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डीएम ने नगरपालिका से स्ट्रीट लाइट और कूड़ेदान का एक साल का ब्योरा मांगा
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पीलीभीत। स्ट्रीट लाइट और कूड़ेदानों की खरीद के नाम पर नगरपालिका में हुए घोटाले पर डीएम संजीदा हो गए हैं। जनपद की समस्त नगरपालिका और नगर पंचायतों से एक साल में खरीदे गए कूड़ेदान और स्ट्रीट लाइटों का ब्योरा तलब किया गया है। इन उपकरणों में हुए खर्च से लेकर वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी गई है। डीएम के निर्देश के बाद नगरपालिका और नगर पंचायतों में खलबली मच गई है। नगरपालिका के नोडल अफसरों के अलावा तमाम अन्य अफसर और बाबुओं को इस घपले में खुद के फंसने का डर सताने लगा है।
जनपद में तीन नगरपालिकाएं और छह नगर पंचायतें हैं। इन निकायों ने लाखों रुपये खर्च करके शहर और कस्बों में कूड़ेदान रखवाए थे। पहले तो इनकी खरीद ही में बड़े पैमाने पर घपला किया गया। इसके बाद ये कूड़ेदान अचानक सड़कों से गायब होते चले गए। इस बारे में नगर पालिका और नगर पंचायतों में कोई जवाब देने तक की स्थिति में नहीं है। शहर में नगरपालिका की ओर से रखवाए गए 250 कूड़ेदान भी कहीं नहीं दिख रहे।
नगरपालिका में स्ट्रीट लाइट खरीद पर घोटाले की दीमक छह माह पहले ही लग गई थी। वहां सभासदों में भी इसे लेकर दो गुट बन गए थे और हंगामा भी हुआ था। स्ट्रीट लाइटों की खरीद के दौरान कार्यदायी संस्था को तय रेट से ज्यादा रकम के भुगतान की शिकायतें भी उच्चाधिकारियों तक पहुंचीं थीं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें और एलईडी बल्ब केवल कागजों में जलते मिल रहे हैं। इन दोनों मामलों को लेकर शिकायतें बढ़ने पर डीएम ने कूड़ेदान और स्ट्रीट लाइट खरीद का एक साल का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
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नगरपालिका और नगर पंचायतों में एक साल में कितनी स्ट्रीट लाइट और कूड़ेदान खरीदे गए। इसमें कितना बजट खर्च किया गया और वर्तमान में उसकी क्या स्थिति है। इसे लेकर समस्त नगरपालिका और नगर पंचायतों से जानकारी मांगी है। इसका गहनता से अध्ययन करेंगे। गड़बड़ी पकड़ी गई तो कार्रवाई भी होगी। - पुलकित खरे, डीएम
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जनपद में तीन नगरपालिकाएं और छह नगर पंचायतें हैं। इन निकायों ने लाखों रुपये खर्च करके शहर और कस्बों में कूड़ेदान रखवाए थे। पहले तो इनकी खरीद ही में बड़े पैमाने पर घपला किया गया। इसके बाद ये कूड़ेदान अचानक सड़कों से गायब होते चले गए। इस बारे में नगर पालिका और नगर पंचायतों में कोई जवाब देने तक की स्थिति में नहीं है। शहर में नगरपालिका की ओर से रखवाए गए 250 कूड़ेदान भी कहीं नहीं दिख रहे।
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नगरपालिका में स्ट्रीट लाइट खरीद पर घोटाले की दीमक छह माह पहले ही लग गई थी। वहां सभासदों में भी इसे लेकर दो गुट बन गए थे और हंगामा भी हुआ था। स्ट्रीट लाइटों की खरीद के दौरान कार्यदायी संस्था को तय रेट से ज्यादा रकम के भुगतान की शिकायतें भी उच्चाधिकारियों तक पहुंचीं थीं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें और एलईडी बल्ब केवल कागजों में जलते मिल रहे हैं। इन दोनों मामलों को लेकर शिकायतें बढ़ने पर डीएम ने कूड़ेदान और स्ट्रीट लाइट खरीद का एक साल का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
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नगरपालिका और नगर पंचायतों में एक साल में कितनी स्ट्रीट लाइट और कूड़ेदान खरीदे गए। इसमें कितना बजट खर्च किया गया और वर्तमान में उसकी क्या स्थिति है। इसे लेकर समस्त नगरपालिका और नगर पंचायतों से जानकारी मांगी है। इसका गहनता से अध्ययन करेंगे। गड़बड़ी पकड़ी गई तो कार्रवाई भी होगी। - पुलकित खरे, डीएम