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खेल के मैदान से बुलंदी के शिखर तक पहुंचने का है सपना
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महिला खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त करते अतिथि। फाइल फोटो
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं। वह खेल के मैदान में भी कामयाबी की इबारत लिख रहीं हैं। गांधी स्टेडियम में प्रदेश स्तरीय वॉलीबॉल कैंप का हिस्सा बनीं प्रदेश भर की 17 खिलाड़ियों का एक ही सपना है कि उनको इंडिया टीम से खेेलने का मौका मिले। बेटियां इंटरनेशनल स्तर पर खेलकर देश के लिए पदक जीतना चाहती हैं।
कैंप में शामिल लगभग सभी खिलाड़ी नेशनल स्तर की प्रतियोगिता खेले हुए हैं। उनमें खेल के प्रति उत्साह भी दिखा और व्यवस्थाओं को लेकर थोड़ी मायूसी भी। उनका कहना है कि छोटे कस्बों और गांवों से बेहतरीन खिलाड़ी निकल सकते हैं, लेकिन उनको आगे आने का मौका नहीं मिल पाता। अधिकतर जगह स्टेडियम नहीं, जहां हैं वहां कोच नहीं। स्कूलों में भी खेलों का माहौल नहीं मिल पाता।
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गर्ल्स खिलाड़ियों को नौकरी की भी है चिंता
एक तरफ खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेलने का सपना है तो दूसरी तरफ उनको नौकरी की भी चिंता है। अधिकतर खिलाड़ियों का कहना है कि जो खिलाड़ी नेेशनल स्तर पर खेले उसके लिए जॉब की सिक्योरिटी होनी चाहिए। तमाम विभागों में स्पोर्ट्स कोटे से नियुक्ति बंद कर दी गई। जहां पद हैं वहां लंबे अरसे से भर्ती नहीं हुई।
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2016 से स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ में हूं। अंडर-17, 18 नेशनल खेल चुकी हूं। मेरा सपना इंडियन टीम का हिस्सा बनना है। उसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। उम्मीद है इस बार नेशनल टीम का हिस्सा बनने का मौका मिल जाएगा।
- काजल, लखनऊ
2013 से वॉलीबॉल खेल रहीं हूं। गोरखपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल में हूं। 2013 से 2019 तक लगातार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेला है। एक ही सपना है इंडिया टीम में शामिल होना। कोविड के कारण दो साल प्रतियोगिता नहीं हो सकीं। उसका नुकसान तो हुआ है।
- नंदिनी यादव, गोरखपुर
2013 से वॉलीबॉल खेल रही हूं। प्रयागराज स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हूं। 2013 से 2019 तक लगातार राष्ट्रीय स्तर पर खेला है। इंडिया टीम में हिस्सा बनना चाहती हूं। उसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहीं हूं। - रितिका यादव, प्रयागराज
बीएचयू में पढ़ाई कर रहीं हूं। 12 नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। दो बार पदक जीते। मेरा सपना खेल के मैदान से तरक्की का शिखर चूमना है। - उपासना यादव, वाराणसी
2013 में जम्मू में हुई नेेशनल प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला था। इसके बाद कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं भाग लिया। इंडिया टीम से खेलना चाहती हूं उसी के लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। स्पोर्ट्स ऑफिसर बनने का सपना है ताकि लड़कियों को खेल में बढ़ावा मिल सके। - तनु मिश्रा, बनारस
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कैंप में शामिल लगभग सभी खिलाड़ी नेशनल स्तर की प्रतियोगिता खेले हुए हैं। उनमें खेल के प्रति उत्साह भी दिखा और व्यवस्थाओं को लेकर थोड़ी मायूसी भी। उनका कहना है कि छोटे कस्बों और गांवों से बेहतरीन खिलाड़ी निकल सकते हैं, लेकिन उनको आगे आने का मौका नहीं मिल पाता। अधिकतर जगह स्टेडियम नहीं, जहां हैं वहां कोच नहीं। स्कूलों में भी खेलों का माहौल नहीं मिल पाता।
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गर्ल्स खिलाड़ियों को नौकरी की भी है चिंता
एक तरफ खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेलने का सपना है तो दूसरी तरफ उनको नौकरी की भी चिंता है। अधिकतर खिलाड़ियों का कहना है कि जो खिलाड़ी नेेशनल स्तर पर खेले उसके लिए जॉब की सिक्योरिटी होनी चाहिए। तमाम विभागों में स्पोर्ट्स कोटे से नियुक्ति बंद कर दी गई। जहां पद हैं वहां लंबे अरसे से भर्ती नहीं हुई।
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2016 से स्पोर्ट्स हॉस्टल लखनऊ में हूं। अंडर-17, 18 नेशनल खेल चुकी हूं। मेरा सपना इंडियन टीम का हिस्सा बनना है। उसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। उम्मीद है इस बार नेशनल टीम का हिस्सा बनने का मौका मिल जाएगा।
- काजल, लखनऊ
2013 से वॉलीबॉल खेल रहीं हूं। गोरखपुर स्पोर्ट्स हॉस्टल में हूं। 2013 से 2019 तक लगातार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खेला है। एक ही सपना है इंडिया टीम में शामिल होना। कोविड के कारण दो साल प्रतियोगिता नहीं हो सकीं। उसका नुकसान तो हुआ है।
- नंदिनी यादव, गोरखपुर
2013 से वॉलीबॉल खेल रही हूं। प्रयागराज स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हूं। 2013 से 2019 तक लगातार राष्ट्रीय स्तर पर खेला है। इंडिया टीम में हिस्सा बनना चाहती हूं। उसी के लिए कड़ी मेहनत कर रहीं हूं। - रितिका यादव, प्रयागराज
बीएचयू में पढ़ाई कर रहीं हूं। 12 नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। दो बार पदक जीते। मेरा सपना खेल के मैदान से तरक्की का शिखर चूमना है। - उपासना यादव, वाराणसी
2013 में जम्मू में हुई नेेशनल प्रतियोगिता में तीसरा स्थान मिला था। इसके बाद कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं भाग लिया। इंडिया टीम से खेलना चाहती हूं उसी के लिए कड़ी मेहनत कर रही हूं। स्पोर्ट्स ऑफिसर बनने का सपना है ताकि लड़कियों को खेल में बढ़ावा मिल सके। - तनु मिश्रा, बनारस