सिर पर मंडरा रही मौत, खतरे में आधी आबादी के लोग
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शहर की आधी आबादी पर खतरा मंडरा रहा है। वजह आबादी के बीच एलटी लाइन के झूलते तार हैं। यह तार लोगों की मकानों और छतों पर रेलिंग को छूकर गुजर रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी तारों को ऊंचा करने और उन पर सेफ्टी कवर चढ़ाने की ओर ध्यान नहीं देते। तार पर यदि सेफ्टी कवर होता तो शायद मासूम पाश्वी की जान न जाती। शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था जर्जर तारों पर आज भी चल रही है। किसी भी मोहल्ले की गलियों से गुजरी एलटी लाइन के तार ढीले और काफी नीचे तक लटकते देखे जा सकते हैं। हाल यह है कि तार किसी के दीवार को तो किसी के मकान की छत को छूते हुए निकल रहे हैं। मामूली बरसात में भी लोगों के घरों पर करंट उतर आता है। शिकायत के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं देते।
डेढ़ महीने पहले होते बचा था बड़ा हादसा
करीब डेढ़ महीने पहले मोहल्ला मोहम्मद वासिल निवासी पप्पू ट्रॉली वाले के मकान के पास झूलते तार दीवार से टकरा गए थे। इससे पूरे मकान में करंट दौड़ गया था। टीवी, फ्रिज, पंखे और वायरिंग फुंक गई थी। गनीमत यह रही कि परिवार वाले कमरे के अंदर प्लास्टिक की कॉरपेट पर बैठे थे। इससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया था।
समय सीमा पूरी, फिर भी बंच कंडक्टर का काम अधूरा
बिजली चोरी रोकने और जर्जर लाइनों को बदलने के लिए शहर में 150 किलोमीटर बंच कंडक्टर पड़ना था। 2013 वर्ष में शुरू हुए काम में अब तक महज 60 किलोमीटर ही बंच कंडक्टर डाला जा सका है। यह काम 31 मई 15 तक पूरा होना था। विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के कारण लाइन बिछाने का काम काफी धीमी गति से हो रहा है। इससे तमाम मोहल्लों में बंच कंडक्टर नहीं पड़ सका है। अधिशासी अभियांता लोकेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि कार्यदायी संस्था जरूरत के मुताबिक सामान की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। इससे कार्य प्रभावित हो रहा है। इसके लिए अधिकारियों को पत्र प्रेषित किया जा चुका है।