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रिपोर्ट दर्ज होने के डेढ़ माह बाद मात्र दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी पुलिस

Mon, 04 Sep 2017 05:07 PM IST
Updated Mon, 04 Sep 2017 05:07 PM IST
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रिपोर्ट दर्ज होने के डेढ़ माह बाद मात्र दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी पुलिस
माधोटांडा। अतिक्रमण हटाने गए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों समेत पुलिस पर हमला कर मारपीट करने वाले अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के डेढ़ माह बाद बाद मात्र एक हिस्ट्रीशीटर व एक चौकीदार ही गिरफ्तार किया जा सका। इस मामले में वन विभाग की ओर से के 24 नामजद के साथ 125 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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तराई क्षेत्र के राजपुर ताल्लुके महाराजपुर में राजस्व विभाग ने विभिन्न श्रेणियों में दर्ज दो सौ एकड़ भूमि को सामाजिक वानिकी को पौधरोपण के लिए दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एंटी भूमाफिया अभियान के तहत उक्त भूमि पर अवैध रूप से काबिज लोगों से खाली कराने की योजना बनाई गई थी। कलीनगर के प्रभारी तहसीलदार सदानंद सरोज, वन विभाग के एसडीओ केपी सिंह समेत वन विभाग का पूरा अमला और माधोटांडा के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार त्यागी 14 जुलाई को उक्त भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने गए थे। बताते हैं कि गांव में पहले से ही महिलाएं टीम से भिड़ने को तैयार थी। जैसे ही फोर्स गांव में पहुंचा और लोगों को समझाने का प्रयास शुरू किया, माहौल गरमाने लगे। विवाद बढ़ने पर महिलाएं तहसीलदार, वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों व पुलिस हमलावर हो गई। वन विभाग के एसडीओ, डिप्टी रेंजर, तहसीलदार और कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए थे। डिप्टी रेंजर मोहम्मद अय्यूब की ओर से 24 नामजद समेत करीब 125 महिला और पुरुष अतिक्रमणकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसकी विवेचना दरोगा मुकेश सिंह पुंडीर को सौंपी गई। इस मामले में डेढ़ माह बीतने के बाद विवेचक मात्र एक हिस्ट्रीशीटर और एक चौकीदार को गिरफ्तार कर जेल भेजने में कामयाब हो सके। शेष बचे 22 नामजद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसे में वन विभाग का मनोबल गिरता जा रहा है। वनकर्मी कहते हैं कि जब उन लोगों के साथ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, तो पुलिस को कम से कम नामजद आरोपियों तो को गिरफ्तार करना चाहिए था। ऐसे वे लोग वन भूमि से अवैध कब्जे कैसे हटवाएंगे। इधर चर्चा है कि गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिल गया था। इसी कारण पुलिस भी खामोश बैठ गई। यह दीगर बात है कि घटना में कुछ बेगुनाह लोगों को भी आरोपी बना दिया, जो पीछे से अवैध कब्जेदारों की मदद कर रहे थे।
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