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एक माह बाद भी पकड़ से दूर है खूनी बाघ
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Sun, 10 Sep 2017 10:04 PM IST
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tiger
लेजर ड्रोन कैमरे से भी नहीं मिल रही सफलता
खूनी बाघ को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान को एक माह पूरा हो गया। पूरे माह रणनीति बदल-बदल कर चले अभियान के बाद भी खूनी बाघ को नहीं पकड़ जा सका है। मुंबई से आई लेजर ड्रोन कैमरे की टीम भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
वनकटी से निकले बाघ ने देवहा नदी पार करने के बाद सात, आठ और 10 अगस्त को तीन लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद से ही बाघ को पकड़ने के प्रयास शुरू किए गए थे। दो दिन बाद दुधवा से चार हाथी और लखनऊ व दिल्ली से विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था। एक माह से लगभग 50 लोगों की टीम, एक दर्जन गाड़ियां सर्च अभियान में लगी हुई हैं। बेहरी गांव के खेतों में तीन मचान भी बनाए गए हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम को टीमें विशेष गश्त कर बाघ की लोकेशन तलाशने का प्रयास करती हैं साथ ही हाथियों से भी कांबिंग भी कराई जा रही है। इस दौरान बाघ ने कई पड्डे, भेड़ एवं नीलगाय को शिकार बनाया लेकिन एक माह बाद भी बाघ वन विभाग की पकड़ में नहीं आ सका।
बाघ के चलते चौपट हो रही खेती
एक माह से चल रहे सर्च अभियान का सबसे ज्यादा असर बेहरी के किसानों पर पड़ रहा है। बेहरी एवं इसके निकट के गांव हिमकरनपुर के किसानों की खेती चौपट होती जा रही है। खाद पानी न मिलने से फसलें बर्बाद हो रही हैं।
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बाघ को पकड़ने का प्रयास चल रहा है। लगातार खोजबीन के बाद भी बाघ सामने नहीं आ रहा है। ड्रोन कैमरे की मदद से उसकी तलाश की जा रही है।
आदर्श कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी
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खूनी बाघ को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान को एक माह पूरा हो गया। पूरे माह रणनीति बदल-बदल कर चले अभियान के बाद भी खूनी बाघ को नहीं पकड़ जा सका है। मुंबई से आई लेजर ड्रोन कैमरे की टीम भी ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
वनकटी से निकले बाघ ने देवहा नदी पार करने के बाद सात, आठ और 10 अगस्त को तीन लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद से ही बाघ को पकड़ने के प्रयास शुरू किए गए थे। दो दिन बाद दुधवा से चार हाथी और लखनऊ व दिल्ली से विशेषज्ञों को भी बुलाया गया था। एक माह से लगभग 50 लोगों की टीम, एक दर्जन गाड़ियां सर्च अभियान में लगी हुई हैं। बेहरी गांव के खेतों में तीन मचान भी बनाए गए हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम को टीमें विशेष गश्त कर बाघ की लोकेशन तलाशने का प्रयास करती हैं साथ ही हाथियों से भी कांबिंग भी कराई जा रही है। इस दौरान बाघ ने कई पड्डे, भेड़ एवं नीलगाय को शिकार बनाया लेकिन एक माह बाद भी बाघ वन विभाग की पकड़ में नहीं आ सका।
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बाघ के चलते चौपट हो रही खेती
एक माह से चल रहे सर्च अभियान का सबसे ज्यादा असर बेहरी के किसानों पर पड़ रहा है। बेहरी एवं इसके निकट के गांव हिमकरनपुर के किसानों की खेती चौपट होती जा रही है। खाद पानी न मिलने से फसलें बर्बाद हो रही हैं।
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बाघ को पकड़ने का प्रयास चल रहा है। लगातार खोजबीन के बाद भी बाघ सामने नहीं आ रहा है। ड्रोन कैमरे की मदद से उसकी तलाश की जा रही है।
आदर्श कुमार, डीएफओ सामाजिक वानिकी