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हाईकोर्ट से स्टे के बावजूद किसान को ले गई पुलिस
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jun 2016 11:30 PM IST
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पुलिस के अड़ियल रवैये के चलते अमरिया थाना क्षेत्र के एक किसान को करीब 15 घंटे पुलिस हिरासत में रहना पड़ा। हिरासत में लिया गया किसान व उसके परिवारवाले यह बताते रहे कि पुलिस उसे जिस मामले में गिरफ्तार कर रही है, उसमें हाईकोर्ट का स्थगनादेश है। लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। सीजेएम की अदालत में पेश करते समय जब पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो वह तुरंत बैक फुट पर आ गई और परिवार वालों से अपनी गलती बताते हुए खुशामद करने लगी। बाद में हिरासत में लिए गए किसान को उसके भाई के सुपुर्द कर दिया गया। किसान मजदूर पार्टी के यूसुफ मलिक ने इसे पुलिस की ज्यादती करार देते हुए 28 जून को एसपी से मिलकर शिकायत कर आरोपियों पर कार्रवाई की बात कही है।
अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भैसहा निवासी पीड़ित जगपाल सिंह पुत्र गुरुनाम सिंह ने बताया कि कई साल पहले कोतवाली पीलीभीत में कुछ लोगों ने उसके खिलाफ रंजिशन धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया था। मुकदमे को उच्च न्यायालय में उसने दो फरवरी 2009 में चुनौती दी थी। जिसमें उसकी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश हुए थे। पुलिस इस मामले में जगपाल को अपने अभिलेख में वांछित दिखाती रही। एसपी मुनिराज जी ने हाल ही में जब वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के आदेश सख्ती से थानाध्यक्षों को दिए तो गुड वर्क के चक्कर में अमरिया थानाध्यक्ष रेहान खां अपने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। जगपाल व उसके भाई जगतार का कहना है कि वे लोग अमरिया पुलिस को स्टे दिखाते रहे तथा छोड़े जाने के लिए काफी खुशामद भी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा। पासा उस समय पलट गया जब पुलिस जगपाल सिंह को लेकर सीजेएम अदालत में पेश करने पहुंच गई। वहां उसे पता चला कि स्टे के कारण वहां उसे पेश नहीं किया जा सकता। इसके बाद पुलिस के हाथ-पांव फूलने गए। परिवारवालों ने भी तब पुलिस को खूब खरीखोटी सुनाई। बाद में मामला गर्माता देख अमरिया पुलिस पीड़ित के परिवारवालों से मामले को दबाने के लिए खुशामद करने लगी। बाद में कोतवाली पुलिस ने जगपाल सिंह को थाने लाकर उसके भाई जगतार सिंह को लिखा-पढ़ी कर सुपुर्दगी में दे दिया। तब जाकर मामला कुछ शांत हो सका। किसान मजदूर संगठन के यूसुफ मलिक ने इसे पुलिस की ज्यादती करार दिया है। उन्होंने बताया कि जगपाल को थाने से छोड़ने के लिए अमरिया पुलिस सुविधा शुल्क मांग रही थी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर किसान मजदूर पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल 28 जून को एसपी से मिल कर आरोपी पुलिस वालों पर कार्रवाई की मांग करेंगा।
अमरिया पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद सूचना मुझे दी थी। वहीं के सिपाही उसे कोर्ट ले गए थे। उनकी सहायता के लिए कोतवाली से एक दरोगा भेजा था। जब स्टे की जानकारी हुई तो जगपाल सिंह को लिखा पढ़ी के साथ उनके भाई के सुपुर्द कर दिया गया।
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हरगोविंद सिंह, कोतवाल
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अमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम भैसहा निवासी पीड़ित जगपाल सिंह पुत्र गुरुनाम सिंह ने बताया कि कई साल पहले कोतवाली पीलीभीत में कुछ लोगों ने उसके खिलाफ रंजिशन धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया था। मुकदमे को उच्च न्यायालय में उसने दो फरवरी 2009 में चुनौती दी थी। जिसमें उसकी गिरफ्तारी पर रोक के आदेश हुए थे। पुलिस इस मामले में जगपाल को अपने अभिलेख में वांछित दिखाती रही। एसपी मुनिराज जी ने हाल ही में जब वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी के आदेश सख्ती से थानाध्यक्षों को दिए तो गुड वर्क के चक्कर में अमरिया थानाध्यक्ष रेहान खां अपने अन्य पुलिसकर्मियों के साथ दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया। जगपाल व उसके भाई जगतार का कहना है कि वे लोग अमरिया पुलिस को स्टे दिखाते रहे तथा छोड़े जाने के लिए काफी खुशामद भी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा। पासा उस समय पलट गया जब पुलिस जगपाल सिंह को लेकर सीजेएम अदालत में पेश करने पहुंच गई। वहां उसे पता चला कि स्टे के कारण वहां उसे पेश नहीं किया जा सकता। इसके बाद पुलिस के हाथ-पांव फूलने गए। परिवारवालों ने भी तब पुलिस को खूब खरीखोटी सुनाई। बाद में मामला गर्माता देख अमरिया पुलिस पीड़ित के परिवारवालों से मामले को दबाने के लिए खुशामद करने लगी। बाद में कोतवाली पुलिस ने जगपाल सिंह को थाने लाकर उसके भाई जगतार सिंह को लिखा-पढ़ी कर सुपुर्दगी में दे दिया। तब जाकर मामला कुछ शांत हो सका। किसान मजदूर संगठन के यूसुफ मलिक ने इसे पुलिस की ज्यादती करार दिया है। उन्होंने बताया कि जगपाल को थाने से छोड़ने के लिए अमरिया पुलिस सुविधा शुल्क मांग रही थी। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर किसान मजदूर पार्टी का एक प्रतिनिधि मंडल 28 जून को एसपी से मिल कर आरोपी पुलिस वालों पर कार्रवाई की मांग करेंगा।
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अमरिया पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद सूचना मुझे दी थी। वहीं के सिपाही उसे कोर्ट ले गए थे। उनकी सहायता के लिए कोतवाली से एक दरोगा भेजा था। जब स्टे की जानकारी हुई तो जगपाल सिंह को लिखा पढ़ी के साथ उनके भाई के सुपुर्द कर दिया गया।
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हरगोविंद सिंह, कोतवाल