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Pilibhit News: नर्स के शव के अंतिम संस्कार को लेकर दो पक्षों में विवाद
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पीलीभीत। निर्देशक महेश भट्ट की 1998 में आई चर्चित फिल्म जख्म हिंदू युवक के साथ विवाह करने वाली एक मुस्लिम महिला के अंतिम संस्कार के विवाद को केंद्र में रखकर बनाई गई थी। इसके जैसा दृश्य बुधवार को न्यूरिया कस्बे में सामने आ गया।
मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने वाली हिंदू नर्स की मौत के बाद यहां उसके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। मुस्लिम पक्ष उसे दफनाना चाहता था जबकि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता उसका दाह संस्कार करना चाहते थे। हिंदू संगठन ने शव को थाने के गेट पर रखकर प्रदर्शन किया। बाद में दोनों पक्षों में सहमति कराकर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव हिंदू संगठन को सौंप दिया। उन्होंने उसका दाह संस्कार कर दिया।
न्यूरिया कस्बे के मोहल्ला यार खां की रहने वाली सुशीला देवी (68) नर्स थीं। करीब 25 साल पहले पति देवकी नंदन की मौत हो गई तो वे निकट के कस्बे खटीमा में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने लगीं। उनके बेटे विजय की मौत भी काफी पहले हो गई थी। इसके बाद सुशीला ने एक बच्चे को गोद ले लिया। उसकी उम्र अब 12 साल है। आरोप है कि गैर समुदाय के उस व्यक्ति ने इस बच्चे का धर्म परिवर्तन करा दिया। मंगलवार को सुशीला देवी की मौत हो गई। इसके बाद मुस्लिम व्यक्ति का पुत्र सुशीला के शव को न्यूरिया स्थित उनके घर ले आया और दफनाने की तैयारी करने लगा। इसकी जानकारी हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह को लगी। वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीलीभीत से न्यूरिया पहुंच गए और सुशीला के शव को घर से लाकर थाने के गेट पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सुशीला हिंदू हैं इसलिए उनका दाह संस्कार किया जाएगा।
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हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उनके दत्तक पुत्र का धर्म परिवर्तन कराने पर भी नाराजगी जताई। लगभग ढाई घंटे तक दोनों पक्षों में जमकर हंगामा होता रहा। इसके बाद आपसी सहमति पर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को पीलीभीत भेज दिया और शव हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को सौंप दिया। हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि सुशीला का हिंदू रीति रिवाज से दाह संस्कार कर दिया गया है।
सुशीला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों पक्षों की सहमति के बाद उनका अंतिम संस्कार हिंदू संगठन ने किया है। थाने पर किसी तरह का हंगामा नहीं हुआ। - डॉ प्रतीक दहिया, सीओ सदर
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मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने वाली हिंदू नर्स की मौत के बाद यहां उसके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। मुस्लिम पक्ष उसे दफनाना चाहता था जबकि हिंदू संगठन के कार्यकर्ता उसका दाह संस्कार करना चाहते थे। हिंदू संगठन ने शव को थाने के गेट पर रखकर प्रदर्शन किया। बाद में दोनों पक्षों में सहमति कराकर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव हिंदू संगठन को सौंप दिया। उन्होंने उसका दाह संस्कार कर दिया।
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न्यूरिया कस्बे के मोहल्ला यार खां की रहने वाली सुशीला देवी (68) नर्स थीं। करीब 25 साल पहले पति देवकी नंदन की मौत हो गई तो वे निकट के कस्बे खटीमा में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ रहने लगीं। उनके बेटे विजय की मौत भी काफी पहले हो गई थी। इसके बाद सुशीला ने एक बच्चे को गोद ले लिया। उसकी उम्र अब 12 साल है। आरोप है कि गैर समुदाय के उस व्यक्ति ने इस बच्चे का धर्म परिवर्तन करा दिया। मंगलवार को सुशीला देवी की मौत हो गई। इसके बाद मुस्लिम व्यक्ति का पुत्र सुशीला के शव को न्यूरिया स्थित उनके घर ले आया और दफनाने की तैयारी करने लगा। इसकी जानकारी हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह को लगी। वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ पीलीभीत से न्यूरिया पहुंच गए और सुशीला के शव को घर से लाकर थाने के गेट पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सुशीला हिंदू हैं इसलिए उनका दाह संस्कार किया जाएगा।
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हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उनके दत्तक पुत्र का धर्म परिवर्तन कराने पर भी नाराजगी जताई। लगभग ढाई घंटे तक दोनों पक्षों में जमकर हंगामा होता रहा। इसके बाद आपसी सहमति पर पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को पीलीभीत भेज दिया और शव हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को सौंप दिया। हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह ने बताया कि सुशीला का हिंदू रीति रिवाज से दाह संस्कार कर दिया गया है।
सुशीला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। दोनों पक्षों की सहमति के बाद उनका अंतिम संस्कार हिंदू संगठन ने किया है। थाने पर किसी तरह का हंगामा नहीं हुआ। - डॉ प्रतीक दहिया, सीओ सदर

शिवा गुप्ता फाइल फोटो ।

शिवा गुप्ता फाइल फोटो ।

शिवा गुप्ता फाइल फोटो ।

शिवा गुप्ता फाइल फोटो ।

शिवा गुप्ता फाइल फोटो ।