{"_id":"5734c2854f1c1b9b3791a65c","slug":"the-report-sports-weapons-case-withdrawn","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिपोर्ट में खेल, हथियारों का मामला ही हटा लिया","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
रिपोर्ट में खेल, हथियारों का मामला ही हटा लिया
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Thu, 12 May 2016 11:21 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस ने नेपालियों द्वारा शस्त्रों के बल पर कस्बे से नेपाली युवती को ले जाने के मामले में खेल खेलते हुए पांच नेपालियों समेत दस-बारह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन एफआईआर में आरोपियों के पास शस्त्र होने की बात को हटा दिया। वादी ने इसकी शिकायत डीएम से की है। वहीं कस्बावासियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उधर, एसएसबी ने भी मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
कस्बा निवासी रामनिवास का पुत्र नेपाल के धनगढ़ी क्षेत्र से एक युवती को ले आया था। बताते हैं कि लखनऊ के आर्यसमाज मंदिर में दोनों ने शादी कर ली थी, जिसके बाद वह कस्बे में आकर रह रहे थे। सात मई शाम करीब पांच बजे तीन वाहनों से हथियारों से लैस करीब डेढ़ दर्जन लोग रामनिवास के घर में दरवाजा तोड़कर घुसे थे और नेपाली युवती को घसीटते हुए ले गए थे। हथियारों के चलते कस्बावासियों ने उनसे टकराव करना मुनासिब नहीं समझा। कस्बे के अंचल सिंह, योगेश सिंह, आनंदपाल गुप्ता, पूर्व प्रधान रामऔतार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुनेंद्रपाल सिंह, विमलेश सिंह सहित लोगों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, मुख्यमंत्री व डीजीपी को पत्र भेजकर इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। कस्बावासियों का कहना था कि बार्डर पर एसएसबी तैनात है। बार्डर से लेकर कस्बे तक कई थाने पड़ते हैं। बावजूद इसके बिना शस्त्रों की इंट्री कराए, माओवादियों की तरह कस्बे में घुसकर शस्त्रों के बल पर आतंक फैलाकर इस घटना को अंजाम दिया गया। इससे देश की सुरक्षा को कहीं न कहीं खतरा पैदा हो सकता है। पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध रही है। उधर, मामले में एसएसबी के एरिया आर्गेनाइजर ने थाने पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की। उन्होंने बताया कि एसएसबी द्वारा इस मामले में जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन
कस्बा निवासी रामनिवास का पुत्र नेपाल के धनगढ़ी क्षेत्र से एक युवती को ले आया था। बताते हैं कि लखनऊ के आर्यसमाज मंदिर में दोनों ने शादी कर ली थी, जिसके बाद वह कस्बे में आकर रह रहे थे। सात मई शाम करीब पांच बजे तीन वाहनों से हथियारों से लैस करीब डेढ़ दर्जन लोग रामनिवास के घर में दरवाजा तोड़कर घुसे थे और नेपाली युवती को घसीटते हुए ले गए थे। हथियारों के चलते कस्बावासियों ने उनसे टकराव करना मुनासिब नहीं समझा। कस्बे के अंचल सिंह, योगेश सिंह, आनंदपाल गुप्ता, पूर्व प्रधान रामऔतार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुनेंद्रपाल सिंह, विमलेश सिंह सहित लोगों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री, मुख्यमंत्री व डीजीपी को पत्र भेजकर इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। कस्बावासियों का कहना था कि बार्डर पर एसएसबी तैनात है। बार्डर से लेकर कस्बे तक कई थाने पड़ते हैं। बावजूद इसके बिना शस्त्रों की इंट्री कराए, माओवादियों की तरह कस्बे में घुसकर शस्त्रों के बल पर आतंक फैलाकर इस घटना को अंजाम दिया गया। इससे देश की सुरक्षा को कहीं न कहीं खतरा पैदा हो सकता है। पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध रही है। उधर, मामले में एसएसबी के एरिया आर्गेनाइजर ने थाने पहुंचकर मामले की जांच पड़ताल की। उन्होंने बताया कि एसएसबी द्वारा इस मामले में जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन