{"_id":"5e9492ec8ebc3e76840fc8cc","slug":"eliphant-pilibhit-news-bly4025846147","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेपाली हाथियों के चिंघाड़ने से इलाके में फैली दहशत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेपाली हाथियों के चिंघाड़ने से इलाके में फैली दहशत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माधोटांडा। नेपाल की शुक्ला फंटा सेंक्चुरी से दो जंगली हाथी शारदा नदी के पार ढकिया तालुके महाराजपुर की सीमा तक पहुंच गए। हालांकि हाथियों ने तबाही तो नहीं मचाई, मगर उनके चिंघाड़ने की आवाज सुनकर गांव में दहशत फैल गई। बाद में दोनों नेपाली हाथी अंतरराष्ट्रीय सीमा पिलर नंबर 27 के रास्ते से सीमा पार निकल गए।
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के अंतर्गत शारदा नदी के पार जंगली हाथियों का आवागमन कई बार हो चुका है। कुछ दिनों से नेपाली हाथियों की वापसी क्षेत्र में नहीं हुई थी। इससे ग्रामीण काफी खुश थे। रविवार रात अचानक हाथियों की दस्तक ने ग्रामीणों की धड़कनें तेज कर दीं। शुक्ला फंटा सेंचुरी से दो नेपाली हाथी लग्गा- भग्गा क्षेत्र में होते हुए आ गए। ढकिया तालुके महाराजपुर इलाके में थारूपटटी के बाहरी क्षेत्र में होते हुए शारदा नदी के किनारे पहुंच गए। वहां कुछ खेतों में भी उनकी दस्तक हुई। हाथी गेहूं की फसलों में घूमते रहे। उनके चिंघाड़ने की आवाजें ग्रामीणों ने सुनी तो पहले की तरह दहशत का माहौल बनने लगा। गनीमत रही कि इस बार हाथियों ने उत्पात नहीं मचाया और पिलर नंबर 27 की ओर से आगे निकल गए। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों की आवाज सुनकर दहशत बनी थी। कोई नुकसान नहीं हुआ है। रात भर ग्रामीण सोए नहीं, जागते रहे। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें धड़कन बढ़ाती रहीं।
विज्ञापन
टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के अंतर्गत शारदा नदी के पार जंगली हाथियों का आवागमन कई बार हो चुका है। कुछ दिनों से नेपाली हाथियों की वापसी क्षेत्र में नहीं हुई थी। इससे ग्रामीण काफी खुश थे। रविवार रात अचानक हाथियों की दस्तक ने ग्रामीणों की धड़कनें तेज कर दीं। शुक्ला फंटा सेंचुरी से दो नेपाली हाथी लग्गा- भग्गा क्षेत्र में होते हुए आ गए। ढकिया तालुके महाराजपुर इलाके में थारूपटटी के बाहरी क्षेत्र में होते हुए शारदा नदी के किनारे पहुंच गए। वहां कुछ खेतों में भी उनकी दस्तक हुई। हाथी गेहूं की फसलों में घूमते रहे। उनके चिंघाड़ने की आवाजें ग्रामीणों ने सुनी तो पहले की तरह दहशत का माहौल बनने लगा। गनीमत रही कि इस बार हाथियों ने उत्पात नहीं मचाया और पिलर नंबर 27 की ओर से आगे निकल गए। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों की आवाज सुनकर दहशत बनी थी। कोई नुकसान नहीं हुआ है। रात भर ग्रामीण सोए नहीं, जागते रहे। हाथियों के चिंघाड़ने की आवाजें धड़कन बढ़ाती रहीं।
विज्ञापन