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सट्टा पकड़ने गई पुलिस टीम पर सभासद के भाई ने की फायरिंग
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जहानाबाद थाने में बैठे पुलिस पर हमला करने के आरोपी।
- फोटो : PILIBHIT
जहानाबाद (पीलीभीत)। सट्टे की सूचना पर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर सभासद के भाई ने तमंचे से फायर कर दिया और भागने लगा। पुलिस ने पीछा कर सट्टा लगवा रहे सभासद और उसके भाई समेत चार लोगों को दबोच लिया, जबकि छह भाग गए। सट्टा पर्ची, नकदी, तमंचा और कारतूस बरामद कर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की। पकड़े गए चारों आरोपियों को पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। फरार साथियों की धरपकड़ को टीम लगाई गई है।
इंस्पेक्टर जहानाबाद हरीश वर्धन सिंह के मुताबिक शुक्रवार रात गश्त के दौरान दरोगा निर्देश कुमार ललौरीखेड़ा हाल्ट के पास खाली प्लॉट पर सट्टेबाजी की सूचना मिली। दरोगा ने पुलिस टीम के साथ मौके पर जाकर घेराबंदी की तो वहां दस लोग खड़े थे। पुलिस को देखते ही मोहल्ला काजीटोला निवासी सभासद अजीम बेग के भाई मोईन ने तमंचे से फायर कर दिया। हालांकि गोली किसी को लगी नहीं, इसके बाद आरोपी भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर सभासद अजीम बेग, उसके भाई मोइन बेग, नसीम और लालपुर गौंटिया निवासी राजकुमार को दबोच लिया, जबकि पसियापुर निवासी सफदर, अमजद उर्फ जग्गू, जाहिद, मिसरन टोला निवासी खेमकरन, गौनेरीबदी गांव का मुन्ना और एक अज्ञात युवक भाग गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से 8450 रुपये, सट्टा पर्ची, रजिस्टर, पेन, तमंचा, कारतूूस आदि बरामद किया गया। सभी को थाने लाकर पूछताछ की गई। इसके बाद जुआ अधिनियम, जानलेवा हमला, आर्म्स एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई। शनिवार को चारों आरोपियों को चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। वहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बोले, अजीम को हम नहीं जानते
पकड़ा गया सभासद अजीम बेग समाजवादी पार्टी का बताया जा रहा है। पुलिस के अलावा कस्बे के लोग भी उसे सपा से जुड़ा बता रहे थे। इसे लेकर जब सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि वह इस नाम के किसी सभासद को नहीं जानते हैं।
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सट्टे की सूचना पर टीम ने दबिश दी थी। इस दौरान एक आरोपी ने तमंचे से फायर कर दिया। दस लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मौके से पकड़े गए चार आरोपी जेल भेजे गए हैं। अन्य की धरपकड़ को टीम लगाई है। इन पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी कराई जाएगी। - जयप्रकाश, एसपी
पुलिस पर पहले भी हमला कर चुके सट्टेबाज
पीलीभीत। पुलिस टीम पर सट्टेबाज पहले भी कई बार हमला कर चुके हैं। बीते साल दिवाली से पूर्व सीओ सिटी के निर्देश पर मोहल्ला मोहतसिम खां में एक स्थान पर दी गई दबिश के बाद चार शातिर सटोरिये पकड़े गए थे। इन सटोरियों ने पुलिस टीम पर चाकू से वार किया था, इसमें कुछ सट्टेबाज ऐसे भी थे, जिन्हें पूर्व में पुलिस पकड़ने गई थी। उस वक्त भी इन सट्टेबाजों ने कोतवाल का गला दबाकर जान लेने की कोशिश की थी।
दिवाली पर धरपकड़ के दौरान सटोरियों से 15 रजिस्टर बरामद हुए थे। उनमें धंधे से जुड़े 200 लोगों के नाम और मोबाइल नंबर अंकित थे। लेनदेन का ब्योरा भी लिखा था। कार्रवाई पर अपनी पीठ थपथपाते वक्त तो पुलिस ने रजिस्टरों की मदद से धंधेबाजों पर शिकंजा कसने का दावा किया था, लेकिन बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी। सिर्फ पकड़े गए चार लोगों पर चार्जशीट दाखिल कर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। जेल से छूटने के बाद यह सट्टेबाज दोबारा धंधा करने में जुट गए थे। इसकी भी कई सूचनाएं पुलिस तक पहुंची थी, मगर कार्रवाई नहीं की गई। दो साल पहले पुलिस की मिलीभगत से भी सट्टे के धंधा चलने की बात सामने आई थी। तत्कालीन एसपी कलानिधि नैथानी ने सख्ती करते हुए मंडल के नामचीन सटोरिये शाहजहांपुर निवासी बेदी को पकड़वाया था। उसकी धरपकड़ के साथ ही बरेली के बारादरी थाने में तैनात सिपाही भी गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कई पुलिसकर्मियों के नाम कॉल डिटेल की मदद से उजागर हुए थे, लेकिन एसपी के तबादले के बाद कार्रवाई ठप पड़ गई थी। अभी भी कई पुलिसकर्मियों की करीबी सट्टा लगवाने वालों से है, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
