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धान की रही बची फसल सुखा रहे किसान
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बाढ़ के बाद के हालात-सेल्हा गांव में मार्ग पर धान की फसल को सूखने डालता ग्रामीण।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जिले में 62 गांव बाढ़ प्रभावित हुए हैं। बाढ़ की तबाही और फसलों का हाल देखकर किसानों की हालत खराब हो रही है। आर्थिक संकट सामने है और सरकारी मदद अभी दूर है। मदद के नाम पर सिर्फ लेखपाल और संभ्रांत लोगों ने बेघर हुए लोगों को सिर्फ पूड़ी सब्जी के पैकेट ही उपलब्ध कराए हैं।
जिल में सात हजार हेक्टेयर जमीन की फसलें बर्बाद हुई हैं। क्षति का प्रतिशत अलग-अलग है। इस पर लेखपाल गांव-गांव सर्वे कर रहे हैं। किसानों की हालत खराब है। तमाम किसान धान की बची खुची फसल सुखा रहे हैं तो तमाम किसान खेत से पानी हटने का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ के दौरान आया पानी खेत निचले होने की वजह से अभी तक भरा पड़ा है जबकि नदियों का जलस्तर घट चुका है।
बसंतपुर गांव निवासी किसान गुरुजीत सिंह का कहना है कि चार एकड़ जमीन में धान की फसल लगाई थी। लगातार हुई बारिश से दो एकड़ फसल पूरी तरह डूब गई थी। पानी उतरने के बाद हाथ से कटवाकर सूखने डाल दी है। बहुत नुकसान हो गया।
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माधोटांडा क्षेत्र के रानीगंज मत्थना निवासी वेदप्रकाश ने बताया डेढ़ एकड़ खुद की और सात बीघा जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। जो बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गई। अब जो धान बचा है उसे काटकर ऊंचे स्थानों पर सूखने डाल रहे हैं।
सिमरा गांव निवासी माजिद ने बताया कि चार एकड़ खेत में धान की फसल लगाई थी। अधिकांश फसल पक भी चुकी थीं लेकिन बाढ़ की आफत ऐसी टूटी कि सारी फसल जलमग्न हो गई। पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। जिससे बची खुची फसल काट सकूं।
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जिल में सात हजार हेक्टेयर जमीन की फसलें बर्बाद हुई हैं। क्षति का प्रतिशत अलग-अलग है। इस पर लेखपाल गांव-गांव सर्वे कर रहे हैं। किसानों की हालत खराब है। तमाम किसान धान की बची खुची फसल सुखा रहे हैं तो तमाम किसान खेत से पानी हटने का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ के दौरान आया पानी खेत निचले होने की वजह से अभी तक भरा पड़ा है जबकि नदियों का जलस्तर घट चुका है।
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बसंतपुर गांव निवासी किसान गुरुजीत सिंह का कहना है कि चार एकड़ जमीन में धान की फसल लगाई थी। लगातार हुई बारिश से दो एकड़ फसल पूरी तरह डूब गई थी। पानी उतरने के बाद हाथ से कटवाकर सूखने डाल दी है। बहुत नुकसान हो गया।
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माधोटांडा क्षेत्र के रानीगंज मत्थना निवासी वेदप्रकाश ने बताया डेढ़ एकड़ खुद की और सात बीघा जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। जो बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब गई। अब जो धान बचा है उसे काटकर ऊंचे स्थानों पर सूखने डाल रहे हैं।
सिमरा गांव निवासी माजिद ने बताया कि चार एकड़ खेत में धान की फसल लगाई थी। अधिकांश फसल पक भी चुकी थीं लेकिन बाढ़ की आफत ऐसी टूटी कि सारी फसल जलमग्न हो गई। पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। जिससे बची खुची फसल काट सकूं।