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बड़ों से ज्यादा बच्चों में बढ़ रहा बुखार का असर
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पीलीभीत। मौसम में अचानक बदलाव से बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में भीड़ लग रही है। जिला अस्पताल में भी रोजाना ओपीडी में मरीजों की संख्या एक हजार से 15 सौ पहुंच रही है। बच्चों पर इसका ज्यादा असर दिख रहा है। जिले में दस दिन में तीन बच्चों की बुखार से मौत हो चुकी है।
जिला अस्पताल में बुखार ग्रसित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। दस दिन से ओपीडी की संख्या एक हजार से 15 सौ तक पहुंच रही है। जबकि सामान्य दिनों में 800 से एक हजार मरीज तक आते हैं। इमरजेंसी वार्ड में भी भर्ती मरीजों में बुखार ग्रसित की संख्या अधिक है। इनमें बड़ों के साथ बच्चों की संख्या भी काफी है। रविवार को भी बुखार के करीब बीस मरीज इमरजेंसी में भर्ती रहे। बुखार के साथ पेट में संक्रमण की समस्या की मरीजों में समस्या बताई गई। कुछ मरीज इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना था कि शनिवार को बेड पर जो चादर बिछाई गई थी, रविवार को भी उसे नहीं बदला गया। सीएमओ ने बुखार पीड़ित बच्चों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। मलेरिया विभाग को भी सक्रिय किया गया है।
केस एक
बिलसंडा के गांव भदेगकंजा निवासी 13 वर्षीय प्रियांशु पुत्र प्रदीप कुमार को दो सितंबर को बुखार आया था। परिजनों से क्षेत्र के ही डॉक्टर से उपचार शुरू कराया था। दवाई से आराम नहीं मिला, देर रात हालत बिगड़ने के बाद किशोर की मौत हो गई थी। चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर परिजन और ग्रामीणों की जांच पड़ताल की थी।
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केस दो
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव भोपतपुर निवासी सियाराम कश्यप की 15 वर्षीय पुत्री कुमकुम को चार सितंबर को ठंड लगकर बुखार आया था। परिजनों ने बरखेड़ा के प्राइवेट अस्पताल ले जाकर उपचार शुरू कराया था। दवाइयां खाने के बाद बुखार सही हो गया था। अगले दिन किशोरी ठीक रही लेकिन रात को उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। क्षेत्र के चिकित्सकों ने मना कर दिया। जिला मुख्यालय के प्राइवेट अस्पताल पहुंचने पर किशोरी को मृत घोषित कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर जांच करने के साथ दवाएं भी वितरित की।
केस तीन
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव मचवाखेड़ा निवासी सुखलाल के सात वर्षीय पुत्र सुरजीत कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन गांव में ही इलाज कराते रहे। शुक्रवार को बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजन देर रात उसको लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने स्थिति देखने के बाद उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। मलेरिया विभाग की टीम ने गांव में कैंप कर ग्रामीणों की जांच की। हालांकि किसी में मलेरिया की पुष्टि नहीं हो सकी।
बुखार आए तो खुद से दवा न लें
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर का कहना है कि दिन में तेज धूप, उमस और रात को हल्की ठंड होने से बुखार के मरीज ज्यादा बढ़ रहे हैं। बुखार आने पर खुद से दवा न खाएं। चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं। मच्छरों से बचाव करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। शुद्ध पानी पीएं। बासी खाना न खाएं। बच्चों का अधिक ध्यान रखने की जरूरत है।
‘बरखेड़ा क्षेत्र से शुक्रवार रात जिला अस्पताल में आए किशोर के दिमागी बुखार के लक्षण थे। हालत गंभीर थी। इसकी रिपोर्ट भी बनाई गई है।’ - डॉ. बीएस यादव, सीएमएस
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जिला अस्पताल में बुखार ग्रसित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। दस दिन से ओपीडी की संख्या एक हजार से 15 सौ तक पहुंच रही है। जबकि सामान्य दिनों में 800 से एक हजार मरीज तक आते हैं। इमरजेंसी वार्ड में भी भर्ती मरीजों में बुखार ग्रसित की संख्या अधिक है। इनमें बड़ों के साथ बच्चों की संख्या भी काफी है। रविवार को भी बुखार के करीब बीस मरीज इमरजेंसी में भर्ती रहे। बुखार के साथ पेट में संक्रमण की समस्या की मरीजों में समस्या बताई गई। कुछ मरीज इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना था कि शनिवार को बेड पर जो चादर बिछाई गई थी, रविवार को भी उसे नहीं बदला गया। सीएमओ ने बुखार पीड़ित बच्चों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। मलेरिया विभाग को भी सक्रिय किया गया है।
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केस एक
बिलसंडा के गांव भदेगकंजा निवासी 13 वर्षीय प्रियांशु पुत्र प्रदीप कुमार को दो सितंबर को बुखार आया था। परिजनों से क्षेत्र के ही डॉक्टर से उपचार शुरू कराया था। दवाई से आराम नहीं मिला, देर रात हालत बिगड़ने के बाद किशोर की मौत हो गई थी। चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर परिजन और ग्रामीणों की जांच पड़ताल की थी।
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केस दो
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव भोपतपुर निवासी सियाराम कश्यप की 15 वर्षीय पुत्री कुमकुम को चार सितंबर को ठंड लगकर बुखार आया था। परिजनों ने बरखेड़ा के प्राइवेट अस्पताल ले जाकर उपचार शुरू कराया था। दवाइयां खाने के बाद बुखार सही हो गया था। अगले दिन किशोरी ठीक रही लेकिन रात को उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। क्षेत्र के चिकित्सकों ने मना कर दिया। जिला मुख्यालय के प्राइवेट अस्पताल पहुंचने पर किशोरी को मृत घोषित कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में कैंप लगाकर जांच करने के साथ दवाएं भी वितरित की।
केस तीन
बरखेड़ा क्षेत्र के गांव मचवाखेड़ा निवासी सुखलाल के सात वर्षीय पुत्र सुरजीत कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। परिजन गांव में ही इलाज कराते रहे। शुक्रवार को बच्चे की हालत बिगड़ने पर परिजन देर रात उसको लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों ने स्थिति देखने के बाद उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई। मलेरिया विभाग की टीम ने गांव में कैंप कर ग्रामीणों की जांच की। हालांकि किसी में मलेरिया की पुष्टि नहीं हो सकी।
बुखार आए तो खुद से दवा न लें
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर का कहना है कि दिन में तेज धूप, उमस और रात को हल्की ठंड होने से बुखार के मरीज ज्यादा बढ़ रहे हैं। बुखार आने पर खुद से दवा न खाएं। चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराएं। मच्छरों से बचाव करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। शुद्ध पानी पीएं। बासी खाना न खाएं। बच्चों का अधिक ध्यान रखने की जरूरत है।
‘बरखेड़ा क्षेत्र से शुक्रवार रात जिला अस्पताल में आए किशोर के दिमागी बुखार के लक्षण थे। हालत गंभीर थी। इसकी रिपोर्ट भी बनाई गई है।’ - डॉ. बीएस यादव, सीएमएस