पीलीभीत: पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस में अब चार अतिरिक्त कोच, यात्रियों को मिलेगी राहत
टनकपुर-दिल्ली पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस में बुधवार से चार अतिरिक्त द्वितीय श्रेणी के कोच स्थायी रूप से जोड़े गए हैं। इससे द्वितीय श्रेणी के कोचों की संख्या आठ से बढ़कर 12 और कुल कोच 12 से बढ़कर 16 हो गए हैं। यह व्यवस्था पीलीभीत, मझोला और आसपास के यात्रियों को अधिक जगह प्रदान करेगी।
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टनकपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। ट्रेन में द्वितीय श्रेणी के चार अतिरिक्त कोच स्थायी रूप से जोड़े गए हैं। बुधवार से लागू हुई इस व्यवस्था के बाद द्वितीय श्रेणी के कोचों की संख्या आठ से बढ़कर 12 हो गई है, जबकि ट्रेन में कुल कोचों की संख्या 12 से बढ़कर 16 हो गई है। इससे पीलीभीत, मझोला और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सफर के दौरान अधिक जगह मिल सकेगी।
टनकपुर-दिल्ली के बीच संचालित पूर्णागिरि जनशताब्दी एक्सप्रेस क्षेत्र के यात्रियों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या अधिक होने और कोच सीमित रहने के कारण अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता था।
खासकर पीलीभीत, मझोला और आसपास के छोटे स्टेशनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को सीट मिलने में दिक्कत होती थी। वहीं, पूर्णागिरि धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, व्यापारियों और किसानों को भी इस ट्रेन से यात्रा करने में सहूलियत मिलेगी।
सीटों की उपलब्धता बढ़ने से मिलेगी राहत
ट्रेन में चार अतिरिक्त द्वितीय श्रेणी के कोच स्थायी रूप से जुड़ने से सामान्य श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों की क्षमता बढ़ेगी। इससे भीड़ का दबाव कम होने और अधिक यात्रियों को यात्रा का अवसर मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से इस ट्रेन में अतिरिक्त कोच बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब कोचों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को राहत मिलने की संभावना है।
केंद्रीय राज्यमंत्री एवं पीलीभीत के सांसद जितिन प्रसाद ने बताया कि क्षेत्र की जनता की जरूरतों के अनुरूप जनसुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता है। रेल संपर्क किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है। ट्रेन में अतिरिक्त कोच बढ़ने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और किसानों को लाभ मिलेगा। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक निर्णय लेने के लिए रेल मंत्रालय का आभार।