग्राम में रुकावट आ रही है। यह समस्या भी जल्द हल कर ली जाएगी। 
डॉ. ओपी सिंह, सीएमओ
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