{"_id":"618d68fef92ad0084153cc87","slug":"cultural-pilibhit-news-bly4658227158","type":"story","status":"publish","title_hn":"उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर किया निर्जला व्रत का पारायण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर किया निर्जला व्रत का पारायण
विज्ञापन
जलाशय में खड़ी होकर सूर्यदेव की आराधना करतीं महिलाएं।
- फोटो : PILIBHIT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। सूर्य उपासना का महापर्व छठ का बृहस्पतिवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन हो गया। माथे पर दमकते सिंदूर के साथ व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार और बच्चों की खुशहाली व उनकी लंबी उम्र की कामना की। इससे पहले आधी रात में ही व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ सूप में जलता दीपक लेकर घाट पहुंची। जहां उन्होंने पूजा अर्चना की और 36 घंटे से चल रहे निर्जला व्रत का पारायण किया।
पूर्वांचल की तर्ज पर जिले में भी छठ पर्व आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया गया। बुधवार की शाम को व्रती महिलाओं ने घाटों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और छठ मैया की आराधना की। सुबह होने तक महिलाओं ने जागरण कर छठ मैया का गुणगान किया। इधर, पर्व के अंतिम दिन यानी बृहस्पतिवार को भोर होने से पहले ही लोगों के बरहा रेलवे क्रॉसिंग स्थित जलाशय (घाट) पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। व्रती महिलाएं व अन्य लोग बांस के सूप व टोकरियों में फल, मेवा, अनाज, नारियल, मिष्ठान व गन्ना आदि लेकर पहुंचीं। पूजा स्थल पर महिलाओं ने छठ मइया की बेदी पर पूजा अर्चना की। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कपूर व अगरबत्ती जलाकर माथा टेका। छठ मइया की पूजा करने के बाद जलाशय के पानी में खड़े होकर व्रती महिलाएं सूर्य भगवान के उदय होने का इंतजार करती रहीं। सूर्योदय होते ही शंखनाद के बीच व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया और पति, पुत्र व परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। पूरी रात जागरण के बाद भी व्रतियों के चेहरों पर आस्था का उल्लास देखा गया। छठी मइया के गीत गाती और हाथ में लिए सूप और दीपक की लौ को जलाए रखने का जतन करती हुई घाट पहुंची थी। रेलवे कॉलोनी से घाट की ओर जाने वाला रास्ता छठ मइया के गीतों से गुलजार रहा। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने घर जाकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और मिष्ठान खाकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारायण किया।
पूरी रात जगमगाते रहे घाट
उदयीमान सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर बृहस्पतिवार तड़के ही लोग जुटने लगे। इसके चलते पूरी रात छठ घाट रोशनी से नहाए नजर आए। छठ पूजा के लिए आकर्षक ढंग से घाटों को सजाया गया था। भोर होते-होते घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। ऐसे में लोग एक दूसरे के मददगार बने। अर्घ्य के समय लोग एक दूसरे की मदद कर उन्हें व्रती महिलाओं के पास अर्घ्य दिलाने के लिए भेजने में सहयोग करते नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
पूर्वांचल की तर्ज पर जिले में भी छठ पर्व आस्था व श्रद्धा के साथ मनाया गया। बुधवार की शाम को व्रती महिलाओं ने घाटों पर पहुंचकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और छठ मैया की आराधना की। सुबह होने तक महिलाओं ने जागरण कर छठ मैया का गुणगान किया। इधर, पर्व के अंतिम दिन यानी बृहस्पतिवार को भोर होने से पहले ही लोगों के बरहा रेलवे क्रॉसिंग स्थित जलाशय (घाट) पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। व्रती महिलाएं व अन्य लोग बांस के सूप व टोकरियों में फल, मेवा, अनाज, नारियल, मिष्ठान व गन्ना आदि लेकर पहुंचीं। पूजा स्थल पर महिलाओं ने छठ मइया की बेदी पर पूजा अर्चना की। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कपूर व अगरबत्ती जलाकर माथा टेका। छठ मइया की पूजा करने के बाद जलाशय के पानी में खड़े होकर व्रती महिलाएं सूर्य भगवान के उदय होने का इंतजार करती रहीं। सूर्योदय होते ही शंखनाद के बीच व्रती महिलाओं ने सूर्य को अर्घ्य दिया और पति, पुत्र व परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। पूरी रात जागरण के बाद भी व्रतियों के चेहरों पर आस्था का उल्लास देखा गया। छठी मइया के गीत गाती और हाथ में लिए सूप और दीपक की लौ को जलाए रखने का जतन करती हुई घाट पहुंची थी। रेलवे कॉलोनी से घाट की ओर जाने वाला रास्ता छठ मइया के गीतों से गुलजार रहा। अर्घ्य देने के बाद व्रती महिलाओं ने घर जाकर बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और मिष्ठान खाकर 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारायण किया।
विज्ञापन
पूरी रात जगमगाते रहे घाट
उदयीमान सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर बृहस्पतिवार तड़के ही लोग जुटने लगे। इसके चलते पूरी रात छठ घाट रोशनी से नहाए नजर आए। छठ पूजा के लिए आकर्षक ढंग से घाटों को सजाया गया था। भोर होते-होते घाटों पर भीड़ बढ़ती गई। ऐसे में लोग एक दूसरे के मददगार बने। अर्घ्य के समय लोग एक दूसरे की मदद कर उन्हें व्रती महिलाओं के पास अर्घ्य दिलाने के लिए भेजने में सहयोग करते नजर आए।
विज्ञापन