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जानवरों को नहलाते वक्त नहर में बहे बालक का शव मिला
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परेवा वैश्य। जानवरों को नहलाने गए 14 साल के बालक का शव दूसरे दिन नहर से बरामद कर लिया गया। बालक एक दिन पहले नहर में डूब गया था। शनिवार सुबह छह बजे नहर से सौ मीटर दूरी पर एक गड्ढ़े से बालक का शव बरामद किया गया। शव देखते ही उसके परिवार में कोहराम मच गया।
जहानाबाद थाना क्षेत्र के परेवा वैश्य गांव निवासी आलम का बेटा फरहान शुक्रवार शाम जानवरों को नहलाने के लिए अमरिया डीवी फीडर नहर पर गया था। जानवर नहर में नहा रहे थे। तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नहर में जा गिरा। सूचना मिलने पर पहुंचे परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से नहर में उसकी तलाश की। जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौकेे पर पहुुंच गई। गोताखोरों को बुलाकर उन्हें भी बालक की तलाश में जुटाया गया। शुक्रवार रात 11 बजे तक नहर में बच्चे की तलाश चलती रही। मगर, देर रात तक कुछ पता नहीं लग सका तो गोताखोर वापस चले गए। परिवार के लोग गांव वालों की मदद से नहर में बालक को तलाशने जुटे रहे। शनिवार सुबह छह बजे सौ मीटर दूरी पर एक गड्ढ़े में बालक का शव फंसा मिला। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। मृतक बालक मदरसे में कक्षा पांच का छात्र था। चार भाइयों में वह तीसरे नंबर का था। इंस्पेक्टर हरीशवर्धन ने बताया कि बालक का शव परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया। मासूम की मौत से गांव वालों की आंखें भी नम थीं।
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जहानाबाद थाना क्षेत्र के परेवा वैश्य गांव निवासी आलम का बेटा फरहान शुक्रवार शाम जानवरों को नहलाने के लिए अमरिया डीवी फीडर नहर पर गया था। जानवर नहर में नहा रहे थे। तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह नहर में जा गिरा। सूचना मिलने पर पहुंचे परिवार वालों ने ग्रामीणों की मदद से नहर में उसकी तलाश की। जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौकेे पर पहुुंच गई। गोताखोरों को बुलाकर उन्हें भी बालक की तलाश में जुटाया गया। शुक्रवार रात 11 बजे तक नहर में बच्चे की तलाश चलती रही। मगर, देर रात तक कुछ पता नहीं लग सका तो गोताखोर वापस चले गए। परिवार के लोग गांव वालों की मदद से नहर में बालक को तलाशने जुटे रहे। शनिवार सुबह छह बजे सौ मीटर दूरी पर एक गड्ढ़े में बालक का शव फंसा मिला। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। मृतक बालक मदरसे में कक्षा पांच का छात्र था। चार भाइयों में वह तीसरे नंबर का था। इंस्पेक्टर हरीशवर्धन ने बताया कि बालक का शव परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया। मासूम की मौत से गांव वालों की आंखें भी नम थीं।
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