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इंस्पेक्टर जहानाबाद हरीश वर्धन सिंह के मुताबिक शुक्रवार रात गश्त के दौरान दरोगा निर्देश कुमार ललौरीखेड़ा हाल्ट के पास खाली प्लॉट पर सट्टेबाजी की सूचना मिली। दरोगा ने पुलिस टीम के साथ मौके पर जाकर घेराबंदी की तो वहां दस लोग खड़े थे। पुलिस को देखते ही मोहल्ला काजीटोला निवासी सभासद अजीम बेग के भाई मोईन ने तमंचे से फायर कर दिया। हालांकि गोली किसी को लगी नहीं, इसके बाद आरोपी भागने लगे। पुलिस टीम ने पीछा कर सभासद अजीम बेग, उसके भाई मोइन बेग, नसीम और लालपुर गौंटिया निवासी राजकुमार को दबोच लिया, जबकि पसियापुर निवासी सफदर, अमजद उर्फ जग्गू, जाहिद, मिसरन टोला निवासी खेमकरन, गौनेरीबदी गांव का मुन्ना और एक अज्ञात युवक भाग गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से 8450 रुपये, सट्टा पर्ची, रजिस्टर, पेन, तमंचा, कारतूूस आदि बरामद किया गया। सभी को थाने लाकर पूछताछ की गई। इसके बाद जुआ अधिनियम, जानलेवा हमला, आर्म्स एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई। शनिवार को चारों आरोपियों को चालान कर कोर्ट में पेश किया गया। वहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
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सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष बोले, अजीम को हम नहीं जानते
पकड़ा गया सभासद अजीम बेग समाजवादी पार्टी का बताया जा रहा है। पुलिस के अलावा कस्बे के लोग भी उसे सपा से जुड़ा बता रहे थे। इसे लेकर जब सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उनका कहना था कि वह इस नाम के किसी सभासद को नहीं जानते हैं।
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सट्टे की सूचना पर टीम ने दबिश दी थी। इस दौरान एक आरोपी ने तमंचे से फायर कर दिया। दस लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। मौके से पकड़े गए चार आरोपी जेल भेजे गए हैं। अन्य की धरपकड़ को टीम लगाई है। इन पर गैंगेस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी कराई जाएगी। - जयप्रकाश, एसपी
पुलिस पर पहले भी हमला कर चुके सट्टेबाज
पीलीभीत। पुलिस टीम पर सट्टेबाज पहले भी कई बार हमला कर चुके हैं। बीते साल दिवाली से पूर्व सीओ सिटी के निर्देश पर मोहल्ला मोहतसिम खां में एक स्थान पर दी गई दबिश के बाद चार शातिर सटोरिये पकड़े गए थे। इन सटोरियों ने पुलिस टीम पर चाकू से वार किया था, इसमें कुछ सट्टेबाज ऐसे भी थे, जिन्हें पूर्व में पुलिस पकड़ने गई थी। उस वक्त भी इन सट्टेबाजों ने कोतवाल का गला दबाकर जान लेने की कोशिश की थी।
दिवाली पर धरपकड़ के दौरान सटोरियों से 15 रजिस्टर बरामद हुए थे। उनमें धंधे से जुड़े 200 लोगों के नाम और मोबाइल नंबर अंकित थे। लेनदेन का ब्योरा भी लिखा था। कार्रवाई पर अपनी पीठ थपथपाते वक्त तो पुलिस ने रजिस्टरों की मदद से धंधेबाजों पर शिकंजा कसने का दावा किया था, लेकिन बाद में कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी। सिर्फ पकड़े गए चार लोगों पर चार्जशीट दाखिल कर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली। जेल से छूटने के बाद यह सट्टेबाज दोबारा धंधा करने में जुट गए थे। इसकी भी कई सूचनाएं पुलिस तक पहुंची थी, मगर कार्रवाई नहीं की गई। दो साल पहले पुलिस की मिलीभगत से भी सट्टे के धंधा चलने की बात सामने आई थी। तत्कालीन एसपी कलानिधि नैथानी ने सख्ती करते हुए मंडल के नामचीन सटोरिये शाहजहांपुर निवासी बेदी को पकड़वाया था। उसकी धरपकड़ के साथ ही बरेली के बारादरी थाने में तैनात सिपाही भी गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कई पुलिसकर्मियों के नाम कॉल डिटेल की मदद से उजागर हुए थे, लेकिन एसपी के तबादले के बाद कार्रवाई ठप पड़ गई थी। अभी भी कई पुलिसकर्मियों की करीबी सट्टा लगवाने वालों से है, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही।