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बाघ की दहशत से खेती किसानी प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत
Updated Sat, 26 Aug 2017 06:55 PM IST
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खूनी बाघ को पकड़ने में वन विभाग एवं विशेषज्ञोें की टीम 16 दिन बाद भी नाकाम रही। बाघ के न पकड़ने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है और वह खाद, स्प्रे, सिंचाई, निराई गुड़ाई आदि नहीं कर पा रहे हैं, इसकी वजह दहशत है।
सात, आठ और 10 अगस्त को वनकटी से निकले बाघ ने अमरिया क्षेत्र के तीन लोगों को मार डाला था। 10 अगस्त को बेहरी निवासी कुंवरसेन की मौत के बाद वन महकमे ने खूनी बाघ को पकड़ने की कवायद शुरू की। 11 अगस्त से वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ उसकी तलाश में जुट हुए हैं। हाथियों से कांबिंग के साथ ही पिंजरे लगाए गए हैं और पड्डे भी बांधे गए हैं। अब तक तीन पड्डों को बाघ मार चुका है। वन विभाग की टीम प्रतिदिन हिमकनपुर के निकट बेहरी गांव के आसपास खेतों मे बाघ की तलाश मे भटक रही है लेकिन बाघ दिन में बाहर नहीं निकल रहा है। बाघ की तलाशी के साथ वन विभाग की टीम आसपास गांव के लोगों को खेतों पर न जाने और अकेेले घराें से न निकलने को कह रही है। शनिवार सुबह टीम के सदस्यों ने बेहरी गांव के खेतों का निरीक्षण किया लेकिन कहीं बाघ के पदचिह्न नहीं मिले और साथ ही बांधे गए पड्ढे भी सुरक्षित मिले हैं। लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञ डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, रेंजर बराही अनिल शाह अपनी टीम के साथ मचान पर बैठकर के आने का इंतजार भी करते रहे लेकिन घंटों निगरानी के बाद भी बाघ नहीं दिखा।
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सात, आठ और 10 अगस्त को वनकटी से निकले बाघ ने अमरिया क्षेत्र के तीन लोगों को मार डाला था। 10 अगस्त को बेहरी निवासी कुंवरसेन की मौत के बाद वन महकमे ने खूनी बाघ को पकड़ने की कवायद शुरू की। 11 अगस्त से वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेषज्ञ उसकी तलाश में जुट हुए हैं। हाथियों से कांबिंग के साथ ही पिंजरे लगाए गए हैं और पड्डे भी बांधे गए हैं। अब तक तीन पड्डों को बाघ मार चुका है। वन विभाग की टीम प्रतिदिन हिमकनपुर के निकट बेहरी गांव के आसपास खेतों मे बाघ की तलाश मे भटक रही है लेकिन बाघ दिन में बाहर नहीं निकल रहा है। बाघ की तलाशी के साथ वन विभाग की टीम आसपास गांव के लोगों को खेतों पर न जाने और अकेेले घराें से न निकलने को कह रही है। शनिवार सुबह टीम के सदस्यों ने बेहरी गांव के खेतों का निरीक्षण किया लेकिन कहीं बाघ के पदचिह्न नहीं मिले और साथ ही बांधे गए पड्ढे भी सुरक्षित मिले हैं। लखनऊ चिड़ियाघर के विशेषज्ञ डॉ. उत्कर्ष शुक्ला, रेंजर बराही अनिल शाह अपनी टीम के साथ मचान पर बैठकर के आने का इंतजार भी करते रहे लेकिन घंटों निगरानी के बाद भी बाघ नहीं दिखा।
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