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Pilibhit News: हरियाली बढ़ाने पर जोर, फ्री प्रजाति के नाम पर काटे जा रहे पेड़
Thu, 05 Jun 2025 12:58 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Thu, 05 Jun 2025 12:58 AM IST
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पीलीभीत। हरियाली बढ़ाने के दावों के बीच जिले में फ्री प्रजाति के नाम पर पेड़ों को उजाड़ने का खेल हावी है। कम दामों में पेड़ों को खरीदकर रातों रात काटा जा रहा है। कार्रवाई के नाम पर विभाग की ओर से महज औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। जिले में अवैध लकड़ी टालों पर खरीद-फरोख्त का खेल हावी है। यही वजह है कि हर साल लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद हरियाली का दायरा घटता जा रहा है।
जिले की पहचान पीलीभीत टाइगर रिजर्व से हैं। जंगल की खूबसूरती और उसमें विचरण करते बाघ देश और विदेशों तक सुर्खियां बटोर रहे हैं। वहीं सामाजिक वानिकी प्रभाग जंगल से बाहर हरियाली को बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहा है। इसके लिए हर साल पौधारोपण किया जाता है। पिछले साल भी 30 लाख से अधिक पौधे रोपे गए थे। इसमें वन विभाग के अलावा जिले के अन्य विभाग भी शामिल रहे। इस बार भी 36 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। लाखों पौधे लगाने के बावजूद पूर्व में जिले में हरियाली का दायरा घटने की बात सामने आई।
पर्यावरण प्रेमियों की मानें तो कुछ अहम कारणों से हरियाली घट रही है। इसमें कुछ प्रजाति के पेड़ों पर मिली छूट के बाद कटान का दायरा बढ़ गया। यूकेलिप्टस के साथ सेमल का धड़ल्ले से कटान हो रहा है। फ्री प्रजाति की आड़ में लोग शीशम समेत अन्य प्रतिबंधित पेड़ों को भी काटने से नहीं चूक रहे हैं। जिले के देहात क्षेत्रों में जगह-जगह लकड़ी की टाल खोल रखी हैं। रातों रात पेड़ों का कटान कर बाहर की मंडियों में लकड़ी को भेज दिया जा रहा है। शोर मचने पर कार्रवाई पर जोर दिया जाता है।
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21 वर्ग किमी में घट गई हरियाली
पूर्व में पर्यावरण मंत्रालय से जारी रिपोर्ट में जिले में करीब 21 वर्ग किमी दायरे में हरियाली का दायरा घटने की बात सामने आई। इसके पीछे जिले में तमाम हाईवे समेत अन्य निर्माण कार्य के क्षेत्र में पेड़ों के कटान के अलावा खेतों में खड़े पेड़ाें का कटान होना वजह बनी हुई है।
जिले में हरियाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। पूर्व में हुए पौधरोपण की नियमित देखरेख के निर्देश दिए गए हैं। इस बार 36 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। जिसको विभाग बार आवंटन कर पौधरोपण कराया जाएगा। - भरत कुमार डीके, डीएफओ, सामाजिक वानिकी
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जिले की पहचान पीलीभीत टाइगर रिजर्व से हैं। जंगल की खूबसूरती और उसमें विचरण करते बाघ देश और विदेशों तक सुर्खियां बटोर रहे हैं। वहीं सामाजिक वानिकी प्रभाग जंगल से बाहर हरियाली को बढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहा है। इसके लिए हर साल पौधारोपण किया जाता है। पिछले साल भी 30 लाख से अधिक पौधे रोपे गए थे। इसमें वन विभाग के अलावा जिले के अन्य विभाग भी शामिल रहे। इस बार भी 36 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है। लाखों पौधे लगाने के बावजूद पूर्व में जिले में हरियाली का दायरा घटने की बात सामने आई।
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पर्यावरण प्रेमियों की मानें तो कुछ अहम कारणों से हरियाली घट रही है। इसमें कुछ प्रजाति के पेड़ों पर मिली छूट के बाद कटान का दायरा बढ़ गया। यूकेलिप्टस के साथ सेमल का धड़ल्ले से कटान हो रहा है। फ्री प्रजाति की आड़ में लोग शीशम समेत अन्य प्रतिबंधित पेड़ों को भी काटने से नहीं चूक रहे हैं। जिले के देहात क्षेत्रों में जगह-जगह लकड़ी की टाल खोल रखी हैं। रातों रात पेड़ों का कटान कर बाहर की मंडियों में लकड़ी को भेज दिया जा रहा है। शोर मचने पर कार्रवाई पर जोर दिया जाता है।
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21 वर्ग किमी में घट गई हरियाली
पूर्व में पर्यावरण मंत्रालय से जारी रिपोर्ट में जिले में करीब 21 वर्ग किमी दायरे में हरियाली का दायरा घटने की बात सामने आई। इसके पीछे जिले में तमाम हाईवे समेत अन्य निर्माण कार्य के क्षेत्र में पेड़ों के कटान के अलावा खेतों में खड़े पेड़ाें का कटान होना वजह बनी हुई है।
जिले में हरियाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। पूर्व में हुए पौधरोपण की नियमित देखरेख के निर्देश दिए गए हैं। इस बार 36 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। जिसको विभाग बार आवंटन कर पौधरोपण कराया जाएगा। - भरत कुमार डीके, डीएफओ, सामाजिक वानिकी