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‘भाजपा सरकार रोज उत्पीड़न करने के बजाय किसानों को सीधे गोली मार दे’

Tue, 13 Oct 2020 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 12:21 AM IST
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farmers in trouble
प्रेसवार्ता करते पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। वरिष्ठ सपा नेता और पूर्व खाद्य रसद मंत्री हेमराज वर्मा ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों में सरकारी धान खरीद, पराली जलाने के नाम पर एफआईआर दर्ज करके जेल भेजने और गन्ना बकाया भुगतान न करके किसानों का दोहरा उत्पीड़न किया जा रहा है। सरकार से मांग है कि किसी न किसी बहाने से रोज उत्पीड़न करने के बजाय प्रशासन और पुलिस किसानों को सीधे गोली मार दे। न किसान रहेंगे, न ही सरकार को परेशानी होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 10 दिन के भीतर गन्ना किसानों का शत प्रतिशत बकाया भुगतान और किसानों का शत प्रतिशत धान क्रय केंद्रों पर तोलने की व्यवस्था न हुई तो सपा कार्यकर्ता आंदोलन करने पर बाध्य होंगे।
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शहर के एक होटल में सोमवार दोपहर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा भाजपा सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि सरकारी धान खरीद को अभी मात्र 11 दिन ही हुए हैं। अधिकांश किसानों को अपना धान अधिक नमी के नाम पर प्राइवेट आढ़तियों को ही 1150 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर धान किसानों से खरीदना दर्शाया जा रहा है। किसानों का सरकारी क्रय केंद्र पर केवल 22 हजार क्विंटल धान बिका है जबकि प्राइवेट आढ़तों पर किसान 61 हजार क्विंटल धान औने-पौने दाम पर बेच चुके हैं। सरकार की धान खरीद की नीति से किसानों को अब तक 3.5 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है, जबकि माफियाओं और जमाखोरों को तीन करोड़ से ज्यादा का फायदा पहुंचा। पूर्व मंत्री ने कहा कि राइस मिलों ने अपनी सोसायटी बनाकर सरकारी क्रय केंद्र ले रखे हैं। वही पूरी धान खरीद में हावी हैं। किसानों को मूर्ख बनाया गया। सरकारी एजेंसियों पर किसानों का धान खरीदने का वारदाना तक नहीं है। राइस मिल प्रति क्विंटल धान पर 600 रुपये का मुनाफा कमा रही हैं।
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हेमराज वर्मा ने कहा कि कृषि बिल लाकर केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन कर दिया। अब माफिया और जमाखोर आवश्यक खाद्य पदार्थों की जमाखोरी करेंगे। उसका प्रभाव आम जनता को महंगाई के रूप में भुगताना होगा। खेत में पराली जलाने के नाम पर किसानों को प्रशासन जेल भेजने में लगा है, जबकि गांवों में विरोधी फंसाने के लिए किसानों की पराली खुद जाकर जला देते हैं। फैक्टरी और कारखानों से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है। उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि वह एफआईआर या जेल जाने से डरने वालों में से नहीं हैं। सरकार या प्रशासन विपक्ष की आवाज नहीं दबा सकता।
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