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पहले भी मारे जा चुके हैं कोतवाल और हेड दीवान
पीलीभीत
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:33 PM IST
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एचसीपी की हत्या के अलावा आतंकवाद के दौर में पूरनपुर कोतवाली में तैनात कोतवाल जितेंद्र यादव की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। करीब आठ साल पहले कोतवाली के मालखाने के चार्ज को लेकर हुए विवाद में हेड दीवान हरपाल सिंह की दूसरे हेड दीवान देशराज सिंह ने कोतवाली के अंदर आवास में रात को धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी थी। आरोपी हेड दीवान को जेल भेजा गया, जिसकी बाद में बीमारी से जेल में ही मौत हो गई थी।
सर्किल सहित पूरा जिला वर्ष 1990-91 में आतंकवाद से जूझ रहा था। अपहरण और फिरौती की घटनाएं आम थीं। आतंकवादियों ने जंगल में कटुरुआ बीनने गए 29 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। पूरनपुर कोतवाली में तैनात कोतवाल जितेंद्र सिंह यादव आतंकवादियों के होने की सूचना पर 1992 में तराई क्षेत्र के मूसाझार इलाके में पहुंचे थे। इसी बीच आतंकवादियों ने कोतवाल जितेंद्र सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इसके अलावा अब से करीब आठ साल पहले कोतवाली में तैनात हेड दीवान देशराज सिंह का स्थानांतरण दूसरे थाने में हो गया था। कोतवाली में हेड दीवान हरपाल सिंह की तैनाती की गई थी। दोनों हेड दीवान कोतवाली के एक ही आवास में रहते थे। चार्ज को लेकर हेड दीवान देशराज सिंह ने हेड दीवान हरपाल सिंह की रात को आवास मेें सोते समय धारदार हथियार से ताबड़तोड़ प्रहार कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना का खुलासा कर हेड दीवान देशराज सिंह का कोर्ट के लिए चालान किया। जेल में देशराज सिंह की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार को एचसीपी सुभाष की हत्या पर उक्त दोनों घटनाएं लोगों की चर्चा में शामिल रही।
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चर्चित रही हजारा थाने मेें जिपंस की हत्या
पूरनपुर। जिला पंचायत सदस्य बलजीत सिंह मान और उनके साथी ददिराम की हजारा थाने में सात जनवरी 2007 को उस समय रात को करीब 11 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जब जिला पंचायत सदस्य साथी ददिराम के साथ थाने पर बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे थे। पीछे से पहुंचे दूसरे पक्ष के लोगों ने दोनों को थाने में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। घटना के समय थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों ने थाने से भाग कर अपनी जान बचाई थी। घटना में एसओ को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हुई थी।
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सर्किल सहित पूरा जिला वर्ष 1990-91 में आतंकवाद से जूझ रहा था। अपहरण और फिरौती की घटनाएं आम थीं। आतंकवादियों ने जंगल में कटुरुआ बीनने गए 29 लोगों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी। पूरनपुर कोतवाली में तैनात कोतवाल जितेंद्र सिंह यादव आतंकवादियों के होने की सूचना पर 1992 में तराई क्षेत्र के मूसाझार इलाके में पहुंचे थे। इसी बीच आतंकवादियों ने कोतवाल जितेंद्र सिंह यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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इसके अलावा अब से करीब आठ साल पहले कोतवाली में तैनात हेड दीवान देशराज सिंह का स्थानांतरण दूसरे थाने में हो गया था। कोतवाली में हेड दीवान हरपाल सिंह की तैनाती की गई थी। दोनों हेड दीवान कोतवाली के एक ही आवास में रहते थे। चार्ज को लेकर हेड दीवान देशराज सिंह ने हेड दीवान हरपाल सिंह की रात को आवास मेें सोते समय धारदार हथियार से ताबड़तोड़ प्रहार कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना का खुलासा कर हेड दीवान देशराज सिंह का कोर्ट के लिए चालान किया। जेल में देशराज सिंह की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। बृहस्पतिवार को एचसीपी सुभाष की हत्या पर उक्त दोनों घटनाएं लोगों की चर्चा में शामिल रही।
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चर्चित रही हजारा थाने मेें जिपंस की हत्या
पूरनपुर। जिला पंचायत सदस्य बलजीत सिंह मान और उनके साथी ददिराम की हजारा थाने में सात जनवरी 2007 को उस समय रात को करीब 11 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जब जिला पंचायत सदस्य साथी ददिराम के साथ थाने पर बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे थे। पीछे से पहुंचे दूसरे पक्ष के लोगों ने दोनों को थाने में गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। घटना के समय थाने में मौजूद पुलिस कर्मियों ने थाने से भाग कर अपनी जान बचाई थी। घटना में एसओ को बर्खास्त कर दिया गया था। इसके अलावा अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हुई थी।