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गांव में नहीं मिल रहा काम, बाहर जाने को है श्रमिक मजबूर
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मनरेगा के तहत काम करते मजदूर। फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। जिले में मनरेगा के तहत 226835श्रमिक पंजीकृत हैं लेकिन सिर्फ 15858 श्रमिकों को ही रोजगार मिला है। इस तरह से 210977 मजदूर खाली बैठे हैं। कागजों में ही योजना दौड़ाई जा रही है। धरातल पर श्रमिक काम का इंतजार कर रहे हैं। काम नहीं मिलने के कारण श्रमिक फिर से अन्य शहरों में रोजगार की तलाश के लिए जाने लगे हैं।
जनपद में मनरेगा योजना अपने दावों पर कितना खरा उतर रही है? इसका उदाहरण चालू वित्तीय वर्ष के कुछ ही महीनों में ही सामने आ गया है। सिर्फ दस फीसदी जॉब कार्ड धारकों को मनरेगा से रोजगार मिल सका है। इससे बड़ी संख्या में श्रमिकों के हाथ खाली हैं। वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना लागू की थी। इस योजना का मकसद गांव के वाशिंदों को घर द्वार छोड़कर रोजी रोटी के लिए अन्य शहरों की ओर जाने से रोकना था।
इस पर शुरूआत में कामयाबी मिली, लेकिन बाद में सरकारी सिस्टम लापरवाह होता गया। नतीजा पलायन का सिलसिला रूकने के बजाय और तेजी पकड़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में भी यह देखने को मिल रहा है। संक्रमण का कहर थमने के साथ अन्य शहरों से भागकर गांव की ओर आए ग्रामीण दोबारा मुंबई, सूरत, दिल्ली, पूना, लुधियाना व पंजाब की ओर पलायन कर रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में जनपद में 226835 श्रमिक होने के बाद भी सिर्फ 15858 को ही रोजगार मिल रहा है। धरातल की बात की जाए तो 720 ग्राम पंचायतों के अधिकतर में श्रमिकों को काम नहीं मिला है। जबकि अफसर 720 ग्राम पंचायतों में से 646 ग्राम पंचायतों में काम चलने का दावा कर दे रहे हैं। केंद्र सरकार की इस योजना को सफल बनाया जा रहा है।
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जनपद में मनरेगा योजना अपने दावों पर कितना खरा उतर रही है? इसका उदाहरण चालू वित्तीय वर्ष के कुछ ही महीनों में ही सामने आ गया है। सिर्फ दस फीसदी जॉब कार्ड धारकों को मनरेगा से रोजगार मिल सका है। इससे बड़ी संख्या में श्रमिकों के हाथ खाली हैं। वर्ष 2006 में केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना लागू की थी। इस योजना का मकसद गांव के वाशिंदों को घर द्वार छोड़कर रोजी रोटी के लिए अन्य शहरों की ओर जाने से रोकना था।
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इस पर शुरूआत में कामयाबी मिली, लेकिन बाद में सरकारी सिस्टम लापरवाह होता गया। नतीजा पलायन का सिलसिला रूकने के बजाय और तेजी पकड़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में भी यह देखने को मिल रहा है। संक्रमण का कहर थमने के साथ अन्य शहरों से भागकर गांव की ओर आए ग्रामीण दोबारा मुंबई, सूरत, दिल्ली, पूना, लुधियाना व पंजाब की ओर पलायन कर रहे हैं। इस वित्तीय वर्ष में जनपद में 226835 श्रमिक होने के बाद भी सिर्फ 15858 को ही रोजगार मिल रहा है। धरातल की बात की जाए तो 720 ग्राम पंचायतों के अधिकतर में श्रमिकों को काम नहीं मिला है। जबकि अफसर 720 ग्राम पंचायतों में से 646 ग्राम पंचायतों में काम चलने का दावा कर दे रहे हैं। केंद्र सरकार की इस योजना को सफल बनाया जा रहा है।
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