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19 महीने में पुलिस पता नहीं कर सकी शव महेंद्र का है या नहीं!
Updated Wed, 03 Jan 2018 06:49 PM IST
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19 महीने में पुलिस पता नहीं कर सकी शव महेंद्र का है या नहीं!
डीएनए जांच के नाम पर हत्याकांड ठंडे बस्ते में डाला, अफसर भूले वारदात
24 मई 2016 को गजरौला के सराय गांव में मिला था अधजला शव
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। असम हाईवे से सटे सराय गांव में मिले 24 वर्षीय अज्ञात युवक के शव की शिनाख्त को लेकर पीठ थपथपाने वाली पुलिस 19 महीने का समय बीतने के बाद भी खुद की गई शिनाख्त को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है। प्रकरण में पुलिस की गंभीरता का आकलन इस बात से होता है कि शव गांव के महेंद्र का है या नहीं, इसको लेकर आज तक संशय की स्थिति बनी हुई है। अफसर घटना को भुला चुके हैं और थाना पुलिस डीएनए रिपोर्ट के बहाने घटना को पूरी तरह से दबा चुकी है।
गजरौला थाना क्षेत्र के सराय गांव स्थित एक गन्ने के खेत में 24 मई 2016 को चौबीस वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव पड़ा मिला था। तीन महीने बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त गांव के मजदूर महेंद्र के रूप में की थी। इसको लेकर कुछ दिन छानबीन चली। एक अधिवक्ता को हिरासत में लेने के बाद हुए विरोध के बाद कार्रवाई ठप पड़ गई। खास बात रही कि महेंद्र के तौर पर शव की शिनाख्त करने वाली पुलिस खुद इसको लेकर उलझकर रह गई। शिनाख्त की पुष्टि करने के लिए डीएनए जांच कराने के लिए सेंपल फोरेंसिक लैब लखनऊ भेज गए, लेकिन उनकी आज तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इधर, स्थानीय स्तर पर हत्याकांड को लेकर छानबीन ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। थाना पुलिस से लेकर अफसर हत्याकांड को भुला चुके है। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के लिए कई बार रिमाइंडर भेजने की बात कहकर साख बचाई जा रही है। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि घटना उनके संज्ञान में नहीं है। पूरे मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी कराई जाएगी।
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डीएनए जांच के नाम पर हत्याकांड ठंडे बस्ते में डाला, अफसर भूले वारदात
24 मई 2016 को गजरौला के सराय गांव में मिला था अधजला शव
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। असम हाईवे से सटे सराय गांव में मिले 24 वर्षीय अज्ञात युवक के शव की शिनाख्त को लेकर पीठ थपथपाने वाली पुलिस 19 महीने का समय बीतने के बाद भी खुद की गई शिनाख्त को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकी है। प्रकरण में पुलिस की गंभीरता का आकलन इस बात से होता है कि शव गांव के महेंद्र का है या नहीं, इसको लेकर आज तक संशय की स्थिति बनी हुई है। अफसर घटना को भुला चुके हैं और थाना पुलिस डीएनए रिपोर्ट के बहाने घटना को पूरी तरह से दबा चुकी है।
गजरौला थाना क्षेत्र के सराय गांव स्थित एक गन्ने के खेत में 24 मई 2016 को चौबीस वर्षीय अज्ञात युवक का अधजला शव पड़ा मिला था। तीन महीने बाद पुलिस ने शव की शिनाख्त गांव के मजदूर महेंद्र के रूप में की थी। इसको लेकर कुछ दिन छानबीन चली। एक अधिवक्ता को हिरासत में लेने के बाद हुए विरोध के बाद कार्रवाई ठप पड़ गई। खास बात रही कि महेंद्र के तौर पर शव की शिनाख्त करने वाली पुलिस खुद इसको लेकर उलझकर रह गई। शिनाख्त की पुष्टि करने के लिए डीएनए जांच कराने के लिए सेंपल फोरेंसिक लैब लखनऊ भेज गए, लेकिन उनकी आज तक रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इधर, स्थानीय स्तर पर हत्याकांड को लेकर छानबीन ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। थाना पुलिस से लेकर अफसर हत्याकांड को भुला चुके है। सिर्फ डीएनए रिपोर्ट के लिए कई बार रिमाइंडर भेजने की बात कहकर साख बचाई जा रही है। एसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि घटना उनके संज्ञान में नहीं है। पूरे मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी कराई जाएगी।
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