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शव लेकर पहुंची एंबुलेंस को नेपालियों ने रोका
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
Updated Fri, 03 Jun 2016 10:57 PM IST
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हादसा
- फोटो : pilibhit, beureu
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देवरिया में हादसे का शिकार हुए नेपाली मजदूर का शव लेकर पहुंची भारतीय एंबुलेंस को नेपालियों ने नोमेंस लैंड पर रोक लिया। नेपालियों का आरोप था कि नेपाली मजदूर की हत्या की गई है। पंचायत में मजदूर की मौत हादसे में होने की बात पर सहमत होने पर एंबुलेंस को करीब सात घंटे बाद छोड़ा गया।
इंडो नेपाल सीमा से सटे नेपाल के बाबाथान के वार्ड नंबर दस निवासी 60 वर्षीय टेक चंद धामी उत्तराखंड के सितारगंज इलाके के एक ठेकेदार के माध्यम से देवरिया मजदूरी करने गया था। वहां वह की गौरी बाजार में रेलवे के ओवरब्रिज निर्माण कार्य में बतौर मजदूर काम कर रहा था। उसके साथ नेपाल के राजबहादुर और निरंजन भी गए थे। बताते हैं कि दो जून को टेकचंद की एक दुघर्टना में मौत हो गई, जिसके बाद देवरिया पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को राजबहादुर और निरंजन के सुपुुर्दगी में दे दिया, लेकिन इन सभी ने वहां अपना पता भारतीय क्षेत्र के नौजल्हा नंबर दो लिखाया था। ठेकेदार ने शव ले जाने को एक प्राइवेट एंबुलेंस मुहैय्या कराई। चूंकि दोनों नेपालियों ने शव आने की सूचना पूर्व में ही घरवालों को दे दी थी, जिसके चलते शुक्रवार सुबह एंबुलेंस के नोमेंस लैंड पर पहुंचते ही नेपालियों की भीड़ लग गई। इस बीच कुछ लोगों ने एंबुलेंस चालक को शव नेपाल सीमा के भीतर तक ले जाने का दबाव बनाया। चालक ने मानवता के नाते एंबुलेंस मृतक के गांव तक पहुंचा दी। गांव पहुंचते ही नेपालियों ने रंग बदलना शुरू कर दिया और एंबुलेंस को रोक लिया। चालक से पहले ठेकेदार को बुलाकर लाने को कहा। हालांकि सीमा पर एसएसबी के दो जवान भी पेट्रोलिंग कर रहे थे, लेकिन शव होने के चलते उन्होंने भी कोई एतराज नहीं जताया। चालक भी मौके की नजाकत को भांपते हुए निकल गया। टेकचंद को भेजने वाले ठेकेदार मनोज हलधर ने क्षेत्र के मठइयालालपुर के प्रधान आशीष राय को मामले की जानकारी दी। इस पर आशीष स्थानीय लोगों को साथ लेकर नेपाल पहुंचे। सुलह समझौते के प्रयास शुरू हुए, लेकिन नेपालियों ने टेकचंद को दबाकर मारने की बात कहते हुए समझौता करने से इंकार कर दिया। इस पर ठेकेदार के आदमियों ने विश्वास दिलाया कि उसकी मौत ट्रेन से टकराने से हुई है। इस बीच नेपालियों ने नेपाली पुलिस को भी बुला लिया, जिसके बाद चली लंबी पंचायत में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। मृतक के परिवार वालों को आर्थिक सहायता देने के बाद करीब सात घंटे बाद एंबुलेंस छोड़ दी गई।
मैं जरूरी कार्य से माधोटांडा थाने गया था, लेकिन मुझे या फिर चौकी पर ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई। यदि पुलिस को सूचना दी मिलती तो कार्रवाई की जाती।
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- रहमत खां, चौकी प्रभारी, रमनगरा पुलिस चौकी
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इंडो नेपाल सीमा से सटे नेपाल के बाबाथान के वार्ड नंबर दस निवासी 60 वर्षीय टेक चंद धामी उत्तराखंड के सितारगंज इलाके के एक ठेकेदार के माध्यम से देवरिया मजदूरी करने गया था। वहां वह की गौरी बाजार में रेलवे के ओवरब्रिज निर्माण कार्य में बतौर मजदूर काम कर रहा था। उसके साथ नेपाल के राजबहादुर और निरंजन भी गए थे। बताते हैं कि दो जून को टेकचंद की एक दुघर्टना में मौत हो गई, जिसके बाद देवरिया पुलिस ने उसका पोस्टमार्टम कराने के बाद शव को राजबहादुर और निरंजन के सुपुुर्दगी में दे दिया, लेकिन इन सभी ने वहां अपना पता भारतीय क्षेत्र के नौजल्हा नंबर दो लिखाया था। ठेकेदार ने शव ले जाने को एक प्राइवेट एंबुलेंस मुहैय्या कराई। चूंकि दोनों नेपालियों ने शव आने की सूचना पूर्व में ही घरवालों को दे दी थी, जिसके चलते शुक्रवार सुबह एंबुलेंस के नोमेंस लैंड पर पहुंचते ही नेपालियों की भीड़ लग गई। इस बीच कुछ लोगों ने एंबुलेंस चालक को शव नेपाल सीमा के भीतर तक ले जाने का दबाव बनाया। चालक ने मानवता के नाते एंबुलेंस मृतक के गांव तक पहुंचा दी। गांव पहुंचते ही नेपालियों ने रंग बदलना शुरू कर दिया और एंबुलेंस को रोक लिया। चालक से पहले ठेकेदार को बुलाकर लाने को कहा। हालांकि सीमा पर एसएसबी के दो जवान भी पेट्रोलिंग कर रहे थे, लेकिन शव होने के चलते उन्होंने भी कोई एतराज नहीं जताया। चालक भी मौके की नजाकत को भांपते हुए निकल गया। टेकचंद को भेजने वाले ठेकेदार मनोज हलधर ने क्षेत्र के मठइयालालपुर के प्रधान आशीष राय को मामले की जानकारी दी। इस पर आशीष स्थानीय लोगों को साथ लेकर नेपाल पहुंचे। सुलह समझौते के प्रयास शुरू हुए, लेकिन नेपालियों ने टेकचंद को दबाकर मारने की बात कहते हुए समझौता करने से इंकार कर दिया। इस पर ठेकेदार के आदमियों ने विश्वास दिलाया कि उसकी मौत ट्रेन से टकराने से हुई है। इस बीच नेपालियों ने नेपाली पुलिस को भी बुला लिया, जिसके बाद चली लंबी पंचायत में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। मृतक के परिवार वालों को आर्थिक सहायता देने के बाद करीब सात घंटे बाद एंबुलेंस छोड़ दी गई।
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मैं जरूरी कार्य से माधोटांडा थाने गया था, लेकिन मुझे या फिर चौकी पर ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं दी गई। यदि पुलिस को सूचना दी मिलती तो कार्रवाई की जाती।
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- रहमत खां, चौकी प्रभारी, रमनगरा पुलिस चौकी