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टाइगर रिजर्व में सुअर का शिकार कर रहे दो शिकारी दबोचे, आठ फरार
Updated Tue, 08 Aug 2017 05:59 PM IST
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माधोटांडा (पीलीभीत)। बरसात शुरू होते ही टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों का शिकार का दौर एक बार फिर शुरू हो गया। मुखबिर की सूचना पर वनकर्मियों ने बराही जंगल के हल्दी डेंगा क्षेत्र में खाबर लगाकर जंगली सुअर का शिकार कर रहे दो शिकारियों को पकड़ लिया, जबकि आठ शिकारी भागने में सफल रहे।
जानकारों के मुताबिक बरसात में शिकारियों को जंगली जानवरों को घेरने में आसानी होती है। यही वजह है कि बरसात शुरू होते ही जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के मामले बढ़ जाते हैं। पिपरिया संतोष व कलीनगर क्षेत्र के दस शिकारी बराही जंगल के हल्दी डेंगा क्षेत्र में खाबर लगाकर जंगली सुअरों का शिकार कर रहे थे। मुखबिर की इस सूचना पर वन कर्मियों ने उक्त क्षेत्र की घेराबंदी कर दो शिकारियों को दबोच लिया, लेकिन शेष आठ शिकारी वन कर्मियों को चकमा देकर भागने में सफल रहे। इधर पूछताछ के दौरान पकड़े गए शिकारियों ने अपने अन्य साथियों के नाम बताए हैं। वन कर्मियों ने खाबर भी बरामद कर लिया। इसके बाद जुर्माना जमा करने की कवायद शुरू हुई। बताते हैं वन विभाग ने सभी पर 1.70 लाख जुर्माना लगाया है। कुछ शिकारियों ने जुर्माने की रकम जमा कर दी और शेष बचे शिकारी धनराशि के इंतजाम में जुट गए हैं। इन दिनों टाइगर रिजर्व में शिकार की घटनाएं बढ़ गई हैं। शिकारियों के हौंसले इतना बढ़ गए हैं कि अब वह टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी में भी जाकर मछलियों का अवैध शिकार कर रहे हैं। वहीं मारी गई मछलियों को टाइगर रिजर्व के रास्ते ही रमनगरा घाट से निकालकर बाहर मंडियों में सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा शारदा सागर डैम में भी शिकार पर प्रतिबंध के बावजूद मछलियों का अवैध शिकार तेजी से हो रहा है। बताते हैं कि जिन जालों की मदद से मछलियों का शिकार हो रहा है। उससे दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के भी मारे जाने से इंकार नहीं किया जा सकता। जबकि टाइगर रिजर्व बनने के बाद मछली सहित सभी प्रकार के शिकार व गौण उपज की नीलामी बंद कर दी गई थी।
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जानकारों के मुताबिक बरसात में शिकारियों को जंगली जानवरों को घेरने में आसानी होती है। यही वजह है कि बरसात शुरू होते ही जंगलों में वन्यजीवों के शिकार के मामले बढ़ जाते हैं। पिपरिया संतोष व कलीनगर क्षेत्र के दस शिकारी बराही जंगल के हल्दी डेंगा क्षेत्र में खाबर लगाकर जंगली सुअरों का शिकार कर रहे थे। मुखबिर की इस सूचना पर वन कर्मियों ने उक्त क्षेत्र की घेराबंदी कर दो शिकारियों को दबोच लिया, लेकिन शेष आठ शिकारी वन कर्मियों को चकमा देकर भागने में सफल रहे। इधर पूछताछ के दौरान पकड़े गए शिकारियों ने अपने अन्य साथियों के नाम बताए हैं। वन कर्मियों ने खाबर भी बरामद कर लिया। इसके बाद जुर्माना जमा करने की कवायद शुरू हुई। बताते हैं वन विभाग ने सभी पर 1.70 लाख जुर्माना लगाया है। कुछ शिकारियों ने जुर्माने की रकम जमा कर दी और शेष बचे शिकारी धनराशि के इंतजाम में जुट गए हैं। इन दिनों टाइगर रिजर्व में शिकार की घटनाएं बढ़ गई हैं। शिकारियों के हौंसले इतना बढ़ गए हैं कि अब वह टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी में भी जाकर मछलियों का अवैध शिकार कर रहे हैं। वहीं मारी गई मछलियों को टाइगर रिजर्व के रास्ते ही रमनगरा घाट से निकालकर बाहर मंडियों में सप्लाई किया जा रहा है। इसके अलावा शारदा सागर डैम में भी शिकार पर प्रतिबंध के बावजूद मछलियों का अवैध शिकार तेजी से हो रहा है। बताते हैं कि जिन जालों की मदद से मछलियों का शिकार हो रहा है। उससे दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के भी मारे जाने से इंकार नहीं किया जा सकता। जबकि टाइगर रिजर्व बनने के बाद मछली सहित सभी प्रकार के शिकार व गौण उपज की नीलामी बंद कर दी गई थी।
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