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Pilibhit News: प्रतिबंध के बावजूद शारदा डैम से पकड़ी जा रहीं मछलियां
Sat, 15 Jul 2023 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Sat, 15 Jul 2023 11:32 PM IST
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कलीनगर। शारदा सागर डैम में प्रजनन काल के चलते प्रतिबंध के बावजूद मछलियों का धड़ल्ले से शिकार किया जा रहा है। इससे मछलियों की कई प्रजातियां खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। पाबंदी के बाद भी शिकार होने पर मत्स्य विभाग और टाइगर रिजर्व के जिम्मेदार कोई सख्ती नहीं कर रहे हैं। छोटी नावों से डैैम से मछलियां पकड़ी जा रही हैं।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में वैसे तो मछली पकड़ने ठेका होता है, लेकिन तीन वर्षों से मत्स्य निगम ने ठेका नहीं किया। ठेका न होने के पीछे कुछ कानूनी अड़चनें बताई गईं। पिछले साल ठेका किया भी गया लेकिन ठेकेदार नीलामी की रकम जमा नहीं कर सका। उसकी जमानत धनराशि जब्त हो गई। नीलामी न होने से तलहटी के शिकारियों ने मत्स्य और वन विभाग के साथ ही पुलिस से सांठगांठ कर डैम से मछलियां पकड़नी शुरू कर दीं।
डैम से मछली पकड़ने पर 30 जून से 15 सितंबर तक प्रजनन काल के चलते प्रतिबंध रहता है, लेकिन संरक्षण के चलते शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। आम दिनों के अलावा वे प्रजनन काल में भी मछलियां पकड़ रहे हैं। छोटी नावों से मछलियां पकड़ कर तलहटी के गावों के अलावा कलीनगर के व्यापारियों को बेची जा रही हैं। व्यापारी पीलीभीत और खटीमा की मंडियों में मछली बेच रहे हैं।
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हालांकि अब मत्स्य निगम ने डैम में मछली पकड़ने का ठेका कर दिया है, लेकिन प्रजनन काल के चलते ठेकेदार को मछली पकड़ने की अनुमति 16 सितंबर से दी जाएगी। बराही रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि क्षेत्रीय टीम को सख्ती बरतने के निर्देश दिए जाएंगे।
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रोहू, टैगन समेत कई प्रजातियां मौजूद, 50 किलो तक होता है एक मछली का वजन
शारदा डैम में रोहू, टैगन, लाची, सुईया, खजरा, मांगुर, सौल समेत दो दर्जन प्रजातियां पाई जाती हैं। खास बात यह है कि डैम की लंबाई और चौड़ाई अधिक होने से करीब 50 किलो तक की मछली होती हैं। इसमें सुईया मछली एक स्थान पर करीब एक क्विंटल मात्रा में मौजूद रहती हैं।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम में वैसे तो मछली पकड़ने ठेका होता है, लेकिन तीन वर्षों से मत्स्य निगम ने ठेका नहीं किया। ठेका न होने के पीछे कुछ कानूनी अड़चनें बताई गईं। पिछले साल ठेका किया भी गया लेकिन ठेकेदार नीलामी की रकम जमा नहीं कर सका। उसकी जमानत धनराशि जब्त हो गई। नीलामी न होने से तलहटी के शिकारियों ने मत्स्य और वन विभाग के साथ ही पुलिस से सांठगांठ कर डैम से मछलियां पकड़नी शुरू कर दीं।
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डैम से मछली पकड़ने पर 30 जून से 15 सितंबर तक प्रजनन काल के चलते प्रतिबंध रहता है, लेकिन संरक्षण के चलते शिकारियों के हौसले बुलंद हैं। आम दिनों के अलावा वे प्रजनन काल में भी मछलियां पकड़ रहे हैं। छोटी नावों से मछलियां पकड़ कर तलहटी के गावों के अलावा कलीनगर के व्यापारियों को बेची जा रही हैं। व्यापारी पीलीभीत और खटीमा की मंडियों में मछली बेच रहे हैं।
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हालांकि अब मत्स्य निगम ने डैम में मछली पकड़ने का ठेका कर दिया है, लेकिन प्रजनन काल के चलते ठेकेदार को मछली पकड़ने की अनुमति 16 सितंबर से दी जाएगी। बराही रेंजर अरुण मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि क्षेत्रीय टीम को सख्ती बरतने के निर्देश दिए जाएंगे।
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रोहू, टैगन समेत कई प्रजातियां मौजूद, 50 किलो तक होता है एक मछली का वजन
शारदा डैम में रोहू, टैगन, लाची, सुईया, खजरा, मांगुर, सौल समेत दो दर्जन प्रजातियां पाई जाती हैं। खास बात यह है कि डैम की लंबाई और चौड़ाई अधिक होने से करीब 50 किलो तक की मछली होती हैं। इसमें सुईया मछली एक स्थान पर करीब एक क्विंटल मात्रा में मौजूद रहती हैं।