जज्बे को सलाम: पैरों से अपनी तकदीर लिख रही प्रीती, बीमारी ने छीने हाथ तो लोग बोले थे- बेटी अब किसी काम की नहीं
Women's Day 2025: तीन साल की उम्र में प्रीती को दिमागी बुखार ने चपेट में ले लिया था। लंबे इलाज के बाद वह सही तो हो गई, लेकिन बीमारी ने उसके दोनों हाथ छीन लिए। इस पर रिश्तेदार भी उस पर तरस खाते थे, लेकिन प्रीती ने अपना हौसला नहीं टूटने दिया। उसने पैरों को हाथ बनाकर अपनी तकदीर लिखनी शुरू कर दी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पढ़िए प्रीती के हौसले की कहानी...
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'मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों में ही उड़ान होती है'। इन पंक्तियों को साबित किया है पीलीभीत के घुंघचाई क्षेत्र की मटेहना कॉलोनी नंबर एक की 16 वर्षीय प्रीती कुमारी ने। तीन साल की उम्र में बीमारी ने उसे दिव्यांग बना दिया। दोनों हाथों ने काम करना बंद कर दिया। तब उसने पैरों को ही हाथ बना लिया। छह साल की उम्र में ही उसने पैरों से ही लिखना और घर का काम करना शुरू कर दिया। रोजाना स्कूल जाने के साथ घर में मां का घरेलू कामों में हाथ प्रीती बंटा रही है। प्रीती इस बार हाईस्कूल की परीक्षा दे रही है। वह लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है। प्रीती का शिक्षिका बनने का सपना है।
मटेहना कॉलोनी नंबर एक निवासी अशोक कुमार पेशे से किसान हैं। जमीन कम है, इसके चलते मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। उनके तीन पुत्रियों और एक पुत्र में प्रीती कुमारी सबसे बड़ी है। तीन साल की उम्र में प्रीती को दिमागी बुखार ने चपेट में ले लिया था। प्रीती की मां विंद्रा देवी बताती हैं कि बेटी को इलाज के लिए गांव के अलावा पूरनपुर, पीलीभीत और अन्य शहरों में भी ले गए। मगर बीमारी में उसके दोनों हाथ दिव्यांग हो गए। शुरुआत में तो बोल भी नहीं पाती थी। रिश्तेदारों, करीबियों से रुपये उधार लेकर प्रीती का इलाज कराया। लाखों रुपये खर्च हुए।
मां ने बढ़ाया हौसला
चिकित्सकों ने बताया कि प्रीती अब ठीक नहीं हो सकती। इलाज के बाद बेटी जब घर आई तब पड़ोसी और रिश्तेदार कहने लगे कि बेटी अब किसी काम की नहीं रही। जिंदगीभर प्रीती को अब दूसरों के सहारे रहना पड़ेगा। मगर सभी तब हैरान रह गए। जब छह साल की उम्र में उसने पैरों से घर का काम में हाथ बंटाने के साथ पेंसिल-पेन पकड़कर लिखना शुरू किया। उसकी मां ने उसका हौसला बढ़ाया। प्रीती घुंघचाई क्षेत्र के एक स्कूल की छात्रा है। वह सनातन धर्म इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र में हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा दे रही है।
पढ़ाई के अलावा प्रीती घर में पैर से झाडू लगाना, हैंडपंप से पानी निकालना, बर्तन धोना आदि काम भी पैरों से करती है। प्रीती लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। प्रीती का सपना भविष्य में शिक्षिक बनने का है। इसके लिए पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई कर रही है ताकि बच्चों का मार्ग दर्शक बनकर उनको कठिन परिस्थतियों में भी सफल बनाने का मंत्र दे सके। प्रीती की मां विंद्रा देवी ने भावुक होकर बताया कि बेटी जो करना चाहेगी उसे करवाऊंगी।
शुरुआत में शिक्षक बोले- कैसे लिखेगी प्रीती
विंद्रा देवी ने बताया कि पैर से घर के काम में हाथ बंटाने के साथ बच्चों को पढ़ता देख प्रीती ने भी पढ़ने की जिद की। शुरू में तो उसे उसकी दिव्यांगता को लेकर समझाया। मगर नहीं मानी तब गांव के परिषदीय स्कूल में छह साल की उम्र पर जब उसका दाखिला करने पहुंचे। तब मास्टर साहब बोले यह कैसे लिखेगी। इसे घर ले जाओ। बमुश्किल उसका कक्षा एक में दाखिला कराया। प्रीती में पहले से ही पढ़ने की ललक थी। उसने पैर से लिखना शुरू कर दिया।
कक्षा पांच पास करने के बाद कॉलोनी नंबर दो में जब उसका दाखिला कराने रिजल्ट और टीसी लेकर पहुंची। तब इस स्कूल में भी शिक्षक शुरू में उसका दाखिला करने को राजी नहीं थे। प्रीती ने कड़ी मेहनत कर कक्षा आठ की परीक्षा पास कर ली। इसके बाद उसका निजी स्कूल में दाखिला कराया। इस बार वह हाईस्कूल की परीक्षा दे रही है। अब तक हुए पेपरों से संतुष्ट प्रीती हाईस्कूल में अच्छे नंबरों से पास होने की उम्मीद जता रही है।