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Pilibhit News: हर साल झेलते हैं बाढ़ का दंश, उजड़ना और फिर बसना ही नियति

Wed, 19 Jul 2023 12:16 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Updated Wed, 19 Jul 2023 12:16 AM IST
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Every year we face the brunt of flood, devastation and then it is our destiny to settle
नदी का जलस्तर बढ़ने से रुका नांव का संचालन। संवाद
कलीनगर। शारदा नदी की बाढ़ का दंश हम हार साल ही झेलते हैं। दशकों से हर साल बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन का एकमात्र साधन नाव का संचालन बंद हो जाता है। गांव का तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है।
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तीन गांवोंं में बसे सभी 12 सौ परिवार घरों में ही कैद हो जाते हैं। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिलती। हम लोग बाढ़ के मद्देनजर पहले से ही दो महीने के खाने-पीने के जरूरी सामान का इंतजाम कर लेते हैं। यह दर्द है कलीनगर तहसील क्षेत्र के शारदा नदी पार गांव ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा और गुन्हान में बसे करीब 12 सौ थारू और बंगाली परिवारोंं का।
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शारदा नदी के पार तीन गांव तलहटी में बसे हैं। इनमें करीब आठ सौ थारू परिवार हैं। बाकी करीब 400 बंगाली परिवार हैं। शारदा नदी बरसात के दौरान कृषि भूमि के साथ ही आबादी क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाती है। दरअसल, नदी के पार के लोगों को तहसील और जिला मुख्यालय आने के लिए एकमात्र साधन नाव ही है। हर साल बारिश के दौरान करीब तीन माह नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गावों का जिले के बाकी हिस्से से संपर्क टूट जाता है।
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मंगलवार को बनबसा बैराज से डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नाव का संचालन बंद कर दिया गया है। ढकिया निवासी छोटे लाल राना ने बताया कि जलस्तर बढ़ते ही नदी पार कर तहसील या जिला मुख्यालय जाना बंद हो गया है। हम लोगों के लिए यह स्थिति नई नहीं है। एक माह पहले ही दो महीने के राशन समेत सभी जरूरी सामान घर लाकर रख लिया था।
बाढ़ के मद्देनजर घर में ही ऊंचा मचान भी बना लिया है। हर बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग करते हैं कि कहीं सुरक्षित स्थान पर बसा दिया जाए, लेकिन दशकों से हालात वही हैं। फिलहाल इनमें बदलाव के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में खुद ही परेशानी का सामना करते हैं।
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पिछले साल सेना के हेलिकॉप्टर ने निकाले थे बाढ़ में फंसे 30 लोग
शारदा नदी में पिछले साल भी भयंकर बाढ़ आई थी। हालात बेकाबू हो गए थे। नदी के इस पार के अलावा दूसरी और भी बाढ़ में तमाम लोग घिर गए थे। 30 से अधिक लोग खतरे की जद में पहुंच गए थे। उन्हें बचाने के लिए प्रशासन को सेना की मदद लेनी पड़ी थी। सेना के हेलिकॉप्टर से बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित लाकर नदी के इस पार छोड़ा गया था।
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प्रशासन नहीं करता मदद... अपने दम पर रहते हैं जिंदा
फोटो 21-
शारदा पार करीब 12 सौ परिवार रहते हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ते ही परेशानी बढ़ जाती है। आवागमन ठप होने से दो माह तक के सारे इंतजाम पहले से ही करके रख लेते हैं। - छोटे लाल राना, ढकिया ताल्लुके महाराजपुर

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फोटो 20-

दशकों से बरसात के दौरान परेशानी झेलते आ रहे हैं। मांग के बावजूद सुरक्षित स्थान पर नहीं बसाया गया। जहां बसे हैं वहां भी टाइगर रिजर्व की आपत्तियां रहतीं हैं। हर तरफ से परेशान हैं। - ईशू, गोरख डिब्बी

नदी का जलस्तर बढ़ने से रुका नांव का संचालन। संवाद

नदी का जलस्तर बढ़ने से रुका नांव का संचालन। संवाद

नदी का जलस्तर बढ़ने से रुका नांव का संचालन। संवाद

नदी का जलस्तर बढ़ने से रुका नांव का संचालन। संवाद

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