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फांसी लगाई नहीं, फिर कैसे हुई विपिन की मौत?
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:51 PM IST
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फांसी लगाई नहीं, फिर कैसे हुई विपिन की मौत?
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कोतवाली की हवालात में बाइक चोरी के आरोपी विपिन की मौत के मामले में पुलिस की कहानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में झूठी निकली। पोस्टमार्टम में आत्महत्या की पुष्टि नहीं हुई, जबकि पुलिस का कहना रहा कि आरोपी ने फांसी लगाकर जान दी। फिलहाल मौत कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित कर लिया गया। मोहल्ला तुलाराम के रहने वाले व्यापारी महेंद्र मिश्रा की बाइक चोरी करने के आरोप में शनिवार सुबह पकड़े गए नवाबगंज, बरेली के विपिन (25) पुत्र रघुनाथ गंगवार की पुलिस कस्टडी में कोतवाली के हवालात में मौत हो गई थी। पुलिस विपिन के अपने ही कपड़ों का फंदा बनाकर हवालात के भीतर बने शौचालय के रोशनदान से फांसी लगाकर आत्महत्या करने की बात कह रही थी। देर रात परिवार वालों ने आकर बेटे की हत्या का आरोप कोतवाली पुलिस पर लगाया। सख्त कार्रवाई के आश्वासन पर परिवारीजन देर रात पोस्टमार्टम कराने को राजी हो गए। रात करीब डेढ़ बजे कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए तीन चिकित्सकों के पैनल से विपिन के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पैनल में जिला अस्पताल के डा. विनय कुमार, डीएन सिंह, डा.राजेश मौजूद थे। पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस की कहानी झूठी निकली। पुलिस के मुताबिक शव पर कोई चोट का निशान भी नहीं मिला है। जबकि शव पर मारपीट के निशान होने पर ही परिवार ने हत्या का आरोप लगाया था। इसके जवाब में पुलिस पब्लिक की पिटाई से चोट आने की बात कह रही थी। चोट के निशान न होने व फांसी लगाने की बात पुष्ट न होने से कई सवाल खड़े हो गए है। अगर विपिन की मौत फांसी से नहीं तो कैसे हुई। अगर वह पहले ही मर गया तो उसका शव फंदे पर कैसे लटका? इन कई सवालों का जवाब पुलिस नहीं दे सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से अफसरों के भी होश फाख्ता हो गए है।
कोतवाल, एसएसआई और मुंशी पर गिरी गाज
विपिन की मौत की गुत्थी भले ही गहरा गई हो, लेकिन कोतवाली में हवालात के भीतर वारदात होने पर पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। एसपी ने कोतवाल समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं परिवारीजनों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
घटना की जानकारी मिलने पर पहुंचे विपिन के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम से पहले कार्रवाई की मांग शुरू कर दी थी। जिसके बाद घटना के बाद से टालमटोल में जुटे अफसर संजीदा हुए। एसपी सभाराज ने प्रकरण में पुलिस की लापरवाही को देखते हुए कोतवाल मनोज कुमार, एसएसआई (डे-अफसर) रेहान खां और कार्यालय मुंशी कांस्टेबल अनुज कुमार सिंह को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही मृतक के ताऊ उमरालाल से मिली तहरीर पर कानूनी कार्रवाई की। तहरीर में बताया था कि विपिन शनिवार सुबह आठ बजे बाइक लेकर कॉलेज जाने के लिए गांव से पीलीभीत आया था। कोतवाली पुलिस पर स्वार्थ एवं साठगांठ कर विपिन की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसी के आधार पर कोतवाली पुलिस के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया गया।
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तीन घंटे के भीतर आखिर ऐसा हुआ क्या?
पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद पूरा महकमा साख बचाने की कोशिश में जुटा रहा। घटना को आत्महत्या करार देकर अफसर सख्त कार्रवाई के दंभ भरते रहे। विपिन की मौत को लेकर कोई स्थित स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन पब्लिक और पुलिस की कहानी को जोड़कर देखा जाए तो रहस्य मात्र तीन घंटे के बीच छिपा प्रतीत हो रहा है। शनिवार सुबह करीब दस बजे व्यापारी महेंद्र मिश्रा की बाइक उनके घर के बाहर से चोरी हो गई थी। जिसके बाद वह लोहामंडी स्थित अपनी दुकान पर पहुंच गए थे। बाइक स्वामी की दुकान के कर्मचारी व आसपास के लोगों के बताए अनुसार करीब साढ़े दस बजे उन्होंने अपनी बाइक चोरी कर भाग रहे विपिन को पकड़ लिया था। उसके पास पर्स व एक बैग मिला था। बाइक की नंबर प्लेट गायब थी। काफी पूछने के बाद भी विपिन ने कुछ नहीं बताया था, जिस पर उसको पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इधर पुलिस की कहानी के अनुसार 10:57 बजे दिन में 100 नंबर पर मिली सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। करीब 11:40 बजे उसको कोतवाली में लाया गया। जिसके बाद शुरूआती पूछताछ के बाद हवालात में बंद कर दिया। दोपहर करीब ढाई से पौने तीन बजे के करीब उसको बाहर चालान के लिए निकालने पर वह लटका मिला। पब्लिक का कहना है कि वह मौके से सही गया था। उधर पुलिस भी सही सलामत आने की बात कह रही थी। सिर्फ पब्लिक की पिटाई से चोट बताई गईं। ऐसे में आखिर कैसे उसकी मौत हो गई? इसका जवाब कोतवाली में बिताए गए तीन घंटे के भीतर घूम रहा है।
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कोतवाल, एसएसआई और मुंशी पर गिरी गाज
विपिन की मौत की गुत्थी भले ही गहरा गई हो, लेकिन कोतवाली में हवालात के भीतर वारदात होने पर पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। एसपी ने कोतवाल समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। वहीं परिवारीजनों की तहरीर पर कोतवाली पुलिस के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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घटना की जानकारी मिलने पर पहुंचे विपिन के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम से पहले कार्रवाई की मांग शुरू कर दी थी। जिसके बाद घटना के बाद से टालमटोल में जुटे अफसर संजीदा हुए। एसपी सभाराज ने प्रकरण में पुलिस की लापरवाही को देखते हुए कोतवाल मनोज कुमार, एसएसआई (डे-अफसर) रेहान खां और कार्यालय मुंशी कांस्टेबल अनुज कुमार सिंह को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही मृतक के ताऊ उमरालाल से मिली तहरीर पर कानूनी कार्रवाई की। तहरीर में बताया था कि विपिन शनिवार सुबह आठ बजे बाइक लेकर कॉलेज जाने के लिए गांव से पीलीभीत आया था। कोतवाली पुलिस पर स्वार्थ एवं साठगांठ कर विपिन की हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसी के आधार पर कोतवाली पुलिस के खिलाफ हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया गया।
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तीन घंटे के भीतर आखिर ऐसा हुआ क्या?
पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद पूरा महकमा साख बचाने की कोशिश में जुटा रहा। घटना को आत्महत्या करार देकर अफसर सख्त कार्रवाई के दंभ भरते रहे। विपिन की मौत को लेकर कोई स्थित स्पष्ट नहीं हुई है। लेकिन पब्लिक और पुलिस की कहानी को जोड़कर देखा जाए तो रहस्य मात्र तीन घंटे के बीच छिपा प्रतीत हो रहा है। शनिवार सुबह करीब दस बजे व्यापारी महेंद्र मिश्रा की बाइक उनके घर के बाहर से चोरी हो गई थी। जिसके बाद वह लोहामंडी स्थित अपनी दुकान पर पहुंच गए थे। बाइक स्वामी की दुकान के कर्मचारी व आसपास के लोगों के बताए अनुसार करीब साढ़े दस बजे उन्होंने अपनी बाइक चोरी कर भाग रहे विपिन को पकड़ लिया था। उसके पास पर्स व एक बैग मिला था। बाइक की नंबर प्लेट गायब थी। काफी पूछने के बाद भी विपिन ने कुछ नहीं बताया था, जिस पर उसको पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इधर पुलिस की कहानी के अनुसार 10:57 बजे दिन में 100 नंबर पर मिली सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। करीब 11:40 बजे उसको कोतवाली में लाया गया। जिसके बाद शुरूआती पूछताछ के बाद हवालात में बंद कर दिया। दोपहर करीब ढाई से पौने तीन बजे के करीब उसको बाहर चालान के लिए निकालने पर वह लटका मिला। पब्लिक का कहना है कि वह मौके से सही गया था। उधर पुलिस भी सही सलामत आने की बात कह रही थी। सिर्फ पब्लिक की पिटाई से चोट बताई गईं। ऐसे में आखिर कैसे उसकी मौत हो गई? इसका जवाब कोतवाली में बिताए गए तीन घंटे के भीतर घूम रहा है।