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उम्मीद की मशालः 75 युवाओं को दो वर्ष से निशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग दे रहे हैँ देवेंद्र
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ड्रमंड कॉलेज के मैदान में युवाओं को ट्रेनिंग देते देवेंद्र कुमार मौर्य। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षक रहे देवेंद्र कुमार मौर्य अब उन 75 युवाओं के लिए आईकॉन बनते जा रहे हैं, जिन्हें वे पिछले दो वर्ष से निशुल्क कोचिंग के साथ फिजिकल ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। सामान्य सी एक घटना वर्ष 2019 में हुई थी, जब माधोटांडा रोड स्थित अपने प्रतिष्ठान के बाहर देवेंद्र मौर्य सुबह-सुबह वर्कआउट कर पसीना बहा रहे थे। तब क्रिकेट के खिलाड़ी सनी गावस्कर ने फिजिकल ट्रेनिंग के बारे में बातचीत की।
देेवेंद्र ने उन्हें ट्रेनिंग कराई। यहीं से देवेंद्र कुमार मौर्य ने निशुल्क ट्रेनिंग देने का सफर शुरू किया। सनी के बाद अमित कुमार और विक्रांत सिंह ट्रेनिंग लेने पहुंचने लगे। पहले तो प्रतिष्ठान के बाहर खाली जगह पर ट्रेनिंग दिलाई। धीरे-धीरे दस से पंद्रह युवा जुट गए तो सभी मिलकर ड्रमंड कॉलेज के मैदान में पहुंचे। मैदान की झाड़ियां हटाईं। श्रमदान किया और युवाओं की तैयारी सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस के लिए शुरू करा दी। उत्साह तब बढ़ा जब इन युवाओं में 2021 में आशीष और अनिकेत सीआरपीएफ की भर्ती के लिए फिजिकल पास कर गए।
इसके बाद संजीव गंगवार हरियाणा पुलिस के लिए चयनित हुए। ममता गंगवार ने बीएसएफ की परीक्षा पास कर ली। कपिल वर्मा, तुषार भारती, यूपी पुलिस में उप निरीक्षक पद के लिए चयनित हुए। इन युवाओं को देखकर कारवां आगे बढ़ता गया। अब 75 युवा ट्रेनिंग पा रहे हैं। साथ ही ग्रुप डिस्कशन कराया जाता है और परीक्षा ली जाती है। इससे युवाओं की प्रतिभा निखर रही है। देवेंद्र मौर्य के साथ उनके दोस्त रोहित गुप्ता ने निशुल्क कोचिंग दी। जिलाधिकारी कार्यालय में स्टेनो रहे धर्मेंद्र कुमार युवाओं को नौकरी के फार्म भरवाने के साथ कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में योगदान देते हैं। देवेंद्र कुमार मौर्य हर रोज एक घंटे फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। उनके दोस्त इंद्रपाल पाल माथुर नौकरी की तैयारी के लिए निशुल्क गाइडेंस दे रहे हैं। इससे युवा उत्साहित हैं। उम्मीद के नए रास्ते तलाश रहे हैं।
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युवाओं को कामयाब बनाने का सपना
वर्ष 2015 में ग्रेटर नोएडा से इंजींनियर की नौकरी छूटी तो देवेंद्र मौर्य अपने शहर पीलीभीत आ गए थे। पांच वर्ष तक बरेली के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाया जब लॉक डाउन में नौकरी छूटी तो खुद का छोटा सा व्यापार शुरू किया। रिजार्ट की नींव रखी जो अब पूर्ण होने की ओर है। देवेंद्र मौर्य का कहना है कि बिजनेस के साथ युवाओं को कामयाब बनाना उनका सपना है।
अगर देवेंद्र मौर्या मुझे फिजिकल की ट्रेनिंग नहीं दिलाते तो मैं उप निरीक्षक पद के लिए फिजिकल की ट्रेनिंग पास नहीं कर पाता। -तुषार भारती
मैं तो दौड़ नहीं पाता था। लेकिन मुझे इस तरह से प्रेरित किया कि मैं अर्धसैनिक बल के लिए चयनित हो गया। मेरा मेडिकल होना है। मेडिकल के बाद ज्वाइनिंग मिलेगी। -पलविंदर सिंह
मैंने खेलना छोड़ दिया था लेकिन जब मैं देवेंद्र मौर्य के संपर्क में तो आगे बढ़ा और अब अर्धसैनिक बल के लिए चयनित हो गया। -डिंपल वर्मा
अर्धसैनिक बल के लिए 1600 मीटर की रेस में 69 लड़कियां थीं। मैं दूसरे स्थान पर रही। अगर मुझे निशुल्क ट्रेनिंग न मिली होती तो मैं इस रेस में सेकेंड नहीं आ पाती। -ममता गंगवार
