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फर्जी दस्तावेज पर जारी निवास प्रमाण पत्र निरस्त
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पूरनपुर (पीलीभीत)। फर्जी दस्तावेज लगाकर निवास प्रमाण पत्र हासिल करने के बाद सेना में नौकरी पाने वाले रुस्तम की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। फर्जी दस्तावेज पर जारी निवास प्रमाण पत्र एक अक्तूबर को खारिज कर दिया गया। पुलिस और खुफिया विभाग ने मामले की जांच शुरू की है। बगैर जांच के निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए रिपोर्ट लगाने वाले लेखपाल को बचाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। लेखपाल की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। रुस्तम किस जिले का है। उसने निवास प्रमाण पत्र बनवाने को पूरनपुर के गांव को क्यों चुना। इसका सूत्रधार कौन है? जांच का विषय है।
गैर जनपद के रुस्तम नाम के युवक ने क्षेत्र के गांव खमरिया पट्टी का निवासी दर्शाकर निवास प्रमाण पत्र का आवेदन किया था। निवास प्रमाण पत्र बनवाने को किए गए आवेदन में लगाए गए आधार कार्ड आदि प्रमाण पत्र फर्जी लगाए गए। लेखपाल की आख्या पर तहसील से उसे निवास प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। युवक ने प्रमाण पत्र के सहारे सेना में नौकरी भी पा ली। सेना के हेड क्वाटर से जब प्रमाण पत्र की जांच शुरू हुई, तब इस नाम के व्यक्ति का गांव खमरिया पट्टी में रहना नहीं पाया गया। हालांकि दूसरा रुस्तम गांव में मिला, लेकिन उसने सेना में नौकरी के लिए आवेदन करने से इनकार कर दिया। मामले की भनक पर कहीं गड़बड़ी पकड़े जाने पर गाज न गिर जाए। इसको लेकर लेखपाल ने आनन-फानन में पूरे मामले की जानकारी अपने विभागीय अफसरों को दी। इस पर एडीएम को निवास प्रमाण पत्र निरस्त कराने की रिपोर्ट भेजी गई। उधर, लेखपाल ने प्रमाण पत्र हासिल करने वाले रुस्तम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कोतवाली पुलिस को गुरुवार को तहरीर दी। कोतवाली पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। कोतवाल अतर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। प्रमाण पत्र अगर गलत ढंग से जारी करवाया गया। तब जांच रिपोर्ट सहित रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी जानी चाहिए। तभी रिपोर्ट दर्ज होगी।
आतंकवादी का पासपोर्ट बनवाने का हो चुका है प्रयास
गलत ढंग से निवास प्रमाण पत्र हासिल करना कोई नई बात नहीं है। डेढ़ साल पहले गलत ढंग से जारी किए गए निवास प्रमाण पत्र दो आतंकवादियों के पासपोर्ट बनवाने को हुए आवेदन में पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट लगा दी थी। मामला पकड़े जाने पर दरोगा के खिलाफ कार्रवाई होने के साथ आतंकियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एक वकील को भी मामले मं जेल जाना पड़ा था।
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रुस्तम नाम के युवक ने निवास प्रमाण पत्र जारी कराने को फर्जी आईडी प्रमाण पत्र दिए। इस पर उसे निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया। जब लेखपाल ने मतदाता पहचान पत्र की ऑनलाइन जांच की। तब फर्जी अभिलेखों पर प्रमाण पत्र हासिल करना पाया गया। निवास प्रमाण निरस्त करा दिया गया है। युवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लेखपाल की ओर से कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है।
आशुतोष कुमार, तहसीलदार।
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गैर जनपद के रुस्तम नाम के युवक ने क्षेत्र के गांव खमरिया पट्टी का निवासी दर्शाकर निवास प्रमाण पत्र का आवेदन किया था। निवास प्रमाण पत्र बनवाने को किए गए आवेदन में लगाए गए आधार कार्ड आदि प्रमाण पत्र फर्जी लगाए गए। लेखपाल की आख्या पर तहसील से उसे निवास प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। युवक ने प्रमाण पत्र के सहारे सेना में नौकरी भी पा ली। सेना के हेड क्वाटर से जब प्रमाण पत्र की जांच शुरू हुई, तब इस नाम के व्यक्ति का गांव खमरिया पट्टी में रहना नहीं पाया गया। हालांकि दूसरा रुस्तम गांव में मिला, लेकिन उसने सेना में नौकरी के लिए आवेदन करने से इनकार कर दिया। मामले की भनक पर कहीं गड़बड़ी पकड़े जाने पर गाज न गिर जाए। इसको लेकर लेखपाल ने आनन-फानन में पूरे मामले की जानकारी अपने विभागीय अफसरों को दी। इस पर एडीएम को निवास प्रमाण पत्र निरस्त कराने की रिपोर्ट भेजी गई। उधर, लेखपाल ने प्रमाण पत्र हासिल करने वाले रुस्तम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने को कोतवाली पुलिस को गुरुवार को तहरीर दी। कोतवाली पुलिस ने लेखपाल की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। कोतवाल अतर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। प्रमाण पत्र अगर गलत ढंग से जारी करवाया गया। तब जांच रिपोर्ट सहित रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दी जानी चाहिए। तभी रिपोर्ट दर्ज होगी।
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आतंकवादी का पासपोर्ट बनवाने का हो चुका है प्रयास
गलत ढंग से निवास प्रमाण पत्र हासिल करना कोई नई बात नहीं है। डेढ़ साल पहले गलत ढंग से जारी किए गए निवास प्रमाण पत्र दो आतंकवादियों के पासपोर्ट बनवाने को हुए आवेदन में पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट लगा दी थी। मामला पकड़े जाने पर दरोगा के खिलाफ कार्रवाई होने के साथ आतंकियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। एक वकील को भी मामले मं जेल जाना पड़ा था।
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रुस्तम नाम के युवक ने निवास प्रमाण पत्र जारी कराने को फर्जी आईडी प्रमाण पत्र दिए। इस पर उसे निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया। जब लेखपाल ने मतदाता पहचान पत्र की ऑनलाइन जांच की। तब फर्जी अभिलेखों पर प्रमाण पत्र हासिल करना पाया गया। निवास प्रमाण निरस्त करा दिया गया है। युवक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लेखपाल की ओर से कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई है।
आशुतोष कुमार, तहसीलदार।