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डिप्टी आरएमओ सात दिन में किसानों का पंजीकरण कराकर धान खरीद बढ़ाएं, वरना प्रतिकूल प्रविष्टि
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पीलीभीत। धान खरीद में किसानों का शासन से निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष पंजीकरण न होने पर जिलाधिकारी ने सख्त नाराजगी जताई है। डीएम ने डिप्टी आरएमओ को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। इस दौरान विशेष अभियान चलाकर किसानों का पंजीकरण नहीं होने पर उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि देने की चेतावनी दी गई है।
एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद में 50 हजार किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित था। मगर, माफिया, बिचौलिये और दलालों की सांठगांठ से अब तक जानबूझकर लक्ष्य के अनुरूप किसानों का पंजीकरण नहीं किया गया। किसानों का कम पंजीकरण कराने के पीछे मकसद यह है कि जब क्रय केंद्रों पर धान की खरीद लक्ष्य से कम होगी तो उसे राइस मिलर्स, माफिया और दलालों से धान लेकर पूरा किया जाएगा। धान खरीद से जुड़े अधिकारी इस खेल में पूरी तरह शामिल हैं। धान खरीद से जुड़े एक अफसर को जिले में लगभग चार साल पूरे हो चुके हैं। उनकी देखरेख में ही हर साल यही खेल चलता है। बीते तीन साल में भी दलाल, बिचौलियों से ही धान की खरीदकर लक्ष्य पूरा किया गया था। उसी मकसद को पूरा करने के लिए प्रशासन के तमाम दबावों के बाद भी अब तक 30569 किसानों का ही पंजीकरण कराया गया। इसीलिए सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की पर्याप्त तौल नहीं हो पा रही है। यहां तक कि मानक वाला धान भी पंजीकरण न होने के चलते नहीं तुल पा रहा। इसका फायदा राइस मिलर्स को मिल रहा है। किसान वहां 900 से 1000 या 1200 रुपये क्विंटल धान बेचने को मजबूर है। डीएम पुलकित खरे ने अब इस पर भी अपना रुख सख्त कर लिया है। डीएम ने डिप्टी आरएमओ को सात दिन में अभियान चलाकर लक्ष्य के सापेक्ष किसानों का पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया है। लक्ष्य पूरा न होने पर उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। मंडी सचिव और क्षेत्रीय विपणन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई। मंडी में अगर धान उपलब्ध है और दैनिक लक्ष्य की पूर्ति नहीं हुई है तो उन केंद्रों को तब तक चलाए रखा जाएगा, जब तक पूरे धान की तौल नहीं हो जाती।
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एक अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद में 50 हजार किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित था। मगर, माफिया, बिचौलिये और दलालों की सांठगांठ से अब तक जानबूझकर लक्ष्य के अनुरूप किसानों का पंजीकरण नहीं किया गया। किसानों का कम पंजीकरण कराने के पीछे मकसद यह है कि जब क्रय केंद्रों पर धान की खरीद लक्ष्य से कम होगी तो उसे राइस मिलर्स, माफिया और दलालों से धान लेकर पूरा किया जाएगा। धान खरीद से जुड़े अधिकारी इस खेल में पूरी तरह शामिल हैं। धान खरीद से जुड़े एक अफसर को जिले में लगभग चार साल पूरे हो चुके हैं। उनकी देखरेख में ही हर साल यही खेल चलता है। बीते तीन साल में भी दलाल, बिचौलियों से ही धान की खरीदकर लक्ष्य पूरा किया गया था। उसी मकसद को पूरा करने के लिए प्रशासन के तमाम दबावों के बाद भी अब तक 30569 किसानों का ही पंजीकरण कराया गया। इसीलिए सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की पर्याप्त तौल नहीं हो पा रही है। यहां तक कि मानक वाला धान भी पंजीकरण न होने के चलते नहीं तुल पा रहा। इसका फायदा राइस मिलर्स को मिल रहा है। किसान वहां 900 से 1000 या 1200 रुपये क्विंटल धान बेचने को मजबूर है। डीएम पुलकित खरे ने अब इस पर भी अपना रुख सख्त कर लिया है। डीएम ने डिप्टी आरएमओ को सात दिन में अभियान चलाकर लक्ष्य के सापेक्ष किसानों का पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया है। लक्ष्य पूरा न होने पर उन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। मंडी सचिव और क्षेत्रीय विपणन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की गई। मंडी में अगर धान उपलब्ध है और दैनिक लक्ष्य की पूर्ति नहीं हुई है तो उन केंद्रों को तब तक चलाए रखा जाएगा, जब तक पूरे धान की तौल नहीं हो जाती।
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