खिलाड़ी होने के नाते मुझे गुरुनानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज लुधियाना में दाखिला मिला। बीटेक 2011 में पूर्ण हो गया। नोएडा में निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर नौकरी की। वहां से लौटकर राजकीय पॉलिटेक्निक पीलीभीत में दो सत्र पढ़ाया। पांच वर्ष निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग पढ़ाई। पिता रामकुमार मौर्य राष्ट्रीय स्तर पावर लिफ्टर रहे। इस समय राष्ट्रीय स्तर के रेफरी हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षकों तथा वरिष्ठ खिलाड़ियों ने मुझे युवाओं के लिए काम करने की प्रेरणा दी है। अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा हूं। -देवेंद्र कुमार मौर्य
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देेवेंद्र ने उन्हें ट्रेनिंग कराई। यहीं से देवेंद्र कुमार मौर्य ने निशुल्क ट्रेनिंग देने का सफर शुरू किया। सनी के बाद अमित कुमार और विक्रांत सिंह ट्रेनिंग लेने पहुंचने लगे। पहले तो प्रतिष्ठान के बाहर खाली जगह पर ट्रेनिंग दिलाई। धीरे-धीरे दस से पंद्रह युवा जुट गए तो सभी मिलकर ड्रमंड कॉलेज के मैदान में पहुंचे। मैदान की झाड़ियां हटाईं। श्रमदान किया और युवाओं की तैयारी सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस के लिए शुरू करा दी। उत्साह तब बढ़ा जब इन युवाओं में 2021 में आशीष और अनिकेत सीआरपीएफ की भर्ती के लिए फिजिकल पास कर गए।
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इसके बाद संजीव गंगवार हरियाणा पुलिस के लिए चयनित हुए। ममता गंगवार ने बीएसएफ की परीक्षा पास कर ली। कपिल वर्मा, तुषार भारती, यूपी पुलिस में उप निरीक्षक पद के लिए चयनित हुए। इन युवाओं को देखकर कारवां आगे बढ़ता गया। अब 75 युवा ट्रेनिंग पा रहे हैं। साथ ही ग्रुप डिस्कशन कराया जाता है और परीक्षा ली जाती है। इससे युवाओं की प्रतिभा निखर रही है। देवेंद्र मौर्य के साथ उनके दोस्त रोहित गुप्ता ने निशुल्क कोचिंग दी। जिलाधिकारी कार्यालय में स्टेनो रहे धर्मेंद्र कुमार युवाओं को नौकरी के फार्म भरवाने के साथ कागजी प्रक्रिया पूरी कराने में योगदान देते हैं। देवेंद्र कुमार मौर्य हर रोज एक घंटे फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। उनके दोस्त इंद्रपाल पाल माथुर नौकरी की तैयारी के लिए निशुल्क गाइडेंस दे रहे हैं। इससे युवा उत्साहित हैं। उम्मीद के नए रास्ते तलाश रहे हैं।
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युवाओं को कामयाब बनाने का सपना
वर्ष 2015 में ग्रेटर नोएडा से इंजींनियर की नौकरी छूटी तो देवेंद्र मौर्य अपने शहर पीलीभीत आ गए थे। पांच वर्ष तक बरेली के निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाया जब लॉक डाउन में नौकरी छूटी तो खुद का छोटा सा व्यापार शुरू किया। रिजार्ट की नींव रखी जो अब पूर्ण होने की ओर है। देवेंद्र मौर्य का कहना है कि बिजनेस के साथ युवाओं को कामयाब बनाना उनका सपना है।
अगर देवेंद्र मौर्या मुझे फिजिकल की ट्रेनिंग नहीं दिलाते तो मैं उप निरीक्षक पद के लिए फिजिकल की ट्रेनिंग पास नहीं कर पाता। -तुषार भारती
मैं तो दौड़ नहीं पाता था। लेकिन मुझे इस तरह से प्रेरित किया कि मैं अर्धसैनिक बल के लिए चयनित हो गया। मेरा मेडिकल होना है। मेडिकल के बाद ज्वाइनिंग मिलेगी। -पलविंदर सिंह
मैंने खेलना छोड़ दिया था लेकिन जब मैं देवेंद्र मौर्य के संपर्क में तो आगे बढ़ा और अब अर्धसैनिक बल के लिए चयनित हो गया। -डिंपल वर्मा
अर्धसैनिक बल के लिए 1600 मीटर की रेस में 69 लड़कियां थीं। मैं दूसरे स्थान पर रही। अगर मुझे निशुल्क ट्रेनिंग न मिली होती तो मैं इस रेस में सेकेंड नहीं आ पाती। -ममता गंगवार
खिलाड़ी होने के नाते मुझे गुरुनानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज लुधियाना में दाखिला मिला। बीटेक 2011 में पूर्ण हो गया। नोएडा में निजी कंपनी में इंजीनियर के पद पर नौकरी की। वहां से लौटकर राजकीय पॉलिटेक्निक पीलीभीत में दो सत्र पढ़ाया। पांच वर्ष निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग पढ़ाई। पिता रामकुमार मौर्य राष्ट्रीय स्तर पावर लिफ्टर रहे। इस समय राष्ट्रीय स्तर के रेफरी हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षकों तथा वरिष्ठ खिलाड़ियों ने मुझे युवाओं के लिए काम करने की प्रेरणा दी है। अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा हूं। -देवेंद्र कुमार मौर्य