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महोफ रेंजर, डीएफओ से स्पष्टीकरण तलब
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:01 PM IST
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टाइगर रिजर्व की सुरक्षा
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टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में तीन पेड़ों के कटान का मामला
वन संरक्षक की जांच के बाद की कार्रवाई
जिनके हवाले सुरक्षा वही करा रहे कटान
टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में तीन पेड़ों की कटान के मामले में वनकर्मी फंस गए हैं। वन संरक्षक ने इसे गंभीरता से लेते हुए महोफ रेंजर व डीएफओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस कार्रवाई से वनकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
वनकर्मियों की मिलीभगत से जंगल में कटान कोई नई बात नहीं है। कुछ दिन पूर्व हरीपुर रेंज में पेड़ कटने की शिकायत पर लखनऊ से आई टीम ने जांच की थी। अब नया मामला महोफ रेंज में सामने आया है। मुखबिर ने इसकी सूचना वन संरक्षक वीके सिंह को दी थी। इस पर उन्होंने तीन सदस्यीय टीम महोफ रेंज मेें भेज कर कटान की जांच कराई। जांच में पाया गया कि महोफ रेंज के कंपार्टमेंट बघा 56 में साल के तीन पेड़ काटे गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन पेड़ों के कटान के मामले में वन विभाग में कोई केस भी नहीं किया गया है। जांच टीम ने इसकी रिपोर्ट वन संरक्षक को भेज दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर वन संरक्षक वीके सिंह ने महोफ रेंजर गिर्राज सिंह और डीएफओ कैलाश प्रकाश को नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण तलब किया है।
महोफ रेंज में अवैध कटान की सूचना मिली थी। इस पर पीलीभीत सामाजिक वानिकी के रेंजर सहित तीन लोगों की टीम बनाकर जांच कराई गई थी। जांच में तीन पेड़ कटने की रिपोर्ट मिली है। रेंजर और डीएफओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। जवाब के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वीके सिंह, वन संरक्षक
तीन साल पहले डीएफओ समेत 23 हुए थे सस्पेंड
टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों की मिली भगत के चलते बेशकीमती लकड़ी के कटान की बात कोई नई नहीं है। इसकी अक्सर शिकायतें मिलती हैं। तीन वर्ष पूर्व टाइगर रिजर्व बनने के चंद दिनों बाद ही महोफ रेंज में बड़े पैमाने पर हुए अवैध कटान के मामले में रेंजर सहित 23 वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। ये अलग बात है कि अपने रसूक व सत्ता में पैठ के चलते ये सभी वनकर्मी फिलहाल बहाल हो गए हैं। इनमें से अधिकांश यहीं तैनात भी हैं।
शासन ने पीलीभीत के जंगलों को नौ जूून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया था। महोफ, हरीपुर व माला रेंज में बड़े पैमाने पर अवैध कटान की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को मिली थी। इस पर प्रशासन ने जांच कराकर शासन को गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 27 जुलाई 2014 को तत्कालीन डीएफओ डॉ. राजीव मिश्रा को निलंबित कर दिया था। इसके चार दिन बाद ही एसडीओ सुधाकर मिश्रा, तीन वनक्षेत्राधिकारी क्रमश: महोफ के अनिल शाह, हरीपुर के जगन्नाथ प्रसाद व माला के खुर्शीद आलम, दो डिप्टी रेंजर वजीर हसन व सुभाष बाबू, पांच वन दरोगा क्रमश: कपिल सिंह, देवऋषि, रामेंद्र सिंह, थानेश्वर दयाल, हरेंद्र सिंह और 11 वनरक्षक क्रमश: रमाकांत, राजेंद्र बोरा, सईदुल रहमान, सुरेंद्र गौतम, करुणानंद पांडे, कृष्णसिंह बेलवाल, कुबेर सिंह, राजेंद्र पाल, सोबरन सिंह, सद्दीक अहमद व ज्ञानी सिंह को सस्पेंड कर दिया था। यह अलग बात है कि धीरे-धीरे इन सभी को महकमे ने बहाल भी कर दिया। कुछ को छोड़ अधिकांश यहीं पर तैनात हैं। इधर एक बार फिर टाइगर रिजर्व प्रशासन कुछ दिन पहले जंगल में काटे गए तीन साल के पेड़ काटे जाने के मामले में फिर वनकर्मी फंस गए हैं। वन संरक्षक ने फिलहाल इस ताजा मामले में रेंजर और डीएफओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब जरूर किया है, लेकिन इसके लिए उनकी जिम्मेदारी कब तक तय हो सकेगी कहना मुश्किल होगा।
