{"_id":"57ec05844f1c1ba774573eab","slug":"locker-gold-disappearance-probe-stalled","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकर से सोना गायब होने के मामले की जांच ठप","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
लॉकर से सोना गायब होने के मामले की जांच ठप
पीलीभीत, ब्यूरो
Updated Wed, 28 Sep 2016 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब एंड सिंध बैंक के दो लॉकर से रहस्यमय ढंग से 75 तोला सोने के जेवरात गायब होने के मामले की जांच में अब पुलिस कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है। पहले बैंक प्रबंधन से रिपोर्ट मिलने में देरी का बहाना बनाकर पुलिस अफसर टालमटोल करते रहे, लेकिन अब पुलिस ने ही मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
एकता नगर कॉलोनी निवासी व्यापारी नेता अमनदीप सिंह जौली की मां जसप्रीत कौर के गैस चौराहा स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के लॉकर से 11 अगस्त को 25 तोला सोने के जेवरात गायब हो गए थे। इसके ठीक पांच दिन बाद अशोक कॉलोनी निवासी डॉक्टर विपिन साहनी की मां सुदेश साहनी के इसी बैंक के लॉकर से 50 तोला सोने के जेवरात रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। दोनों मामलों की सुनगढ़ी थाने में बैंक प्रबंधक समेत पूरेे स्टाफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। शुरूआत में तो पुलिस ने बड़े-बड़े दावे किए। कभी पीड़ित की कहानी को झुठलाया तो कभी बैंक प्रबंधन पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा। इसके बाद विवेचक मनोज त्यागी का तबादला होते ही जांच ठप हो गई। समय के साथ अफसर भी वारदात को भूल गए। पुुलिस अफसर बैंक प्रबंधन से मिली रिपोर्ट में ही खामियां गिनाकर अपनी साख बचाने में जुुटे हैं।
विज्ञापन
एकता नगर कॉलोनी निवासी व्यापारी नेता अमनदीप सिंह जौली की मां जसप्रीत कौर के गैस चौराहा स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक के लॉकर से 11 अगस्त को 25 तोला सोने के जेवरात गायब हो गए थे। इसके ठीक पांच दिन बाद अशोक कॉलोनी निवासी डॉक्टर विपिन साहनी की मां सुदेश साहनी के इसी बैंक के लॉकर से 50 तोला सोने के जेवरात रहस्यमय ढंग से गायब हो गए। दोनों मामलों की सुनगढ़ी थाने में बैंक प्रबंधक समेत पूरेे स्टाफ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। शुरूआत में तो पुलिस ने बड़े-बड़े दावे किए। कभी पीड़ित की कहानी को झुठलाया तो कभी बैंक प्रबंधन पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा। इसके बाद विवेचक मनोज त्यागी का तबादला होते ही जांच ठप हो गई। समय के साथ अफसर भी वारदात को भूल गए। पुुलिस अफसर बैंक प्रबंधन से मिली रिपोर्ट में ही खामियां गिनाकर अपनी साख बचाने में जुुटे हैं।
विज्ञापन