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Pilibhit News: अवैध रूप से खनन की बाढ़, जिम्मेदार खामोश
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जहानाबाद के बिलई खेड़ा गांव में होता खनन। स्रोत:वीडियो ग्रैब
पीलीभीत। शासन की सख्ती के बीच अनुमति की आड़ मेंं अवैध रूप से बालू और मिट्टी के खनन का धंधा जोरों पर है। जहानाबाद और माधोटांडा क्षेत्र में धड़ल्ले से खनन को अंजाम दिया जा रहा है। पुलिस और खनन विभाग चुप्पी साधे है।
खनन माफिया पर नकेल कसने के लिए सरकार सख्त है, इसके बावजूद अधिकारी अवैध रूप से खनन को रोकने में निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। जिसके चलते बालू और मिट्टी का अवैध खनन लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी नियमों के विपरीत माफिया पूरी रात मिट्टी का खनन कर रहे हैं।
इस समय बरेली-सितारगंज हाईवे के निर्माण को लेकर मिट्टी की जरूरत पड़ रही है। कार्यदायी संस्था की ओर से मिट्टी के लिए ठेका दिया गया है। ठेकेदार की ओर से जहानाबाद क्षेत्र के गांव बिलईखेड़ा से मिट्टी उठाई जा रही है।
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आरोप है कि दो घनमीटर अनुमति की आड़ में करीब 10 घन मीटर मिट्टी की जेसीबी की खोदाई कर दी गई है। बताते हैं कि हाईवे निर्माण के अलावा मिट्टी को भवन निर्माण के लिए भी बेचा जा रहा है। मिट्टी के खनन से खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। इसके अलावा माधोटांडा क्षेत्र के डगा गांव में भी खुलेआम खनन किया जा रहा है।
आरोप है कि रोजाना रात होते ही खनन कर पुल के निकट विकसित की जा रही कॉलोनी में मिट्टी का पटान किया जा रहा है।
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यह हैं नियम
मिट्टी के खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी है। निर्धारित प्रारूप पर डीएम, एडीएम, खनन अधिकारी और बीडीओ के नाम पर प्रार्थनापत्र देना होता है। आवेदक को जिस स्थान से मिट्टी लाई जा रही है, उसकी खतौनी के अनुसार भू स्वामी का भी पूरा ब्योरा देना होता है। यह भी सूचना देनी होती है कि कितनी मिट्टी का खनन हो रहा है, जहां मिट्टी खोदी जा रही है, वहां से निर्माण स्थल कितनी दूर है। मिट्टी ढोने वाले वाहन का नंबर, चालक का नाम और उसका मोबाइल नंबर भी बताना होता है।
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मामला संज्ञान में नहीं है। एडीएम वित्त एवं राजस्व से जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुमार सिंह, डीएम
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खनन माफिया पर नकेल कसने के लिए सरकार सख्त है, इसके बावजूद अधिकारी अवैध रूप से खनन को रोकने में निष्क्रिय नजर आ रहे हैं। जिसके चलते बालू और मिट्टी का अवैध खनन लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी नियमों के विपरीत माफिया पूरी रात मिट्टी का खनन कर रहे हैं।
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इस समय बरेली-सितारगंज हाईवे के निर्माण को लेकर मिट्टी की जरूरत पड़ रही है। कार्यदायी संस्था की ओर से मिट्टी के लिए ठेका दिया गया है। ठेकेदार की ओर से जहानाबाद क्षेत्र के गांव बिलईखेड़ा से मिट्टी उठाई जा रही है।
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आरोप है कि दो घनमीटर अनुमति की आड़ में करीब 10 घन मीटर मिट्टी की जेसीबी की खोदाई कर दी गई है। बताते हैं कि हाईवे निर्माण के अलावा मिट्टी को भवन निर्माण के लिए भी बेचा जा रहा है। मिट्टी के खनन से खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। इसके अलावा माधोटांडा क्षेत्र के डगा गांव में भी खुलेआम खनन किया जा रहा है।
आरोप है कि रोजाना रात होते ही खनन कर पुल के निकट विकसित की जा रही कॉलोनी में मिट्टी का पटान किया जा रहा है।
यह हैं नियम
मिट्टी के खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरी है। निर्धारित प्रारूप पर डीएम, एडीएम, खनन अधिकारी और बीडीओ के नाम पर प्रार्थनापत्र देना होता है। आवेदक को जिस स्थान से मिट्टी लाई जा रही है, उसकी खतौनी के अनुसार भू स्वामी का भी पूरा ब्योरा देना होता है। यह भी सूचना देनी होती है कि कितनी मिट्टी का खनन हो रहा है, जहां मिट्टी खोदी जा रही है, वहां से निर्माण स्थल कितनी दूर है। मिट्टी ढोने वाले वाहन का नंबर, चालक का नाम और उसका मोबाइल नंबर भी बताना होता है।
मामला संज्ञान में नहीं है। एडीएम वित्त एवं राजस्व से जानकारी ली जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-संजय कुमार सिंह, डीएम