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आतंक के दौर में कई बड़ी हस्तियों के हुए थे अपहरण

Fri, 08 Apr 2016 10:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/अमर उजाला, पीलीभीत Updated Fri, 08 Apr 2016 10:41 PM IST
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खालिस्तान की मांग को लेकर हरित क्रांति का प्रयोग स्थल कहे जाने वाले तराई इलाके में शरण लेने वाले पंजाब के आतंकियों ने फिरौती वसूलने का धंधा अपनाकर कई नामचीन हस्तियों का अपहरण किया था। इसमें पूरनपुर तहसील के एक पूर्व विधायक और प्रमुख उद्योगपति भी शामिल थे।
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पंजाब में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे आपरेशन के चलते वहां से बड़े पैमाने पर आतंकी आधुनिक हथियारों समेत तराई पहुंचे थे। यहां उन्होंने जिले के कई सिख युवकों को अपने गुट में शामिल कर लिया था। इनमें प्रमुख रूप से पूरनपुर तहसील के दो ऐसे सिख भी शामिल थे जिनके पास क्षेत्र की  भौगोलिक के साथ सामाजिक जानकारी भी अच्छी थी। इसमें से एक को खालिस्तान कमांडो फोर्स का और दूसरे को भिंडरावाला टाइगर फोर्स का एरिया कमांडर बनाया गया था। बढ़ते दबदबे के चलते उन्होंने कई मुखबिरों की हत्याएं करने के बाद तराई के सिखों में भी अपनी दहशत फैलानी शुरू कर दी थी और पुलिस को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। उस समय माधोटांडा एसओ सीपी सिंह भी उनके निशाने पर आ गए थे। 
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कई व्यापारी कर गए थे पलायन
तराई में दहशत फैलाने के बाद आतंकियों ने अपहरण कर फिरौती वसूलनी शुरू कर दी। पूरनपुर क्षेत्र के आतंकियों ने एक प्रमुख उद्योगपति और पूर्व विधायक का फिरौती के लिए अपहरण कर लिया गया था। उन्हें बराही के जंगल में रखा गया था। उन्हें अपने घर का फोन नंबर न मालूम होने के चलते बाद में एक वरिष्ठ पत्रकार का फोन नंबर देकर बात कराई थी और एक बड़ी रकम देकर उन्हें सकुशल रिहा किया गया था। रंपुरा फकीरे क्षेत्र के रजवाड़े से जुड़े एक फार्मर का भी अपहरण किया गया था। उन्हें कुंवर भारत सिंह ने तराई के सिखों को लगाकर फिरौती की राशि दिलाकर सुरक्षित छुड़ाया था। आतंकियों ने पूरनपुर के एक अन्य उद्योगपति से भी बड़ी रकम मांगी। दहशत में आया उद्योगपति का परिवार मध्यस्थों के माध्यम से रकम देकर पलायन कर गया था। यह सिलसिला लगातार जारी रहा। 
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जमीनों में दबाकर रखा था रुपया 
एक वक्त ऐसा भी आया जब आतंकियों के पास बोरियों से रुपया हो गया था। उन्होंने काफी रकम तो तराई में अपने नजदीकियों के यहां रखी और बहुत सी रकम जंगलों में ही जमीनों में दबा दी। पुलिस मुठभेड़ में जब आतंकी मारे और पकड़े जाने लगे तो उनके साथियों ने जमीन में दबी रकम को अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया। तराई में आतंकियों ने धन उगाही को अपना जरिया बना लिया था, जिसमें कुछ स्थानीय सिख युवक भी शामिल हो गए थे।
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