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Pilibhit Tiger Reserve: पीटीआर ने पीलीभीत के जंगलों को दिलाई पहचान, लोगों को मिला रोजगार

Tue, 28 Feb 2023 07:10 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 28 Feb 2023 07:10 AM IST
सार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलने से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़े। पहले यहां कुछ नहीं था। जंगल से सटे इलाकों में ढाबे व होटल तेजी से खुले हैं। 

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Employment opportunities increased after formation of Pilibhit Tiger Reserve
पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) ने न सिर्फ जिले के जंगलों को अलग पहचान दी है, बल्कि लोगों को रोजगार भी दिलाया है। करीब 80 गाइड और चालकों की आर्थिक स्थिति जहां मजबूत हुई है, वहीं जंगल के बाहरी क्षेत्रों में होटल-ढाबे भी खुले हैं। यहां भी लोगों को रोजगार मिला है। 

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73 हजार हेक्टेयर में फैले पीलीभीत के जंगल को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। इसके बाद जंगल के नियमों में बदलाव के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। मुख्य पर्यटन स्थल चूकाबीच के अलावा जंगल के कुछ अन्य इलाकों को भी सैलानियों के आकर्षण को बढ़ाने के लिए विकसित किया गया। इससे यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ।
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पर्यटन को बढ़ावा मिलने से यहां रोजगार के अवसर भी बढ़े। पहले यहां कुछ नहीं था। वन निगम ने पर्यटकों के लिए पांच टाटा जीनान वाहन चलाए। इसके अलावा 28 जिप्सी (जंगल सफारी) भी लगाई गईं। इन वाहनों को जंगल से सटे इलाकों के लोग ही चलाते हैं। पांच टाटा जीनान के चालकों को वन निगम की ओर से 10 हजार रुपये महीना मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा प्राइवेट जिप्सी पर सैलानियों के बुकिंग के आधार पर मानदेय तय होता है।
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चार साल पहले यहां महज 20 गाइड थे, उनकी संख्या बढ़कर अब 40 हो गई है। सैलानियों को जंगल सफारी घुमाने की जिम्मेदारी निभाने वाले गाइडों को जंगल सफारी के दौरान प्रति चक्कर 500 रुपये का भुगतान किया जाता है।

पीटीआर बनने के बाद रोजगार के बढ़े अवसर

पीटीआर बनने से पहले यहां हालात बिलकुल जुदा थे। जंगल से सटे इलाकों में न कोई ढाबा न ठहरने के इंतजाम थे। 2014 में पीटीआर बना। 2018 से यहां विकास होना शुरू हुआ। पिछले पांच सालों में करीब पांच सौ लोगों को रोजगार मिला है। इनमें जंगाली सफारी चालक, गाइड, होटल व ढाबे पर काम करने वाले, होमस्टे की सुविधा देने वाले लोग शामिल हैं। रोजगार के लिहाज से ढाबे और होटल ही खुले हैं। साथ ही 40 स्थानीय लोगों को गाइड के रूप में रोजगार मिला। इनमें एक युवती भी शामिल है।

होमस्टे और कैंटीन से लोगों को मिला रोजगार

पर्यटन स्थल के चलते जनपद में जंगल सीमा से सटे मुस्तफाबाद, बराही और सेल्हा आदि गांव में पीटीआर प्रशासन के सहयोग के होमस्टे की सुविधा शुरू की गई। होमस्टे के तहत ग्रामीणों ने सैलानियों के ठहरने के इंतजाम किए हैं। इसके लिए 15 सौ से लेकर दो हजार का 24 घंटे रुकने का किराया निर्धारित किया गया है। पांच होम स्टे से करीब 50 लोगों को रोजगार मिला है। इसमें सबसे बड़ा होम स्टे अर्थहोम है। इसके अलावा चूका, मुस्तफाबाद, सप्त सरोवर में कैंटीन खोली गई है। इसमें करीब 50 लोग काम कर रहे हैं।

ढाबों और होटलों में काम करते हैं करीब सौ लोग

पीटीआर बनने के बाद यहां जंगल से सटे इलाकों में ढाबे व होटल तेजी से खुले हैं। पिछले पांच सालों में यहां छोटे-बड़े करीब एक दर्जन ढाबे खुले हैं, जबकि माधोटांडा रोड पर एक लग्जरी होटल खुला है। इन ढाबों व होटलों में करीब सौ लोग काम करते हैं।

डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पीटीआर के पर्यटन से सैकड़ों लोग रोजगार से जुड़े हैं। गाइड और चालक भी स्थानीय रखे गए हैं। इसके अलावा कैंटीन आदि के साथ होमस्टे को भी बढ़ावा दिया गया। आगे विस्तार के और भी प्रयास किए जाएंगे।
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