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वन संरक्षक की जांच के बाद की कार्रवाई
जिनके हवाले सुरक्षा वही करा रहे कटान
टाइगर रिजर्व वन क्षेत्र में तीन पेड़ों की कटान के मामले में वनकर्मी फंस गए हैं। वन संरक्षक ने इसे गंभीरता से लेते हुए महोफ रेंजर व डीएफओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। इस कार्रवाई से वनकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।
वनकर्मियों की मिलीभगत से जंगल में कटान कोई नई बात नहीं है। कुछ दिन पूर्व हरीपुर रेंज में पेड़ कटने की शिकायत पर लखनऊ से आई टीम ने जांच की थी। अब नया मामला महोफ रेंज में सामने आया है। मुखबिर ने इसकी सूचना वन संरक्षक वीके सिंह को दी थी। इस पर उन्होंने तीन सदस्यीय टीम महोफ रेंज मेें भेज कर कटान की जांच कराई। जांच में पाया गया कि महोफ रेंज के कंपार्टमेंट बघा 56 में साल के तीन पेड़ काटे गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन पेड़ों के कटान के मामले में वन विभाग में कोई केस भी नहीं किया गया है। जांच टीम ने इसकी रिपोर्ट वन संरक्षक को भेज दी। जांच रिपोर्ट के आधार पर वन संरक्षक वीके सिंह ने महोफ रेंजर गिर्राज सिंह और डीएफओ कैलाश प्रकाश को नोटिस भेज कर स्पष्टीकरण तलब किया है।
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महोफ रेंज में अवैध कटान की सूचना मिली थी। इस पर पीलीभीत सामाजिक वानिकी के रेंजर सहित तीन लोगों की टीम बनाकर जांच कराई गई थी। जांच में तीन पेड़ कटने की रिपोर्ट मिली है। रेंजर और डीएफओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। जवाब के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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वीके सिंह, वन संरक्षक
तीन साल पहले डीएफओ समेत 23 हुए थे सस्पेंड
टाइगर रिजर्व में वनकर्मियों की मिली भगत के चलते बेशकीमती लकड़ी के कटान की बात कोई नई नहीं है। इसकी अक्सर शिकायतें मिलती हैं। तीन वर्ष पूर्व टाइगर रिजर्व बनने के चंद दिनों बाद ही महोफ रेंज में बड़े पैमाने पर हुए अवैध कटान के मामले में रेंजर सहित 23 वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। ये अलग बात है कि अपने रसूक व सत्ता में पैठ के चलते ये सभी वनकर्मी फिलहाल बहाल हो गए हैं। इनमें से अधिकांश यहीं तैनात भी हैं।
शासन ने पीलीभीत के जंगलों को नौ जूून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया था। महोफ, हरीपुर व माला रेंज में बड़े पैमाने पर अवैध कटान की सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को मिली थी। इस पर प्रशासन ने जांच कराकर शासन को गोपनीय रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने 27 जुलाई 2014 को तत्कालीन डीएफओ डॉ. राजीव मिश्रा को निलंबित कर दिया था। इसके चार दिन बाद ही एसडीओ सुधाकर मिश्रा, तीन वनक्षेत्राधिकारी क्रमश: महोफ के अनिल शाह, हरीपुर के जगन्नाथ प्रसाद व माला के खुर्शीद आलम, दो डिप्टी रेंजर वजीर हसन व सुभाष बाबू, पांच वन दरोगा क्रमश: कपिल सिंह, देवऋषि, रामेंद्र सिंह, थानेश्वर दयाल, हरेंद्र सिंह और 11 वनरक्षक क्रमश: रमाकांत, राजेंद्र बोरा, सईदुल रहमान, सुरेंद्र गौतम, करुणानंद पांडे, कृष्णसिंह बेलवाल, कुबेर सिंह, राजेंद्र पाल, सोबरन सिंह, सद्दीक अहमद व ज्ञानी सिंह को सस्पेंड कर दिया था। यह अलग बात है कि धीरे-धीरे इन सभी को महकमे ने बहाल भी कर दिया। कुछ को छोड़ अधिकांश यहीं पर तैनात हैं। इधर एक बार फिर टाइगर रिजर्व प्रशासन कुछ दिन पहले जंगल में काटे गए तीन साल के पेड़ काटे जाने के मामले में फिर वनकर्मी फंस गए हैं। वन संरक्षक ने फिलहाल इस ताजा मामले में रेंजर और डीएफओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब जरूर किया है, लेकिन इसके लिए उनकी जिम्मेदारी कब तक तय हो सकेगी कहना मुश्किल होगा।
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