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टाइगर की हत्या में शामिल मिला वन दरोगा, सस्पेंड

Wed, 25 Mar 2015 11:35 PM IST
पीलीभीत।
पीलीभीत। Updated Wed, 25 Mar 2015 11:35 PM IST
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inspector suspended
शिकारियों
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से मोबाइल पर बात करने के आरोपी वन दरोगा शिवपाल को वन संरक्षक ने सस्पेंड कर दिया है। एसटीएफ द्वारा दो माह पूर्व वार्ता पकड़े जाने के बाद से वन दरोगा बरेली कार्यालय से संबद्ध चल रहा था।

करीब दो माह पूर्व 17 जनवरी को नेपाल के कंचनपुर में पुलिस और वनकर्मियों ने बाघ की खाल सहित गभिया के दुलाल को पकड़ा था। इसके बाद टाइगर रिजर्व पहुंची एसटीएफ ने एक सप्ताह तक कैंप कर कई शिकारियों को पकड़ा था। साथ ही कुछ वनकर्मियों और शिकारियों के गठजोड़ का भी खुलासा किया था।

इस दौरान एसटीएफ ने सर्विलांस के माध्यम से बराही रेंज में तैनात वन दरोगा शिवपाल की शिकारियों से मोबाइल पर बातचीत भी पकड़ी थी। बातचीत पकड़े जाने पर डीएफओ ने वनसंरक्षक के निर्देश पर आरोपी वन दरोगा को बराही रेंज से हटाकर बरेली कार्यालय संबद्ध कर दिया था। इस मामले की जांच वनसंरक्षक द्वारा की जा रही है।

जांच में बातचीत का आरोप सही पाए जाने पर अब वन संरक्षक वीके चौपड़ा ने आरोपी वनदरोगा शिवपाल को सस्पेंड कर दिया। इसका आदेश टाइगर रिजर्व कार्यालय को प्राप्त हो गया है। डीएफओ कैलाश प्रकाश ने वन दरोगा को सस्पेंड किए जाने की पुष्टि की है।
आरोपी वन दरोगा को क्यों नहीं भेजा जेल
पीलीभीत। बाघ की हत्या जैसे जघन्य मामले में एसटीएफ के सहयोग से वनविभाग अब तक 12 लोगों की पहचान कर जेल भेज चुका है। इसमें खाल सुखाने में मदद करने वाली एक महिला भी शामिल है। वहीं शिकारियों से बातचीत करने के मामले की जांच सही पाए जाने पर विभाग ने आरोपी वन दरोगा शिवपाल को केवल सस्पेंड कर अपना कर्तव्य पूरा कर लिया। मगर अन्य लोगों की तरह वन दरोगा को गिरफ्तार कर जेल नहीं भेजा। इस सवाल का जवाब विभाग के लिए यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

विभाग के एसडीओ डीपी सिंह ने बताया कि वनसंरक्षक अभी इस मामले की जांच कर रहे हैं। अब तक जो भी कार्रवाई की गई है वो केवल एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। अब सवाल उठता है कि संलिप्तता पाए जाने की एसटीएफ की रिपोर्ट पर कइयों को जेल भेजा जा चुका है तो वन महकमा अपने वन दरोगा की संलिप्तता पर दोहरा मापदंड क्यों अपना रहा है?

यही नहीं जब नेपाल में पकड़े गए शिकारी दुलाल के बयान के आधार पर कई लोग भेजे जा चुके हैं। यहां तक कि एक महिला को भी सिर्फ बयान के आधार पर खाल सुखाने में मदद के आरोप में जेल भेजा जा चुका है तो फिर बाघ के शिकारियों से मोबाइल पर बात करने जैसे पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी महकमा दागी वन दरोगा पर रहमदिली क्यों दिखा रहा है?
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